विधानसभा में हंगामा : अखिलेश ने कहा- झोलाछाप की तरह उप मुख्यमंत्री भी छापामार मंत्री, सीएम योगी ने कहा...
मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सपा और सच एक नदी के दो किनारे हैं जो कभी एक नहीं हो सकते है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार सहित हर क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रही है ऐसे में नेता प्रतिपक्ष यदि सहयोग नहीं कर सकते हैं तो अड़ंगा भी न लगाएं।
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प्रदेश में बिगड़ी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का आरोप लगाते हुए समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने मंगलवार को विधानसभा में जमकर हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर गरीबों को उचित इलाज और चिकित्सा सुविधाएं नहीं देने का आरोप लगाया। यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश में लोगों को इलाज नहीं मिलने के कारण मानव अधिकार आयोग को सरकार से जवाब तलब करना पड़ रहा है जबकि भाजपा डबल इंजन सरकार में विश्व में सबसे बेहतरीन कार्य यूपी में होने का दावा करती है। प्रश्नकाल की शुरुआत में सपा और रालोद के सदस्यों ने वैल में आकर नारेबाजी की। वहीं सरकार के जवाब से असंतुष्ट होने पर सदन का बर्हिगमन किया।
विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने सीतापुर में एक मरीज को लखनऊ में भर्ती नहीं करने पर मानव अधिकार आयोग की ओर से सरकार को दिए गए नोटिस का मुद्दा उठाया। सपा और रालोद के विधायकों ने मामले को नियम 311 के तहत उठाते हुए सदन की कार्यवाही रोककर इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि यह इतना महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है कि नियम 311 के तहत इस पर सदन की कार्यवाही रोककर चर्चा कराई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल के सदस्य सदन का समय बर्बाद कर बेवजह हंगामा कर रहे है। जबकि योगी सरकार के कार्यकाल में पूरे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र में सुधार हुआ है। संसदीय कार्यमंत्री के बयान के बाद सपा और रालोद के विधायकों ने वैल में आकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सपा के मुख्य सचेतक मनोज पांडेय ने मांग रखी कि प्रश्नकाल के बाद नियम 56 के तहत इस मुद्दे पर चर्चा कराई जाए। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इस मांग को स्वीकार किया तो विपक्षी दल के विधायकों ने हंगामा शांत किया।
प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने सीतापुर के मामले को पुन: सदन में रखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा। अखिलेश ने आरोप लगाया कि अस्पतालों में इलाज नहीं मिलने के कारण मरीजों की मौत हो रही है। मरीजों को घर से अस्पताल तक लाने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिल रही है। इतना ही नहीं अस्पताल में जिन मरीजों की मौत हो रही है उन्हे भी वापस घर तक भेजने की कोई व्यवस्था नहीं है। कहीं लोग मोटरसाइकिल पर लाश ले जा रहे हैं तो कहीं पर ठेले पर रखकर लाश ले जाने को मजबूर है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पतालों में खून, पेशाब की जांच नहीं हो रही है और एक्सरे, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी जांच को सरकार निजी हाथों में दे रही है। उन्होंने गोंडा में गर्भवती महिला को गलत इंजेक्शन लगाने से हुई उसकी मौत का मुद्द उठाते हुए कहा कि कन्नौज मेडिकल कॉलेज के हृदयरोग विभाग पर ताले लगे मिले हैं, मेडिकल कॉलेज में कुत्ते घूमते मिले। अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने एक रुपये की अस्पताल पर्ची की कीमत दस रुपये कर कर दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष या विधायक निधि से होने वाले इलाज में भी सरकार कंजूसी कर रही है।
झोलाछाप डाक्टर की तरह छापामार मंत्री
अखिलेश यादव ने कहा कि झोलाछाप डॉक्टर की तरह उप मुख्यमंत्री भी छापामार मंत्री हो गए है। उन्होंने कहा कि जैसे झोलाछाप डाक्टर की कोई मान्यता नहीं है ऐसे ही उप मुख्यमंत्री की भी कोई मान्यता नहीं है। उप मुख्यमंत्री की ओर से इतनी छापेमारी की गई, वह खुद शर्मिंदा भी हुए लेकिन उसका अस्पतालों की व्यवस्था पर कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने चुटकी लेते हुए कि इनके उप मुख्यमंत्री बनने से दो मंत्री बेरोजगार हो गए। चिकित्सा विभाग में तबादले हो गए मंत्री को पता नहीं चला। उन्होंने कहा कि लगता है कि नेता सदन उप मुख्यमंत्री को बजट नहीं दे रहे है।
मानक के विपरीत चल रहे मेडिकल कॉलेज
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेज मानक के विपरीत चल रहे है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चिकित्सकों की स्थायी भर्ती करने की जगह आउटसोर्सिंग कर रही है।
पता नहीं कहां से सीखा विश्व में नंबर वन
अखिलेश यादव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार ने पता नहीं कहां से सीख लिया है कि विश्व की नंबर वन व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर चिकित्सा विश्वविद्यालय नहीं बन सका है और पूर्व मुख्यमंत्री के नाम पर स्थापित हो रहे कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए भी सरकार जमीन नहीं दे रही है।
लगता है दिल्ली वाले मदद नहीं कर रहे
अखिलेश यादव ने चुटकी लेते हुए कहा कि लगता है प्रदेश सरकार की दिल्ली वाले मदद नहीं कर रहे है। उन्होंने कहा कि दिल्ली वालों को बताइये कि दिल्ली का रास्ता यूपी होकर ही जाता है।
समाजवादी और सच नदी के दो किनारे : योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा शासन के बाद उन्हें विरासत में मिली चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की विकृति को केंद्र व प्रदेश की डबल इंजन की भाजपा सरकार सुधार रही है। मंगलवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव के आरोपों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सपा और सच एक नदी के दो किनारे हैं जो कभी एक नहीं हो सकते है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार सहित हर क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रही है ऐसे में नेता प्रतिपक्ष यदि सहयोग नहीं कर सकते हैं तो अड़ंगा भी न लगाएं। मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को सच बोलने की आदत डालनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 04 बार सपा की सरकार रही। लेकिन प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने की कोई कोशिश नहीं की गई। यहां तक कि गोरखपुर व आसपास के जिलों में इंसेफेलाइटिस से मासूम बच्चों की हर साल सैकड़ों मौतें होती रहीं। लेकिन सपा की ओर से संवेदना का एक भी शब्द नहीं फूटा।
मुख्यमंत्री ने कि गोरखपुर मे एम्स की स्थापना मे सपा ने अडंगा लगाया था। 2017 में भाजपा सरकार बनने पर एम्स की जमीन की रजिस्ट्री हुई। सपा सरकार में प्रदेश में सीएचसी और पीएचसी बंदी की कगार पर थे। जिला अस्पतालों की हालत दयनीय थी। उन्होंने कहा कि सपा शासन में मानसून के दौरान पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस का कहर होता था। हर साल 1200 से 2000 तक मासूम बच्चों की मौत होती थी। उन्होंने कहा कि इनमें से अधिकांश बच्चे अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक वर्ग और पिछड़ा वर्ग परिवारों के थे। उन्होंने कहा कि इंसेफेलाइटिस का टीका 1905 में ही जापान में आ गया थाए लेकिन भारत तक पहुंचने में उसे 100 साल लग गए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पर सवाल उठाने से पहले अखिलेश को अपने कार्यकाल के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि इस साल अब तक गोरखपुर में एईएस के 40 और जेई के मात्र 07 मामले आये हैं और एक भी बच्चे की मृत्यु नहीं हुई है।
स्वास्थ्य सेवाओं में हुआ बेहतरीन सुधार
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4 व 5 का हवाला देते हुए कहा कि बीते साढ़े पांच साल में स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतरीन सुधार हुआ है। एनीमिया की रोकथाम की कोशिशों का ही नतीजा है कि आज प्रदेश में राष्ट्रीय औसत से बेहतर हालात हैं। मातृ व शिशु मृत्यु दर में लगातार सुधार हो रहा है। 108 एम्बुलेंस के रेस्पॉन्स टाइम को कम किया गया है। सरकार के लिए 25 करोड़ प्रदेशवासी परिवार का हिस्सा हैं।
कोरोना के समय कहां थे अखिलेश
मुख्यमंत्री ने काह कि कोरोना संक्रमण की पहली, दूसरी और तीसरी लहर के समय अखिलेश यादव कहां थे यह किसी को नहीं पता। उन्होंने संक्रमण के दौरान जनता की सुध नहीं ली। उन्होंने कहा कि कोविड टीके को लेकर अखिलेश यादव की ओर से की गई राजनीति को निंदनीय बताते हुए मुख्यमंत्री ने इसे जनता के जीवन से खिलवाड़ करने वाला कृत्य करार दिया।
खुश होने की जगह अड़ंगा लगा रहे अखिलेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हर जिले में मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। गांवों में साप्ताहिक आरोग्य मेले लग रहे हैं। इंसेफेलाइटिस खत्म हो रहा है तो नेता प्रतिपक्ष को खुश होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अखिलेश सहयोग भले न कर सकें लेकिन कम से कम गलत और भ्रामक बयान देकर प्रदेश की बेहतरी में अड़ंगा तो न लगाएं। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते जनता को भ्रमित करना, गुमराह करना इन्हें शोभा नहीं देता। सदन में बोलने से पहले नेता प्रतिपक्ष को आंकड़ों का सत्यापन कर लेना चाहिए।