चंपत राय के विवादित बयान पर भड़के अयोध्या के संत, बोले- राममंदिर ट्रस्ट से हटाया जाए
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के विवादास्पद बयान को लेकर रामनगरी के संतों ने प्रतिक्रिया दी है। निर्वाणी अखाड़ा के महंत धर्मदास व हनुमानगढ़ी के संत राजूदास ने जहां चंपत राय के बयान का कड़ा विरोध किया है वहीं तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने चंपत राय के बयान का समर्थन किया है। मुस्लिम पक्षकार रहे इकबाल अंसारी को भी चंपत राय के बयान में कोई विवादास्पद बात नहीं नजर आई।
दरअसल, अयोध्या के संतों ने अभिनेत्री कंगना रणौत व पालघर में साधुओं की हत्या के मामले में उद्धव ठाकरे को निशाने पर लेते हुए उनके अयोध्या आगमन पर विरोध करने की बात कही थी। इस पर राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक दिन पूर्व विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि किसकी मां ने दूध पिलाया है जो शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को अयोध्या आने से रोक पाए।
इस बयान का अयोध्या में विरोध शुरू हो गया है तो कुछ संतों ने चंपत राय के बयान का समर्थन भी किया है। वहीं, अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष व अन्य वरिष्ठ संतों ने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है।
चंपत राय को राममंदिर ट्रस्ट से हटाया जाए: धर्मदास
निर्वाणी अनी अखाड़ा के महंत धर्मदास ने चंपत राय के बयान का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने तो यहां तक कहा कि चंपत राय को राममंदिर ट्रस्ट से ही हटा देना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को राममंदिर ट्रस्ट में जगह नहीं दी जानी चाहिए।
कहा कि चंपत राय को यदि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे इतने ही पसंद हैं तो वे अयोध्या में क्यों रह रहे हैं, उन्हें जाकर महाराष्ट्र में उद्धव की शरण ले लेनी चाहिए। उन्होंने चंपत राय को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि महाराष्ट्र में संतों की हत्या हो रही है और चंपत राय यहां उद्धव ठाकरे का समर्थन कर रहे हैं, ये बहुत ही गलत है।
चंपत राय को अयोध्या में रहने का कोई अधिकार नहीं: राजूदास
हनुमानगढ़ी के संत राजूदास का कहना है कि वह बाला साहब ठाकरे का कोई विरोध नहीं करते हैं लेकिन उद्धव ठाकरे ने सनातन धर्म संस्कृति को दबाने का प्रयास किया है। ऐसे में हमने कहा है कि यदि उद्धव ठाकरे अयोध्या आते हैं तो उन्हें नगर में घुसने नहीं देंगे।
अयोध्या ने चंपत राय को छत दी मगर उन्होंने बिगड़ी भाषा बोलकर अयोध्या को गाली दी है। ऐसे लोगों को अयोध्या में रहने का कोई अधिकार नहीं है, वे कोई साधु-संत नहीं हैं। राजूदास ने कहा कि महाराष्ट्र में संतों की हत्या पर चंपत राय चुप्पी साधे रहे। अब इस तरह के बिगड़े बोल, बोल रहे हैं, उनके बयान का कड़ा विरोध है।
मर्यादित है चंपत राय की भाषा : परमहंस दास
तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने चंपत राय का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि शिवसेना कार्यकर्ताओं ने पूर्व नेवी अधिकारी पर हमला कर यह बता दिया है कि शिवसेना अब राक्षस सेना हो गई है। मैं शिवसेना का विरोध करूंगा, उद्धव अयोध्या आएंगे तो उनको काला झंडा भी दिखाऊंगा, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वह अयोध्या आएं तो उन्हें रोक देंगे।
चंपत राय का कहना ठीक है कि उद्धव ठाकरे को अयोध्या आने से कोई नहीं रोक सकता, कोई रोकने के लिए कहे तो यह गलत है। चंपत राय की भाषा मर्यादित है, उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है।
अयोध्या आने से किसी को नहीं रोक सकते : इकबाल
मुस्लिम पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने भी चंपत राय के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने जो बयान दिया है कि उस पर उन्हें कोई टिप्पणी नहीं करनी है लेकिन ये सही है कि अयोध्या आने से किसी को रोका नहीं जा सकता है।
अयोध्या धर्मनगरी है, यहां सरयू प्रवाहित हैं, हनुमान जी का मंदिर है, राममंदिर भी है, यहां दर्शन-पूजन के लिए कभी भी कोई भी आ सकता है, उसे रोकने की बात करना गलत है। धर्मनगरी के द्वार सबके लिए खुले होते हैं, किसी को अयोध्या आने से कैसे रोका जा सकता है।