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कोरोना की दूसरी लहर ने खराब की रीयल एस्टेट की सेहत
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अतुल भारद्वाज
राजधानी में कोरोना की दूसरी लहर ने रीयल एस्टेट सेक्टर को चौपट कर दिया है। इलाज पर भारी-भरकम खर्च, कोरोना से खुद के साथ किसी भी तरह की अनहोनी का डर और भविष्य की अनिश्चितता की स्थिति ने रीयल एस्टेट में खरीदारी 60 से 70 प्रतिशत तक कम कर दी है।
पहली लहर के बाद नवरात्र में बेहतरी की तरफ देख रहे पूरे सेक्टर में दूसरी लहर ने नई बुकिंग की जगह निरस्त करने की मांग ने आने वाले दिनों में मंदी के संकेत दे दिए हैं।
एलडीए तक अपनी बसंतकुंज योजना में भूखंड के रिफंड मांगे जाने की दिक्कत झेल रहा है। यह उस वक्त है जब एलडीए के भूखंड की हमेशा मांग रहती है।
रीयल एस्टेट से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे अधिक प्रभावित मध्य और छोटे स्तर पर काम करने वाले विकासकर्ता हैं जोकि 30 लाख रुपये या इससे कम बजट में आशियाना बनाने के लिए प्रोजेक्ट करते हैं।
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खासतौर पर इसमें मध्य वर्ग या इससे निचले वर्ग के परिवार अपने भूखंड खरीदकर निर्माण कराते हैं। कुछ बना हुआ मकान भी खरीदते हैं। ऐसे परिवारों को कोरोना का डर सबसे अधिक हैं।
वह मुश्किल की घड़ी में परिजनों के इलाज के लिए जरूरी फंड अपने पास खर्च के लिए रखना चाहते हैं। पहली लहर के बाद खुद का मकान होने की प्राथमिकता भी ऐसे में बदल गई है। अब लोगों की सोच है कि सब सामान्य रहा तभी अब मकान या भूखंड खरीदने के बारे में सोचेंगे।
यह हालात पूरे लखनऊ में बने हुए हैं। अभी तक मांग में बने हुए आउटर रिंगरोड, सुल्तानपुर रोड, कानपुर रोड तक पर कॉलोनियों के प्रोजेक्टों में भूखंड नहीं बिक पा रहे हैं।
बिल्डर कंपनियां अपने खर्च निकालने के लिए संपर्क में आने वाले ग्राहकों से मोलभाव भी करने को तैयार हैं। इसके बाद भी खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं।
आउटर रिंगरोड, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस वे जैसे आकर्षण भी बिल्डर्स के लिए नाकाफी साबित हो रहे हैं।
नए प्रोजेक्टों पर काम नहीं
एलडीए के एक अधिकारी ने बताया कि मानचित्र पास होने के लिए अब नहीं आ रहे हैं। घर बनाने के लिए छोटे नक्शे जहां बिल्कुल भी आना बंद हो गए हैं वहीं बड़े नक्शे भी एक साल में केवल तीन ही स्वीकृत हुए। केवल पांच आवेदन ही आए थे। इनमें से दो निरस्त हो गए। जो तीन स्वीकृत हुए हैं। वही सभी 150 या इससे कम फ्लैट के प्रोजेक्ट हैं। कोई नई कॉलोनी का ले-आउट इसमें नहीं है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिल्डर्स पुराने प्रोजेक्टों को ही किसी तरह खत्म करने की कोशिश है।
टाउनशिप में भी बदल रहे डिजाइन
एलडीए में अभी हाईटेक या इंटीग्रेटेड टाउनशिप में भी डिजाइन बदले जा रहे हैं। कोरोना की वजह से ग्राहक नहीं मिलने से कंपनियों में पैसा भी नहीं जमा हो पा रहा है। ऐसे में किसी भी तरह फंड जुटाने का दबाव है। ऐसे में ग्रुप हाउसिंग के प्रोजेक्टों को खत्म कर वहां आवासीय भूखंड के प्रोजेक्ट किए जा रहे हैं। इसके लिए ले-आउट में बदलाव भी एलडीए से कराए जा रहे हैं। इन आवासीय भूखंड को भी बड़े ब्रांड के पीछे होने के बाद भी बेचना मुश्किल हो गया है।
तीसरी लहर की खबरों ने बढ़ाया संकट
गृह बिल्डर्स के निदेशक विश्वजीत त्रिपाठी का कहना है कि पिछले दिनों में हालात सुधरना शुरू हुए थे। दूसरी लहर ने पूरी तरह ग्राहकों को दूर कर दिया है। पूरे अप्रैल महीने में एक भी बुकिंग भूखंड या मकान के लिए नहीं है। यह उस वक्त है जबकि प्राइम लोकेशन पर हम प्रोजेक्ट कर रहे हैं। पूर्व की बुकिंग भी लोग निरस्त करा रहे हैं। हालात कब तक ठीक होंगे? इसकी भी उम्मीद नहीं है। तीसरी लहर आने की भी खबरें आ रही हैं। अब लग रहा है कि हालात जब तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाते। रीयल एस्टेट सेक्टर में खरीदारों की वापसी नहीं हो पाएगी।
लोगों ने रजिस्ट्रियां तक टाल दीं
श्रीराज इंफ्रा बिल्डर्स के निदेशक राजेश पांडेय का कहना है कि पहले की बुकिंग होने के बाद भी लोग अब आगे की किश्तें जमा नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी की परिवार में तबीयत बिगड़ी तो पैसे की जरूरत होगी। ऐसे में जिन खरीदारों की रजिस्ट्री की जानी थीं, वह भी कोरोना की वजह से टल गईं। 2020 के संकट से लगा था कि सेक्टर उबर गया है। लेकिन, दूसरी लहर ने पहले से भी खराब स्थिति में पहुंचा दिया है। आगे का भी कुछ साफ नहीं दिख रहा है।
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राजधानी में कोरोना की दूसरी लहर ने रीयल एस्टेट सेक्टर को चौपट कर दिया है। इलाज पर भारी-भरकम खर्च, कोरोना से खुद के साथ किसी भी तरह की अनहोनी का डर और भविष्य की अनिश्चितता की स्थिति ने रीयल एस्टेट में खरीदारी 60 से 70 प्रतिशत तक कम कर दी है।
पहली लहर के बाद नवरात्र में बेहतरी की तरफ देख रहे पूरे सेक्टर में दूसरी लहर ने नई बुकिंग की जगह निरस्त करने की मांग ने आने वाले दिनों में मंदी के संकेत दे दिए हैं।
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एलडीए तक अपनी बसंतकुंज योजना में भूखंड के रिफंड मांगे जाने की दिक्कत झेल रहा है। यह उस वक्त है जब एलडीए के भूखंड की हमेशा मांग रहती है।
रीयल एस्टेट से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे अधिक प्रभावित मध्य और छोटे स्तर पर काम करने वाले विकासकर्ता हैं जोकि 30 लाख रुपये या इससे कम बजट में आशियाना बनाने के लिए प्रोजेक्ट करते हैं।
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खासतौर पर इसमें मध्य वर्ग या इससे निचले वर्ग के परिवार अपने भूखंड खरीदकर निर्माण कराते हैं। कुछ बना हुआ मकान भी खरीदते हैं। ऐसे परिवारों को कोरोना का डर सबसे अधिक हैं।
वह मुश्किल की घड़ी में परिजनों के इलाज के लिए जरूरी फंड अपने पास खर्च के लिए रखना चाहते हैं। पहली लहर के बाद खुद का मकान होने की प्राथमिकता भी ऐसे में बदल गई है। अब लोगों की सोच है कि सब सामान्य रहा तभी अब मकान या भूखंड खरीदने के बारे में सोचेंगे।
यह हालात पूरे लखनऊ में बने हुए हैं। अभी तक मांग में बने हुए आउटर रिंगरोड, सुल्तानपुर रोड, कानपुर रोड तक पर कॉलोनियों के प्रोजेक्टों में भूखंड नहीं बिक पा रहे हैं।
बिल्डर कंपनियां अपने खर्च निकालने के लिए संपर्क में आने वाले ग्राहकों से मोलभाव भी करने को तैयार हैं। इसके बाद भी खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं।
आउटर रिंगरोड, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस वे जैसे आकर्षण भी बिल्डर्स के लिए नाकाफी साबित हो रहे हैं।
नए प्रोजेक्टों पर काम नहीं
एलडीए के एक अधिकारी ने बताया कि मानचित्र पास होने के लिए अब नहीं आ रहे हैं। घर बनाने के लिए छोटे नक्शे जहां बिल्कुल भी आना बंद हो गए हैं वहीं बड़े नक्शे भी एक साल में केवल तीन ही स्वीकृत हुए। केवल पांच आवेदन ही आए थे। इनमें से दो निरस्त हो गए। जो तीन स्वीकृत हुए हैं। वही सभी 150 या इससे कम फ्लैट के प्रोजेक्ट हैं। कोई नई कॉलोनी का ले-आउट इसमें नहीं है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिल्डर्स पुराने प्रोजेक्टों को ही किसी तरह खत्म करने की कोशिश है।
टाउनशिप में भी बदल रहे डिजाइन
एलडीए में अभी हाईटेक या इंटीग्रेटेड टाउनशिप में भी डिजाइन बदले जा रहे हैं। कोरोना की वजह से ग्राहक नहीं मिलने से कंपनियों में पैसा भी नहीं जमा हो पा रहा है। ऐसे में किसी भी तरह फंड जुटाने का दबाव है। ऐसे में ग्रुप हाउसिंग के प्रोजेक्टों को खत्म कर वहां आवासीय भूखंड के प्रोजेक्ट किए जा रहे हैं। इसके लिए ले-आउट में बदलाव भी एलडीए से कराए जा रहे हैं। इन आवासीय भूखंड को भी बड़े ब्रांड के पीछे होने के बाद भी बेचना मुश्किल हो गया है।
तीसरी लहर की खबरों ने बढ़ाया संकट
गृह बिल्डर्स के निदेशक विश्वजीत त्रिपाठी का कहना है कि पिछले दिनों में हालात सुधरना शुरू हुए थे। दूसरी लहर ने पूरी तरह ग्राहकों को दूर कर दिया है। पूरे अप्रैल महीने में एक भी बुकिंग भूखंड या मकान के लिए नहीं है। यह उस वक्त है जबकि प्राइम लोकेशन पर हम प्रोजेक्ट कर रहे हैं। पूर्व की बुकिंग भी लोग निरस्त करा रहे हैं। हालात कब तक ठीक होंगे? इसकी भी उम्मीद नहीं है। तीसरी लहर आने की भी खबरें आ रही हैं। अब लग रहा है कि हालात जब तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाते। रीयल एस्टेट सेक्टर में खरीदारों की वापसी नहीं हो पाएगी।
लोगों ने रजिस्ट्रियां तक टाल दीं
श्रीराज इंफ्रा बिल्डर्स के निदेशक राजेश पांडेय का कहना है कि पहले की बुकिंग होने के बाद भी लोग अब आगे की किश्तें जमा नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी की परिवार में तबीयत बिगड़ी तो पैसे की जरूरत होगी। ऐसे में जिन खरीदारों की रजिस्ट्री की जानी थीं, वह भी कोरोना की वजह से टल गईं। 2020 के संकट से लगा था कि सेक्टर उबर गया है। लेकिन, दूसरी लहर ने पहले से भी खराब स्थिति में पहुंचा दिया है। आगे का भी कुछ साफ नहीं दिख रहा है।