यूपी: पंचायत चुनाव में सपा को मिली संजीवनी, अब ज्यादा से ज्यादा जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने पर जोर
समाजवादी पार्टी भाजपा की हर चाल का जवाब देते हुए एक तरफ ज्यादा से ज्यादा जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की तैयारी में है तो दूसरी तरफ कार्यकर्ताओं में खेमेबंदी रोकने पर जोर है। इसलिए अलग-अलग जिलों के लिए अलग-अलग रणनीति बनाई जा रही है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए गोटें बिछने के साथ समाजवादी पार्टी चौकन्नी हो गई है। विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी पार्टी पंचायत चुनाव में मिली संजीवनी से उत्साहित है। वह किसी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। पार्टी भाजपा की हर चाल का जवाब देते हुए एक तरफ ज्यादा से ज्यादा जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की तैयारी में है तो दूसरी तरफ कार्यकर्ताओं में खेमेबंदी रोकने पर जोर है। इसलिए अलग-अलग जिलों के लिए अलग-अलग रणनीति बनाई जा रही है।
रणनीतिकारों का दावा है कि वह पूरब से पश्चिम तक करीब 60 से ज्यादा जिलों में अध्यक्ष बनाने की स्थिति में हैं। इटावा, एटा, कासगंज, कन्नौज सहित 10 से ज्यादा जिलों में सपा के जिला पंचायत अध्यक्ष की राह में कोई रोड़ा नहीं दिख रहा है। इसी तरह मैनपुरी, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, भदोही, जौनपुर सहित करीब 15 जिलों में पार्टी के दो या दो से अधिक दावेदार हैं। ऐसे में इन जिलों में विशेष रणनीति बनाई जा रही है।
यहां पड़ोसी जिलों के वरिष्ठ नेताओं को समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। पार्टी हाईकमान का प्रयास है कि यहां आपसी लड़ाई का फायदा उठाने के लिए भाजपा भरसक प्रयास करेगी, लेकिन उसकी चाल को मात देना पार्टी के लिए अहम होगा।
निर्दलीयों को अपने पक्ष में लाने की तैयारी में सपा
बुंदेलखंड में चित्रकूट और हमीरपुर में भाजपा और सपा के पास चार चार सदस्य है, लेकिन यहां बसपा और निर्दलीय निर्णायक होंगे। निर्दलीय पुराने सपाई है, जिन्हें उज्ज्वल भविष्य का सपना दिखाकर पार्टी अपने खेमे में करने की तैयारी में है। झांसी और महोबा को लेकर सपा पूरी तरह आश्वस्त है। लेकिन बांदा को लेकर संशय है।
पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि कई जगह जीतने के बाद भी सपा के लोगों को प्रमाण पत्र नहीं दिया गया है। वक्त आने पर इसका भी जवाब मिलेगा। पार्टी का प्रयास है कि समान विचारधारा वाले सदस्यों को साथ लेकर भाजपा को मात दिया जाय। ताकि जनता को न्याय और अधिकार मिल सके।
क्या कहते हैं जानकार
राजनीतिक विश्लेषक लखनऊ निवासी केके श्रीवास्तव कहते हैं कि पश्चिम बंगाल के बाद पंचायत चुनाव से भाजपा को निराशा मिली है। ऐसे में वह उग्र रूप अपनाने से गुरेज नहीं करेगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए भाजपा हर सांसद, विधायक को मैदान में उतारने में पीछे नहीं रहेगी। ऐसे में सपा को भी तैयार रहना होगा। पंचायत चुनाव ने यह भी संदेश दिया है कि सपा ग्रामीण स्तर पर विधानसभा चुनाव के लिए तैयार है।