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तबादलों पर केंद्र से जुदा है प्रदेश सरकार का रुख
लखनऊ/हरीश तिवारी
Updated Wed, 14 Aug 2013 01:16 AM IST
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प्रदेश सरकार जब चाहे आईएएस अफसरों को इधर-उधर करती रहती है। इसलिए ट्रांफसर के मामले में प्रदेश अव्वल है।
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इसके लिए केंद्र की सिफारिशों को प्रदेश सरकार हमेशा दरकिनार करती है। लिहाजा ट्रांसफर से आजिज अफसर या तो प्रतिनियुक्ति में चले जाते हैं या फिर नौकरी छोड़कर चले जाते हैं।
आईएएस अफसरों की नियुक्ति व स्थानांतरण के मामले में स्थिरता व पारदर्शिता लाने के लिए अखिल भारतीय सेवा नियमों में हाल ही में संसोधन किया गया था लेकिन इसे लागू करने का अधिकार प्रदेश सरकार का होता है।
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इन संसोधनों को जम्म-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक समेत पूर्वोत्तर राज्यों ने लागू किया गया है।
जबकि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल समेत छह राज्यों ने लागू नहीं किया। हालांकि केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने इसके लिए कई बार सरकार से बात की पर नतीजा सिफर रहा।
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प्रदेश सरकार ट्रांसफर के मामलों में केंद्र का दखल नहीं चाहती है। संसोधनों को लागू करने वाले राज्यों में इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। जहां इसे लागू किया गया है, वहां पर अफसरों के तबादलों में कमी आई है।
मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक इसे लागू करने के बाद कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में अफसरों का एक पद पर न्यूनतम कार्यकाल करीब एक साल रिकॉर्ड किया गया है।
जबकि हिमाचल प्रदेश और उड़ीसा में कार्यकाल औसतन 9 तक महीने रहा। इस मामले में सबसे आगे पूर्वोत्तर राज्य हैं। यहां पर एक पद पर अफसर औसत 1.9 वर्ष रहे हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार अब पुलिस एक्ट लागू करने जा रही है। ऐसे में आईएएस अफसर भी उम्मीद कर सकते हैं कि सरकार केंद्र की सिफारिशों को लागू करे।
प्रदेश में हालात ये हैं कि बार-बार ट्रांसफर से आजिज आकर आईएएस अफसर राजू शर्मा ने तीन साल पहले नौकरी से तौबा कर ली थी।
शर्मा को एक महीने में करीब चार बार ट्रांसफर किया गया था। कुछ ऐसा ही हाल कई अन्य अफसरों का भी है। कभी जिले और मंडलों में, तो कभी शासन में।
अफसरों को मालूम नहीं होता है कि उनका ट्रांफसर कब हो जाए। वरिष्ठ आईएएस अफसर और मेरठ के आयुक्त मंजीत सिंह को देख लीजिए।
कभी प्रमुख सचिव नियोजन हुआ करते थे तो प्राविधिक शिक्षा, प्रमुख सचिव राज्यपाल, तो कभी आगरा का आयुक्त नियुक्त किया गया।
पिछले एक साल के दौरान आधे दर्जन से ज्यादा पदों पर रह चुके हैं। कुछ ऐसा ही हाल राज्यपाल के प्रमुख सचिव राजीव कुमार का है। प्रतिनियुक्ति से लौटने के बाद कई बार ट्रांसफर का दंश झेल चुके हैं।
पूर्व केंद्रीय टेलीकॉम सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्रा ने कुछ समय पहले कहा था कि सरकार को आईएएस अफसरों के लिए सर्विस कमीशन का गठन किया जाना चाहिए।
कमीशन के जरिये ही अफसरों के ट्रांसफर और पोस्टिंग हो। इससे बार-बार होने वाले ट्रांसफरों पर रोक लगेगी।
उन्होंने बताया कि इसके लिए 100 से अधिक आईएएस अफसरों ने सुप्रीम को कोर्ट में पीआईएल दाखिल की है और अभी इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई है।