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Lucknow News: यूपी में टेबल टेनिस की उड़ान पर लगा ब्रेक
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अनुराग बाजपेईलखनऊ। यूपी में टेबल टेनिस की प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन जूनियर वर्ग में चमकने वाले पैडलर सीनियर स्तर पर उसी सफलता को बरकरार नहीं रख पा रहे हैं। यही वजह है कि राष्ट्रीय मंच पर यूपी की झोली बड़ी उपलब्धियों के लिए अब भी खाली है। इस साल मार्च में सीनियर नेशनल इंटर स्टेट चैंपियनशिप में यूपी की महिला टीम ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास जरूर रचा, लेकिन इस प्रदर्शन को दूसरे आयुवर्गों और बड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दोहराने की चुनौती बरकरार है। हालांकि, खेेल की एसोसिएशन शीर्ष आठ टीमों में जगह बनाकर राष्ट्रीय खेलों के लिए क्वालिफाई करना ही बड़ी उपलब्धि मानती है।
प्रदेश की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए एसोसिएशन के साथ राज्य सरकार को भी बुनियादी स्तर पर काम करने की जरूरत है। सीनियर वर्ग में 21 वर्षीय दिव्यांश श्रीवास्तव यूपी का सबसे बड़ा चेहरा हैं। वह अल्टीमेट टेबल टेनिस में डेम्पो गोवा चैलेंजर्स का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके खाते में कई उपलब्धियां हैं। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत उपस्थिति के लिए किसी एक खिलाड़ी पर निर्भरता पर्याप्त नहीं है। गाजियाबाद के सार्थक मिश्रा और अवनी त्रिपाठी तथा लखनऊ के लक्ष्य कुमार ने भी राष्ट्रीय स्तर पर दमदार प्रदर्शन कर अपनी पहचान बनाई है।
नौ साल बाद यूपी में लौटेगी सीनियर नेशनल रैंकिंग चैंपियनशिप : यूपी में टेबल टेनिस के लिए सुविधाओं की कमी भी बड़ी चुनौती है। अंतरराष्ट्रीय आयोजन तो दूर, राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की मेजबानी भी आसानी से नहीं मिलती। प्रदेश में ऐसा कोई सरकारी इंडोर स्टेडियम नहीं है, जहां एक साथ 20 टेबल लगाकर राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले कराए जा सकें। फंड की कमी के चलते एसोसिएशन भी बड़े आयोजनों की मेजबानी लेने से कतराती रही है। अब नौ साल के लंबे अंतराल के बाद यूपी को सीनियर नेशनल रैंकिंग चैंपियनशिप की मेजबानी मिली है। कानपुर के निजी इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 16 से 23 अगस्त तक प्रतियोगिता होगी। इससे पहले 2017 में ग्रेटर नोएडा में सीनियर नेशनल रैंकिंग चैंपियनशिप हुई थी, जबकि 2012 में लखनऊ के साई सेंटर में सीनियर नेशनल चैंपियनशिप आयोजित की गई थी।
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सुविधाओं को बढ़ाए बिना नहीं बनेगी बात : यूपी टेबल टेनिस एसोसिएशन के सचिव अरुण बनर्जी के मुताबिक प्रदेश में इस खेल का भविष्य संवारने के लिए बुनियादी स्तर पर काम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में एक भी ऐसा सरकारी स्टेडियम नहीं है, जहां एक साथ 20 टेबल लगाकर मुकाबले कराए जा सकें। हालांकि केडी सिंह बाबू स्टेडियम में राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए उपयुक्त बड़ा इंडोर हॉल बनाया गया है, लेकिन वहां पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि खेल विभाग को पत्र लिखकर हॉल की प्रकाश व्यवस्था एक हजार से 1200 लक्स करने का अनुरोध किया गया है। यदि यह व्यवस्था हो जाती है तो राजधानी में बड़े राष्ट्रीय आयोजन कराना संभव होगा। ऐसे आयोजनों से यूपी के खिलाड़ियों को घरेलू मैदान पर बड़े मुकाबलों का अनुभव मिलेगा और देश के शीर्ष खिलाड़ियों के साथ रहकर उन्हें अपना कॅरिअर संवारने का अवसर भी मिलेगा।
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प्रदेश की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए एसोसिएशन के साथ राज्य सरकार को भी बुनियादी स्तर पर काम करने की जरूरत है। सीनियर वर्ग में 21 वर्षीय दिव्यांश श्रीवास्तव यूपी का सबसे बड़ा चेहरा हैं। वह अल्टीमेट टेबल टेनिस में डेम्पो गोवा चैलेंजर्स का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके खाते में कई उपलब्धियां हैं। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत उपस्थिति के लिए किसी एक खिलाड़ी पर निर्भरता पर्याप्त नहीं है। गाजियाबाद के सार्थक मिश्रा और अवनी त्रिपाठी तथा लखनऊ के लक्ष्य कुमार ने भी राष्ट्रीय स्तर पर दमदार प्रदर्शन कर अपनी पहचान बनाई है।
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नौ साल बाद यूपी में लौटेगी सीनियर नेशनल रैंकिंग चैंपियनशिप : यूपी में टेबल टेनिस के लिए सुविधाओं की कमी भी बड़ी चुनौती है। अंतरराष्ट्रीय आयोजन तो दूर, राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की मेजबानी भी आसानी से नहीं मिलती। प्रदेश में ऐसा कोई सरकारी इंडोर स्टेडियम नहीं है, जहां एक साथ 20 टेबल लगाकर राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले कराए जा सकें। फंड की कमी के चलते एसोसिएशन भी बड़े आयोजनों की मेजबानी लेने से कतराती रही है। अब नौ साल के लंबे अंतराल के बाद यूपी को सीनियर नेशनल रैंकिंग चैंपियनशिप की मेजबानी मिली है। कानपुर के निजी इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 16 से 23 अगस्त तक प्रतियोगिता होगी। इससे पहले 2017 में ग्रेटर नोएडा में सीनियर नेशनल रैंकिंग चैंपियनशिप हुई थी, जबकि 2012 में लखनऊ के साई सेंटर में सीनियर नेशनल चैंपियनशिप आयोजित की गई थी।
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सुविधाओं को बढ़ाए बिना नहीं बनेगी बात : यूपी टेबल टेनिस एसोसिएशन के सचिव अरुण बनर्जी के मुताबिक प्रदेश में इस खेल का भविष्य संवारने के लिए बुनियादी स्तर पर काम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में एक भी ऐसा सरकारी स्टेडियम नहीं है, जहां एक साथ 20 टेबल लगाकर मुकाबले कराए जा सकें। हालांकि केडी सिंह बाबू स्टेडियम में राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए उपयुक्त बड़ा इंडोर हॉल बनाया गया है, लेकिन वहां पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि खेल विभाग को पत्र लिखकर हॉल की प्रकाश व्यवस्था एक हजार से 1200 लक्स करने का अनुरोध किया गया है। यदि यह व्यवस्था हो जाती है तो राजधानी में बड़े राष्ट्रीय आयोजन कराना संभव होगा। ऐसे आयोजनों से यूपी के खिलाड़ियों को घरेलू मैदान पर बड़े मुकाबलों का अनुभव मिलेगा और देश के शीर्ष खिलाड़ियों के साथ रहकर उन्हें अपना कॅरिअर संवारने का अवसर भी मिलेगा।