'कलम ही नहीं उठाना चाहती है यूपी की नौकरशाही'
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सहकारिता मंत्री शिवपाल यादव ने कहा कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के हाथों से निकलने के कारण सहकारिता कमजोर हुई है। उनके हाथों में रहती तो इतनी कमजोर न होती।
कहा, ‘मैंने सहकारी संस्थाओं को मजबूत कराने की काफी कोशिश की लेकिन तमाम बाधाओं के कारण उतना नहीं कर पाया, जितना चाहता था।
नौकरशाही तो कलम ही नहीं उठाना चाहती। वित्तीय संसाधनों की कठिनाई भी काफी आती है। फिर भी जितना हो सका, संस्थाओं को मजबूत करने का काम किया गया।’
शिवपाल शनिवार को यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में उ.प्र. को-ऑपरेटिव बैंक की सामान्य निकाय की बैठक में बोल रहे थे। सहकारिता मंत्री ने कहा, कई ऐसे अधिकारी अब भी मौजूद हैं जिनकी वजह से सहकारी संस्थाओं की हालत बिगड़ी। आज भी वे संस्थाओं को बर्बाद करने की साजिश में लगे हैं। जिलों की बैंकों और अन्य संस्थाओं के अध्यक्षों को इन पर नजर रखनी चाहिए।
दिलाएंगे तीन दिन का टीए-डीए
सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों की मांग पर शिवपाल ने लाभ में चल रही संस्थाओं के प्रतिनिधियों और अध्यक्षों को बैठकों में आने पर तीन दिन का टीए-डीए दिलाने की घोषणा की।
मार्च तक सभी बैंकों को लाइसेंस
शिवपाल ने कहा कि कई जिला सहकारी बैंकों को रिजर्व बैंक का लाइसेंस मिल गया है। बाकी को भी लाइसेंस मिल जाए, इसके लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। धन की व्यवस्था की जा रही है। मार्च तक सभी बैंकों का लाइसेंस बहाल हो जाएगा।
जिला सहकारी बैंकों के पास खूब धन
यादव ने कहा कि सरकार ने किसानों को 50 हजार रुपये तक कर्ज माफ करने पर 1800 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। जिला सहकारी बैंकों के पास भी धन की कमी नहीं है। लगभग 1800 करोड़ रुपये उनके पास मौजूद है। इसके अलावा और 5100 करोड़ की व्यवस्था की जा रही है।
माया क्या जानें समाजवाद
मुलायम पर मायावती के हमले से जुड़े सवाल पर शिवपाल ने कहा कि मायावती न समाजवाद जानती हैं, न लोहिया को और न नेताजी को। पहले इन सबके बारे में जानें, पढ़ें और समझें, फिर सोच-समझकर बोलें। उन्हें नेताजी पर बोलने का हक नहीं है।