'कांशीराम ने खुद कहा था पैसा बटोरना मायावती की प्राथमिकता'
आरके चौधरी ने भी मायावती पर टिकट बेचने का आरोप लगाया और कहा, उन्हें धन उगाही का शौक है। बीएसपी अब रियल स्टेट कंपनी बनती जा रही है। मायावती चाटुकारों के कहने पर फैसले लेती हैं। उन्होंने कहा, बसपी टिकट बिक्री की मंडी बन चुकी है। कहा कि बसपा में भूमाफियाओं और ठेकेदारों को टिकट मिल रहे हैं। आरके चौधरी ने 11 जुलाई को समर्थकों की मीटिंग बुलाई है। मीटिंग के बाद वह अगली रणनीति का खुलासा करेंगे।
उन्होंने कहा कि गलत नीतियों और बिगडती कार्यशैली के कारण देश भर में पार्टी का ग्राफ दिनों दिन गिरता जा रहा है। पार्टी के तमाम अच्छे मिशनरी नेताओं ने आरोप लगाया और पार्टी छोड़ी लेकिन मायावती में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कांशीराम एक बार खुद कह चुके हैं कि मायावती को पैसा बटोरने की हवस है। मायावती ने कांशीराम के सामाजिक परिवर्तन आंदोलन को मटियामेट कर दिया है।
बता दें कि आरके चौधरी कांशीराम के साथी रहे हैं। उन्होंने कांशीराम के साथ मिलकर बसपा की नींव रखी थी। बसपा की स्थापना से पहले दलित समाज को जागरूक करने के अभियान में वह कांशीराम के साथ थे।
बसपा में मायावती का प्रभाव बढ़ने के साथ उन्हें 2001 में पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इसके बाद वह 12 साल बाद 2013 में फिर से बसपा में शामिल हुए थे। चौधरी ने बीएस4 पार्टी छोड़कर बसपा ज्वॉइन की थी।
जानें आरके चौधरी के बारे में
आरके चौधरी बसपा के सबसे पुराने नेता हैं, वह कांशीराम के करीबी रहे हैं।
चौधरी बसपा के मिर्जापुर जोन के कोऑर्डिनेटर थे।
आरके चौधरी पासी समाज से ताल्लुक रखते हैं उन्हें पासी समाज का बड़ा नेता माना जाता है।
बसपा की स्थापना से पहले आरके चौधरी दलित समाज को जागरूक करने के अभियान में कांशीराम के साथ थे।
उन्होंने कांशीराम के साथ मिलकर बसपा की नींव रखी थी।
बीएसपी और सपा की साझी सरकार में आरके चौधरी मंत्री थे।
2001 में पार्टी में मायावती का दबदबा बढ़ने के साथ आरके चौधरी को पार्टी से निकाल दिया गया।
बीएसपी का साथ छूटने के बाद चौधरी ने स्वाभिमान पार्टी बनाई।
स्वाभिमान पार्टी से वह दो बार मोहनलालगंज विधानसभा से चुनाव जीते।
2013 में उन्होंने फिर बसपा में वापसी की।