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शिक्षा की डगर पर खतरों भरा सफर
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जेसी बोस मार्ग स्थित लखनऊ इंटर कॉलेज का जर्जर भवन।
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राजधानी में कई माध्यमिक स्कूलों के भवन जर्जर हो चुके हैं। दीवारों और छतों की हालत ऐसी कि कभी भी ढह जाएं। यहां पढ़ने वाले बच्चे जान हथेली पर रखकर स्कूल आते हैं। बरसात के मौसम में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यहां कभी भी जीजीआईसी नरही जैसा हादसा हो सकता है। वहीं दूसरी ओर इन स्कूलों का प्रबंधन फंड की कमी का रोना रोता है। फीस वसूल नहीं सकते और सरकार की तरफ से ग्रांट मिलने का प्रावधान है नहीं।
तीन साल पहले ढह गई थी स्टाफ रूम की छत
सदर स्थित हरीचंद इंटर कॉलेज को मान्यता 1966 में मिली। तब से आज तक इस स्कूल की मरम्मत तो दूर रंग-रोगन तक नहीं हुआ। भवन इतना जर्जर है कि तीन साल पहले ही स्टाफ रूम की छत ढह गई थी। पांच कमरे इतने खस्ताहाल हैं कि उन्हें बंद कर दिया गया है। प्रयोगशाला में तो पिछले 25 वर्षों से ताला लगा है। करीब 250 छात्र अब सामने बनी नई कक्षाओं में पढ़ते हैं। लेकिन स्टाफ पुराने भवन में ही बैठता है। प्रयोगशाला आज तक नहीं बन पाई।
दो मंजिला स्कूल, पहली मंजिल पूरी तरह से बंद
लालबाग स्थित लखनऊ इंटरमीडिएट स्कूल करीब 82 साल पुराना है। दो मंजिला इस स्कूल में पहली मंजिल के सभी कमरे खस्ताहाल होने के चलते बंद कर दिए गए हैं। सभी प्रयोगशालाएं पहली मंजिल पर ही हुआ करती थीं। कई वर्ष पहले छत ढहने के बाद से प्रयोगशालाओं समेत सभी कमरों में ताला जड़ दिया गया। सीढ़ियां तक कई जगह से टूट गई हैं। वहीं भूतल के 10 कमरों में से भी अधिकांश जर्जर हैं। वर्ष 2018 में प्रबंधन ने इसे ढहाने का प्रयास भी किया। तब से मामला विवादित चल रहा है। भवन खस्ताहाल होने के चलते हर साल छात्रों की संख्या गिरती जा रही है। अब यहां बमुश्किल 90 छात्र ही पढ़ते हैं।
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इनकी हालत भी बहुत अच्छी नहीं
हुसैनगंज स्थित चुटकी भंडार गर्ल्स कॉलेज की हालत भी किसी से छिपी नहीं है। विद्यालय का प्राइमरी सेक्शन जर्जर होने की वजह से बंद कर दिया गया है। प्रबंधन ने इसे जर्जर घोषित कराने का काफी प्रयास किया। न्यायालय की शरण में भी गए, लेकिन विभाग ने इसमें ज्यादा रुचि नहीं ली। इस विद्यालय की नींव महात्मा गांधी ने वर्ष 1921 में रखी थी। वहीं नरही स्थित सहाय सिंह बालिका इंटर कॉलेज के भवन का भी कुछ हिस्सा खस्ताहाल है। सीमित जगह व संसाधन होने के चलते इसकी मरम्मत तक नहीं हो पाती। यहां भी छात्राओं की संख्या में इजाफा नहीं हो पा रहा है।
जीजीआईसी नरही में चटाई पर लगी छात्राओं की क्लास
जीजीआईसी नरही में मंगलवार को छात्राओं की क्लास बरामदे में चटाई पर लगी। कुछ छात्राएं बरामदे में टीन शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई कर रहीं थीं। रविवार को कॉलेज की दो कक्षाओं की छत ढहने की वजह से छात्राओं को बाहर बैठकर पढ़ना पड़ा।
छत ढहने की जानकारी कॉलेज प्रशासन को गत सोमवार को मिली जब कॉलेज का ताला खोला गया।
कॉलेज में करीब 140 छात्राएं पंजीकृत हैं और दोनों कक्षाओं में कक्षा छह और सात की छात्राएं पढ़ती थीं। अब अन्य कक्षाओं की भी पढ़ाई भी सुरक्षा कारणों से बाहर ही कराई जा रही है। छत ढहने की घटना से छात्राएं भयभीत हैं। काफी छात्राएं मंगलवार को कॉलेज नहीं आईं। प्रधानाचार्य रूपम सिंह ने बताया कि कक्षा में मलबा भी वैसे ही पड़ा है। वहीं मंगलवार को अधिकारियों के कॉलेज के निरीक्षण का सिलसिला जारी रहा। दिन में विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा शंभुनाथ, जेडी सुरेंद्र तिवारी, प्रभारी डीआईओएस रीता सिंह कॉलेज का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने पूरी रिपोर्ट तलब की। पूर्व में कई बार विभाग को कॉलेज की जर्जर हालत के बारे में जानकारी दी गई थी। वहीं बताया जा रहा है कि कॉलेज की तरफ से छत, फर्श आदि की मरम्मद के लिए एस्टीमेट बनाया गया था, लेकिन वह नाकाफी था। वहीं रात में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला भी कॉलेज का निरीक्षण करने पहुंचीं। उनके साथ जेडी सुरेंद्र तिवारी भी थे। अपर मुख्य सचिव ने जेडी से कॉलेज की रिपोर्ट तलब की।
कॉलेज का अभी तक हैंडओवर नहीं
बताया जा रहा है कि पूर्ववर्ती सरकार की ओर से बनवाए गए राजकीय बालिका इंटर कॉलेज जियामऊ में कॉलेज को शिफ्ट किया जाना था, लेकिन अभी तक विभाग ने कॉलेज का हैंडओवर नहीं लिया। कॉलेज के बगल में पानी की टंकी है। बताया जा रहा है कि उसी के विवाद के चलते विभाग ने कॉलेज को अपनी सुपुर्दगी में नहीं लिया।
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तीन साल पहले ढह गई थी स्टाफ रूम की छत
सदर स्थित हरीचंद इंटर कॉलेज को मान्यता 1966 में मिली। तब से आज तक इस स्कूल की मरम्मत तो दूर रंग-रोगन तक नहीं हुआ। भवन इतना जर्जर है कि तीन साल पहले ही स्टाफ रूम की छत ढह गई थी। पांच कमरे इतने खस्ताहाल हैं कि उन्हें बंद कर दिया गया है। प्रयोगशाला में तो पिछले 25 वर्षों से ताला लगा है। करीब 250 छात्र अब सामने बनी नई कक्षाओं में पढ़ते हैं। लेकिन स्टाफ पुराने भवन में ही बैठता है। प्रयोगशाला आज तक नहीं बन पाई।
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दो मंजिला स्कूल, पहली मंजिल पूरी तरह से बंद
लालबाग स्थित लखनऊ इंटरमीडिएट स्कूल करीब 82 साल पुराना है। दो मंजिला इस स्कूल में पहली मंजिल के सभी कमरे खस्ताहाल होने के चलते बंद कर दिए गए हैं। सभी प्रयोगशालाएं पहली मंजिल पर ही हुआ करती थीं। कई वर्ष पहले छत ढहने के बाद से प्रयोगशालाओं समेत सभी कमरों में ताला जड़ दिया गया। सीढ़ियां तक कई जगह से टूट गई हैं। वहीं भूतल के 10 कमरों में से भी अधिकांश जर्जर हैं। वर्ष 2018 में प्रबंधन ने इसे ढहाने का प्रयास भी किया। तब से मामला विवादित चल रहा है। भवन खस्ताहाल होने के चलते हर साल छात्रों की संख्या गिरती जा रही है। अब यहां बमुश्किल 90 छात्र ही पढ़ते हैं।
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इनकी हालत भी बहुत अच्छी नहीं
हुसैनगंज स्थित चुटकी भंडार गर्ल्स कॉलेज की हालत भी किसी से छिपी नहीं है। विद्यालय का प्राइमरी सेक्शन जर्जर होने की वजह से बंद कर दिया गया है। प्रबंधन ने इसे जर्जर घोषित कराने का काफी प्रयास किया। न्यायालय की शरण में भी गए, लेकिन विभाग ने इसमें ज्यादा रुचि नहीं ली। इस विद्यालय की नींव महात्मा गांधी ने वर्ष 1921 में रखी थी। वहीं नरही स्थित सहाय सिंह बालिका इंटर कॉलेज के भवन का भी कुछ हिस्सा खस्ताहाल है। सीमित जगह व संसाधन होने के चलते इसकी मरम्मत तक नहीं हो पाती। यहां भी छात्राओं की संख्या में इजाफा नहीं हो पा रहा है।
जीजीआईसी नरही में चटाई पर लगी छात्राओं की क्लास
जीजीआईसी नरही में मंगलवार को छात्राओं की क्लास बरामदे में चटाई पर लगी। कुछ छात्राएं बरामदे में टीन शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई कर रहीं थीं। रविवार को कॉलेज की दो कक्षाओं की छत ढहने की वजह से छात्राओं को बाहर बैठकर पढ़ना पड़ा।
छत ढहने की जानकारी कॉलेज प्रशासन को गत सोमवार को मिली जब कॉलेज का ताला खोला गया।
कॉलेज में करीब 140 छात्राएं पंजीकृत हैं और दोनों कक्षाओं में कक्षा छह और सात की छात्राएं पढ़ती थीं। अब अन्य कक्षाओं की भी पढ़ाई भी सुरक्षा कारणों से बाहर ही कराई जा रही है। छत ढहने की घटना से छात्राएं भयभीत हैं। काफी छात्राएं मंगलवार को कॉलेज नहीं आईं। प्रधानाचार्य रूपम सिंह ने बताया कि कक्षा में मलबा भी वैसे ही पड़ा है। वहीं मंगलवार को अधिकारियों के कॉलेज के निरीक्षण का सिलसिला जारी रहा। दिन में विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा शंभुनाथ, जेडी सुरेंद्र तिवारी, प्रभारी डीआईओएस रीता सिंह कॉलेज का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने पूरी रिपोर्ट तलब की। पूर्व में कई बार विभाग को कॉलेज की जर्जर हालत के बारे में जानकारी दी गई थी। वहीं बताया जा रहा है कि कॉलेज की तरफ से छत, फर्श आदि की मरम्मद के लिए एस्टीमेट बनाया गया था, लेकिन वह नाकाफी था। वहीं रात में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला भी कॉलेज का निरीक्षण करने पहुंचीं। उनके साथ जेडी सुरेंद्र तिवारी भी थे। अपर मुख्य सचिव ने जेडी से कॉलेज की रिपोर्ट तलब की।
कॉलेज का अभी तक हैंडओवर नहीं
बताया जा रहा है कि पूर्ववर्ती सरकार की ओर से बनवाए गए राजकीय बालिका इंटर कॉलेज जियामऊ में कॉलेज को शिफ्ट किया जाना था, लेकिन अभी तक विभाग ने कॉलेज का हैंडओवर नहीं लिया। कॉलेज के बगल में पानी की टंकी है। बताया जा रहा है कि उसी के विवाद के चलते विभाग ने कॉलेज को अपनी सुपुर्दगी में नहीं लिया।