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शिक्षामित्रों के मुद्दे पर विधान परिषद में सपा ने यूपी सरकार को घेरा, डिप्टी सीएम ने दिया ये जवाब

Fri, 22 Dec 2017 08:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 22 Dec 2017 08:58 PM IST
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ruckus in vidhan parishad over shikshamitra issue.
यूपी विधानसभा (file foto) - फोटो : amar ujala

यूपी विधान परिषद में शुक्रवार को शिक्षामित्रों के मुद्दे पर सपा ने प्रदेश सरकार को घेरा और आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार की तरफ से मामले में लचर पैरवी की गई जिससे कि शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक के पद से अपनी नियुक्ति गंवानी पड़ी।

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जिस पर नेता सदन व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने जवाब दिया कि लचर पैरवी नहीं बल्कि, सपा सरकार के ठीक से नियुक्ति न करने से यह स्थिति पैदा हुई।

सपा के आनंद सिंह भदौरिया ने पूछा कि धरना-प्रदर्शन दे रहे कितने शिक्षामित्रों की अभी तक जान गई है। शिक्षा राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल के यह जवाब देने पर कि सूचना एकत्र की जा रही है, विपक्ष के सदस्य भड़क गए।
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निर्दल समूह के चेतनारायण ने कहा कि विभाग ने मंत्री को गलत सूचना भेजी है। विपक्ष के सदस्यों ने मंत्री से जवाब न मिलने से प्रश्न स्थगित करने की मांग की, जिसे सभापति ने स्वीकार कर लिया।

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मिशन अंत्योदय में विपक्ष के सुझाव नहीं मान रही सरकार

ruckus in vidhan parishad over shikshamitra issue.

वहीं, मिशन अंत्योदय के मुद्दे पर सपा के शशांक यादव ने कहा कि इस योजना के तहत गांवों के चयन के मामले में सरकार विपक्ष के सुझाव नहीं मान रही है। समूचे विपक्ष ने यह आरोप लगाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की।

शशांक यादव ने कहा कि ग्रामों के चयन का सुझाव देने के लिए उन्हें 10 अगस्त को एक पत्र मिला। जबकि, सुझाव देने की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त थी। इस पर ग्राम्य विकास राज्यमंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि चार अगस्त को संशोधित आदेश में सुझाव देने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 16 अगस्त कर दी गई थी।

इस पर सपा, बसपा और कांग्रेस के अलावा निर्दल सदस्यों ने कहा कि संशोधित पत्र उन्हें नहीं मिला। इसकी पत्रांक संख्या दिलवाई जाए। निर्दल राजबहादुर सिंह चंदेल ने तो यहां तक कहा कि उन्नाव के सीडीओ ने उन्हें बताया कि विधान परिषद के सदस्यों से सुझाव लेने पर शासन से कोई निर्देश नहीं है। विपक्ष ने इसे सरकार की भेदभाव भरी नीति बताया। सभापति रमेश यादव ने कहा कि विभागीय मंत्री मामले को दिखवा लें। मंत्री ने कहा कि यदि ऐसा है तो लिखित शिकायत मिलने पर वह कार्रवाई करेंगे।

700 मानेदय शिक्षकों को स्थायी करने की योजना नहीं

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शिक्षक दल के ही एक सदस्य के सवाल के जवाब में नेता सदन डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि 28 मार्च 2011 तक डिग्री कॉलेजों में नियुक्त 700 मानदेय शिक्षकों का आवेदन वर्तमान व्यवस्था के आधार पर संभव नहीं है। इनका परीक्षण कराने के बाद निर्णय लिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (संशोधन) अधिनियम-2016 के तहत 500 अल्पकालिक रूप से कार्यरत और 555 तदर्थ रूप से कार्यरत शिक्षकों को विनियमित नहीं किया गया है। इस पर शिक्षक दल के सदस्यों ने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारी इन शिक्षकों से घूस मांग रहे हैं। नेता सदन ने कहा कि ये प्रकरण विचाराधीन है। जल्द ही निर्णय हो जाएगा।

भ्रष्टाचार पर रोके गए उच्च शिक्षा अधिकारी के सेवानिवृत्ति देय
नेता सदन ने डॉ. दिनेश शर्मा ने एक सवाल के जवाब में बताया कि पूर्व क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय लखनऊ में व्याप्त भ्रष्टाचार के मद्देनजर उनके सेवानिवृत्त होने पर मिलने वाले देय रोक दिए गए हैं। बताया कि चंद्रशेखर आजाद इंटर कॉलेज, सोरांव, इलाहाबाद के प्रधानाचार्य का वेतन जारी कर दिया गया है। उनका वेतन रोकने के लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

....जब चित्तौड़ बोले, तानाशाही मत कीजिए सभापति

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विधान परिषद सत्र की शुरुआत में ही बसपा विधान परिषद दल के नेता सुनील कुमार चित्तौड़ ने अपनी पार्टी के सहारनपुर से एमएलसी महमूद अली के कथित उत्पीड़न का मामला उठाया। सभापति ने उनसे शून्य काल में मामला उठाने के लिए कहा।

शून्य काल में भी मामला उठाने की अनुमति न मिलने पर चित्तौड़ ने कहा कि सभापति जी पहले दी गई व्यवस्था पर कायम रहिए। तानाशाही मत करिए। इस पर सभापति ने उन्हें बात रखने की इजाजत देते हुए कहा कि इस मामले में नेता सदन सहारनपुर के डीएम को फोन कर चुके हैं।

डीजीपी के यूपीकोका को अच्छा बताने के मुद्दे पर हंगामा
सपा के शतरुद्र प्रकाश ने कहा कि डीजीपी सुलखान सिंह ने एक टीवी चैनल पर यूपीकोका को अच्छा कानून बताया है जबकि, आज (शुक्रवार को) यह विधेयक विधान परिषद में रखा जाना है। उससे पहले ही एक अधिकारी द्वारा टीवी चैनल पर बयान देना सदन की गरिमा के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि डीजीपी सदन में आकर माफी मांगे या फिर मामला विशेषाधिकार हनन समिति को सौंपा जाए। नेता सदन डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि शासन को डीजीपी ने बताया है कि उन्होंने सिर्फ इतना कहा है कि इसमें अमुक प्रावधान ठीक हैं।

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