मुसलमानों को पार्क में नमाज पढ़ने से रोकना भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे का विस्तार: शिवपाल यादव
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प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के संयोजक शिवपाल सिंह यादव ने मुस्लिमों को पार्क में नमाज पढ़ने से रोकने को असंवैधानिक करार देते हुए ऐसा आदेश देने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शिवपाल ने ट्वीट कर भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि भाजपा हिंदू-मुस्लिम विवाद को चर्चा में बनाए रखना चाहती है जिससे कि तबाह होते छोटे व मध्यम उद्योगों व कानून व्यवस्था में मिल रही असफलता पर लोगों का ध्यान न जाए।
उन्होंने कहा कि मैं सरकार से मांग करता हूं कि नमाज पर रोक लगाए जाने से संबंधित आज्ञा जारी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि पहले फरीदाबाद फिर गुड़गांव व अब नोएडा में कारखानों में काम करने वाले अप्रवासी गरीब मजदूर मुस्लिम भाइयों को पार्क में नमाज पढ़ने देने से रोकने की घटना दुःखद एवं असंवैधानिक है। ऐसा नहीं होना चाहिए।
बीजेपी हिंदू-मुस्लिम विवाद के मसलों को चर्चा में बनाए रखना चाहती है ताकि तबाह होते छोटे व मध्यम व्यापार व क़ानून व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर मिल रहीअसफलता पर बहस न हो।मैं सरकार से मांग करता हूं कि नमाज पर रोक लगाए जाने से संबंधितआज्ञा जारी करने वालेअधिकारियों पर कार्यवाही करे।
— Shivpal Singh Yadav (@shivpalsinghyad) December 27, 2018
पहले फरीदाबाद, फिर गुड़गांव व अब नोएडा में कारखानों में काम करने वाले अप्रवासी गरीब मजदूर मुस्लिम भाइयों को पार्क में नमाज पढ़े जाने से रोकने की घटना दुःखद एवं असंवैधानिक है व साथ ही यह सरकार के साम्प्रदायिक व असंवेदनशील एजेंडे का विस्तार है।
— Shivpal Singh Yadav (@shivpalsinghyad) December 27, 2018
आपको बता दें कि नोएडा के सेक्टर-58 में खुले में नमाज पढ़ने पर पुलिस की पाबंदी को लेकर देश में सियासत गर्मा गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने नमाज पढ़ने पर रोक लगाते हुए पाबंदी के फैसले को अनुचित व एकतरफा करार दिया था।
राज बब्बर ने सार्वजनिक स्थानों पर लग रही शाखाओं पर भी लगाने को लिखा पत्र
राज बब्बर ने लिखा है कि पुलिस ने प्रदेश के सभी संस्थानों और कार्यालयों को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि उनके यहां काम करने वाले कर्मचारी संस्थान परिसर के अंदर व परिसर के बाहर स्थित सार्वजनिक पार्कों में अपने कर्मचारियों को नमाज पढ़ने से रोकें। इसमें हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला भी दिया गया है। जबकि, सर्विस कंडक्ट रूल्स में स्पष्ट रूप से लिखा है कि संस्थान के कर्मचारी या सरकारी संस्था के कर्मचारी या परिवार के सदस्य किसी भी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकते है।