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सेनेटरी पैड पर्यावरण के लिए हानिकारी, अब माहवारी कप लेंगे इनकी जगह, चल रहा शोध

Fri, 28 May 2021 02:06 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 28 May 2021 02:06 AM IST
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sanitary pad is harmful for environment
अमित यादव, लखनऊ। माहवारी के दौरान इस्तेमाल होने वाले सेनेटरी पैड पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ये न आसानी से गलते हैं और न डिकम्पोज होते हैं। इससे सैकड़ों वर्षों तक जमीन में दबे रहते हैं। पर्यावरण को इन सेनेटरी पैड से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए अब माहवारी कप का आविष्कार किया गया है। इस कप के इस्तेमाल से महिलाओं को होने वाले फायदे या नुकसान को लेकर लखनऊ के तीन अरबन स्लम सहित प्रदेश के कई जगहों पर शोध चल रहा है।
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माहवारी में सेनेटरी पैड का प्रयोग महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए कभी अच्छा माना जाता रहा है, लेकिन अब इसमें उपयोग होने वाले लिक्विड और अन्य कच्चे माल से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव का भी अध्ययन किया जा रहा है। क्योंकि इस्तेमाल किए गए सेनेटरी पैड को नष्ट करना भी एक चुनौती बन गया है। ऐसे में सेनेटरी पैड के अलावा अब मासिक धर्म कप को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में महिलाओं को इसकी जानकारी देने के लिए एक स्टडी चल रही है, जिसमें महिलाओं को मासिक धर्म कप के प्रयोग का मौका दिया गया है। इस्तेमाल के बाद उनका इस नए उत्पाद के बारे में क्या अनुभव है, इसकी भी जानकारी ली जा रही है।
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स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ व माहवारी कप संबंधी स्टडी की प्रभारी डॉ. नीलम सिंह बताती हैं कि लखनऊ की तीन शहरी मलिन बस्तियों सीतापुर रोड पर नवीन गल्ला मंडी, अहिबरनपुर और अलीगंज में कटरा पलटन को इस स्टडी के लिए चुना गया है। यहां की 68 युवतियों व महिलाओं को स्टडी के लिए चुना गया है। इन्हें सेनेटरी पैड व माहवारी कप के अंतर बताए गए। मार्च 2021 में शुरू हुई इस स्टडी में पाया गया कि 58 प्रतिशत युवतियों व महिलाओं ने माहवारी कप का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। एक प्रतिष्ठित मेडिकल पत्रिका के शोध के अनुसार लेटेक्स के बने ये कप 10 साल तक खराब नहीं होते हैं। ये न सिर्फ सस्ते हैं, बल्कि बार-बार इस्तेमाल किए जा सकते हैं और स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित भी हैं। यही नहीं एक माहवारी कप सेनेटरी पैड के मुकाबले सिर्फ 0.4 प्रतिशत ही प्लास्टिक वेस्ट पैदा करता है। यही नहीं सेनेटरी पैड के मुकाबले यह 5 से 7 प्रतिशत मूल्य पर उपलब्ध है।
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जानिए, कैसे पर्यावरण के लिए हानिकारक है सेनेटरी पैड
सेनेटरी पैड को इस्तेमाल करने के बाद उसका सही से निस्तारण न होना सबसे बड़ी समस्या है। विभिन्न शोध के अनुसार एक सिंगल पैड को डिकंपोज (गलाने या खत्म करने) होने में लगभग 500 साल लगते हैं। मेंस्ट्रुअल हाईजीन एलायंस ऑफ इंडिया (एमएचएआई) के अनुमान के अनुसार भारत में 33.60 करोड़ महिलाएं हैं, जिन्हें माहवारी होती है। इनमें से 36 फीसदी सेनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं। इस तरह देश भर में करीब 12 अरब सेनेटरी पैड इस्तेमाल होता है और उसे कचरे के रूप में जमीन में दबाया जा जा रहा है। इन नैपकिन में जो प्लास्टिक इस्तेमाल किया जाता है वह प्राकृतिक तरीके से नष्ट नहीं होता है। इसलिए यह पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। ये पैड ठोस कचरा श्रेणी में आते हैं और अगर इनका उचित निपटान नहीं किया जाए तो ये एचआईवी, एचबीवी के साथ ही कई अन्य संक्रामक बीमारियों का कारण बनते हैं।
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