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खुशखबरी: अब और आसान होगी कैंसर की जांच

Sat, 16 May 2015 02:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 16 May 2015 02:23 PM IST
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sgpgi cyclotron cancer detection

संजय गांधी पीजीआई में घोटालों की जाल में फंसी साइक्लोट्रॉन मशीन आखिरकार काम करने लगी। पीईटी (पॉजिट्रॉन इमीशन टोमोग्राफी) स्कैन से कैंसर की जांच के लिए साइक्लोट्रॉन मशीन से रेडियो एक्टिव मैटेरियल तैयार किया जाता है।

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अभी तक ये मैटेरियल भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) से हवाई जहाज से मंगाया जा रहा था। साइक्लोट्रॉन मशीन से अब ये रेडियो एक्टिव मैटेरियल पीजीआई में ही बनाया जा सकेगा।
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इस मशीन से बने रेडियो आइसोटोप लोहिया इंस्टीट्यूट में भी पेट स्कैन को दिए जा सकेंगे। बुधवार को संस्थान की जनरल बॉडी मीटिंग में इसकी विधिवत घोषणा कर दी गई।
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एईआरबी (एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड) और बार्क की टीम से एनओसी मिलने के बाद इससे रेडियो एक्टिव आइसोटोप बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। संस्थान में ही रेडियो एक्टिव आइसोटोप बनने से अब पीईटी स्कैन रोजाना हो सकेगा।

डेढ़ साल से डिब्बे में बंद है मशीन

sgpgi cyclotron cancer detection

अभी तक सप्ताह में तीन दिन ही ये जांच होती है। उम्मीद की जा रही है कि पीईटी स्कैन का शुल्क भी कुछ कम हो सकेगा। मुंबई से आइसोटोप लाने का खर्च बचने जांच शुल्क में की संभावना व्यक्त की जा रही है।

वर्ष 2011 में आई साइक्लोट्रॉन मशीन लगभग डेढ़ साल तक डिब्बे में ही बंद रही। पहले इसके लिए अंडरग्राउंड बंकर नहीं बना था। मशीन की आपूर्ति करने वाली गुजरात आइसोटोप कंपनी ने बंकर निर्माण की कोई गाइडलाइन नहीं तैयार की थी।

इसके बाद कई साल तक बंकर ही नहीं बन पाया। लगभग डेढ़ साल पहले मशीन की जरूरत के अनुसार मानकों को ध्यान में रखते हुए बंकर का निर्माण पूरा कराया गया और मशीन स्थापित की गई।
 
मशीन खुलने पर पता चला कि लगभग एक करोड़ रुपये की कीमत के सबसे महत्वपूर्ण रेडिएशन मॉनीटर और सेकेंडरी कूलिंग सिस्टम की कंपनी ने दिए ही नहीं थे।

इन उपकरणों के बगैर इस मशीन को चलाया नहीं जा सकता था। इसके बाद कंपनी से पत्राचार कर सभी उपकरण मंगाए गए। इन सब प्रक्रिया में चार साल का समय लग गया।

छोटे से छोटे ट्यूमर को भी ढूंढ लेगी मशीन

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शरीर में छिपी कैंसर कोशिकाओं को ढूंढने और उन्हें खत्म करने के लिए पीईटी सीटी का इस्तेमाल किया जाता है। इस मशीन से छोटे से छोटे ट्यूमर का पता लगाना संभव होता है।

मरीज में रेडियो एक्टिव तत्व एफ-18, ओ-15, एन-13, सी-11 मरीज में इंजेक्ट किया जाता है। यह तत्व पॉजीट्रान का उत्सर्जन मरीज में करते हैं।
उत्सर्जन को पीईटी मशीन पढ़ कर सही तस्वीर पेश करता है। मरीज को जो रेडियो एक्टिव तत्व इंजेक्ट किया जाता है उसका निर्माण साइक्लोट्रॉन मशीन करती है।

चूंकि रेडियो एक्टिव तत्व की लाइफ बहुत कम होती है इसलिए उसका निर्माण करने की सुविधा होना जरूरी है। इसीलिए पीईटी सीटी स्कैन के साथ साइक्लोट्रॉन मशीन होना भी जरूरी होता है।

संजय गांधी पीजीआई प्रदेश का पहला संस्थान है जहां यह मशीन है। लोहिया इंस्टीट्यूट में पीईटी सीटी स्कैन है लेकिन साइक्लोट्रॉन मशीन वहां भी नहीं है।

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