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सावन 2019: आज से शिव का पावन महीना शुरू, इस विधि से करें भोले का पूजन
Wed, 17 Jul 2019 10:32 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 17 Jul 2019 10:32 AM IST
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फाइल फोटो
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भगवान शिव का अति प्रिय पावन महीना सावन बुधवार को पूर्वाभाद्र पद नक्षत्र में शुरू हो गया है। सुबह 4 बजे से सभी शिवालयों में हर हर महादेव के जयकारों के साथ श्रद्धालु भगवान भोले नाथ का जल, दूध, गंगाजल आदि से अभिषेक कर रहे हैं। कांवड़ यात्रा भी निकाली जाएगी। इस बार सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं।
अपने आराध्य की सेवा और उनकी आराधना के लिए भक्तों ने सभी छोटे-बडे़ शिवालय सजा लिए हैं। रंग बिरंगी बिजली की झालरें लगा दी हैं और रंग रोगन भी कर दिया है। शिव भक्ति के लिए सावन का महीना विशेष महत्व का रहता है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार सावन की शुरुआत पूर्वाभाद्र पद नक्षत्र में होगी। इस दौरान शोभन और सिद्धि योग रहेगा, जो शुभ है।
सुबह 8:30 बजे के बाद उत्तराभाद्र पद नक्षत्र लग गया। इस बार सावन में चार सोमवार पडे़ंगे। इनमें पहला 22 जुलाई को, दूसरा 29 जुलाई को, तीसरा 5 अगस्त को तथा चौथा 12 अगस्त को पडे़गा। शिव भक्ति के लिए सोमवार अति पावन दिवस रहता है। इधर महानगर के शिवालयों में रुद्राभिषेक, जल अभिषेक और अनुष्ठानों के लिए तैयारियां कर ली गई हैं।
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सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सावन मास भगवान भोलेनाथ को प्रिय है और इसमें शिवलिंग को गंगा जल से जलाभिषेक करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। मान्यता है कि सावन मास में भगवान शिव का गंगाजल व पंचामृत से अभिषेक करने से उन्हें शीतलता मिलती है और वे प्रसन्न होते हैं। इस दौरान भोले के भक्त कांवड़ यात्रा, रुद्राभिषेक, जप-तप के जरिए भगवान शिव को प्रसन्न करने के वह सभी उपाय करेंगे जिससे उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सके।
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अपने आराध्य की सेवा और उनकी आराधना के लिए भक्तों ने सभी छोटे-बडे़ शिवालय सजा लिए हैं। रंग बिरंगी बिजली की झालरें लगा दी हैं और रंग रोगन भी कर दिया है। शिव भक्ति के लिए सावन का महीना विशेष महत्व का रहता है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार सावन की शुरुआत पूर्वाभाद्र पद नक्षत्र में होगी। इस दौरान शोभन और सिद्धि योग रहेगा, जो शुभ है।
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सुबह 8:30 बजे के बाद उत्तराभाद्र पद नक्षत्र लग गया। इस बार सावन में चार सोमवार पडे़ंगे। इनमें पहला 22 जुलाई को, दूसरा 29 जुलाई को, तीसरा 5 अगस्त को तथा चौथा 12 अगस्त को पडे़गा। शिव भक्ति के लिए सोमवार अति पावन दिवस रहता है। इधर महानगर के शिवालयों में रुद्राभिषेक, जल अभिषेक और अनुष्ठानों के लिए तैयारियां कर ली गई हैं।
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सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सावन मास भगवान भोलेनाथ को प्रिय है और इसमें शिवलिंग को गंगा जल से जलाभिषेक करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। मान्यता है कि सावन मास में भगवान शिव का गंगाजल व पंचामृत से अभिषेक करने से उन्हें शीतलता मिलती है और वे प्रसन्न होते हैं। इस दौरान भोले के भक्त कांवड़ यात्रा, रुद्राभिषेक, जप-तप के जरिए भगवान शिव को प्रसन्न करने के वह सभी उपाय करेंगे जिससे उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सके।
ऐसे करें शिव पूजन
मान्यता है कि भोले भंडारी भगवान शिव एक लोटा पवित्र जल चढ़ाने मात्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए यदि कोई व्यक्ति शिवजी की कृपा प्राप्त करना चाहता है तो न सिर्फ सावन मास में बल्कि उसे प्रतिदिन शिवलिंग पर स्नान के बाद जल अर्पित करना चाहिए। विशेष रूप से सावन के हर सोमवार शिवजी का पूजन करें।
सावन के सामवार के दिन साधक को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर शिवजी के मंदिर या घर में ही भगवान महादेव के सामने व्रत का संकल्प लें। इस व्रत में एक समय रात्रि में भोजन चाहिए। दिन फलाहार किया जा सकता है। साथ ही दूध का सेवन भी किया जा सकता है।
संकल्प के बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करें। गाय का दूध अर्पित करें। इसके बाद पुष्प हार और चावल, कुमकुम, बिल्व पत्र, मिठाई आदि सामग्री चढ़ाएं। यदि आप सावन के सोमवार के दिन निर्जल व्रत नहीं रख सकते तो फलाहर व्रत करें। शिव पुराण का पाठ करें या फिर सुनें। शिव पुराण में बताया गया है कि सावन में इसका पाठ और श्रवण मुक्तिदायी होता है।
सावन के सामवार के दिन साधक को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर शिवजी के मंदिर या घर में ही भगवान महादेव के सामने व्रत का संकल्प लें। इस व्रत में एक समय रात्रि में भोजन चाहिए। दिन फलाहार किया जा सकता है। साथ ही दूध का सेवन भी किया जा सकता है।
संकल्प के बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करें। गाय का दूध अर्पित करें। इसके बाद पुष्प हार और चावल, कुमकुम, बिल्व पत्र, मिठाई आदि सामग्री चढ़ाएं। यदि आप सावन के सोमवार के दिन निर्जल व्रत नहीं रख सकते तो फलाहर व्रत करें। शिव पुराण का पाठ करें या फिर सुनें। शिव पुराण में बताया गया है कि सावन में इसका पाठ और श्रवण मुक्तिदायी होता है।