किशोर अपराधों में यौन अपराध के सर्वाधिक मामले
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उत्तर प्रदेश में इस समय किशोर अपराधों में सबसे ज्यादा मामले यौन अपराधों के हैं। किशोर अपराधों के कुल 1077 मामलों में से 406 यौन अपराधों के हैं। दूसरे नंबर पर प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेन्सेज (पोक्सो) एक्ट के तहत दर्ज मामले हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक को-ऑपरेशन एंड चाइल्ड डवलपमेंट (एनआईपीसीसीडी) के क्षेत्रीय केंद्र में आयोजित कार्यशाला के अंतिम दिन शुक्रवार को यूपी की ओर से ये आंकड़े पेश किए गए। कार्यशाला में उत्तर प्रदेश के साथ ही बिहार, उड़ीसा, झारखंड, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने प्रदेश में किए जा रहे काम और पेश आने वाली चुनौतियों को रखा।
उत्तर प्रदेश के महिला एवं बाल कल्याण विभाग के सीएफओ अशोक कुमार मिश्रा ने बताया कि सूबे में पोक्सो के तहत कुल 323 मामले दर्ज किए गए। वहीं कत्ल के आरोप में 217 किशोरों को संप्रेक्षण गृहों में रखा गया है।
उन्होंने कहा कि मामलों का समय से निपटारा न होने से संप्रेक्षण गृहों में बाल अपराधियों की संख्या बढ़ने से व्यवस्था संभालना मुश्किल हो रहा है। हालांकि प्रदेश सरकार इसमें सुधार के लिए प्रयासरत है।
बनाया जा रहा है प्लेस ऑफ सेफ्टी
इसके तहत महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से गाजीपुर में प्लेस ऑफ सेफ्टी का निर्माण किया जा रहा है। प्रजेंटेशन के माध्यम से हर महीने बाल संवाद के माध्यम से बच्चों की समस्याओं का निपटारा और गोद लेने के लिए लोगों को जागरूक करने समेत विभाग की तमाम उपलब्धियां बताई गईं।
कार्यशाला में केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी आशी कपूर, विशेष सचिव गृह विभाग, उत्तर प्रदेश मिनिस्ती एस., एनआईपीसीसीडी के क्षेत्रीय केंद्र निदेशक डॉ. केसी जॉर्ज, सहायक निदेशक मुकेश कुमार और सुनील मौर्य उपस्थित रहे।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सुनवाई
प्रदेश में जल्द ही किशोर अपचारियों के मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी। ऐसे में किशोर अपचारियों को जेजे बोर्ड के सामने लेकर नहीं जाना पड़ेगा। यह व्यवस्था फिलहाल फतेहगढ़ व प्रतापगढ़ समेत चार जिलों में शुरू होगी। सकारात्मक परिणाम मिलने पर इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
सूबे में बाल अपराधों की स्थिति
कुल मामले- 1077
यौन अपराध (376)- 403
पोक्सो एक्ट - 323
हत्या- 217
गैंगस्टर- 64
अन्य -70
कार्यशाला में आए सुझाव
बाल गृह और संप्रेक्षण गृहों में योग, आर्ट एंड क्राफ्ट तथा संगीत शिक्षण की व्यवस्था की जाए।
जेजे बोर्ड में सुनवाई करने वाले अध्यक्ष और अन्य कर्मचारियों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।
योजना के बिलों का समय से भुगतान किया जाए।
चाइल्ड प्रोटेक्शन के ट्रेनर्स की संख्या बढ़ाई जाए।