'मुलायम को जनता की नहीं परिवार के 22 लोगों की चिंता'
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छोटे राज्य बनने से तरक्की के रास्ते खुलते हैं। क्योंकि प्रजातंत्र में शासक व शासित के बीच निरंतर संवाद जरूरी है और यह छोटे राज्यों में ही संभव है। ये बातें राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने रविवार को यहां आयोजित राज्य पुनर्गठन प्रतिनिधि सम्मेलन में कही।
उन्होंने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह पर भी तंज कसते हुए कहा कि उन्हें प्रदेश के 22 करोड़ लोगों की नहीं अपनी परिवार के 22 लोगों की चिंता है।
उन्होंने प्रदेश के पुनर्गठन की मांग करने वाले सभी संगठनों की समन्वय समिति बनाने और बुंदेलखंड, पूर्वांचल व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक साथ आंदोलन करने पर जोर दिया।
रालोद अध्यक्ष ने कहा, लोगों के मन में छोटे राज्य की बात है, इस चिंगारी को आग बनाने की जरूरत है। वह हिंसक आंदोलन के पक्ष में नहीं हैं। प्रजातंत्र में बहुत सारी चीजें चुनाव तय होती हैं।
2017 का विधानसभा चुनाव इसके लिए मौका है। उन्होंने कहा, तेलंगाना में 50 साल तक राज्य बनाने के लिए आंदोलन चला। लिहाजा यूपी के लोगों को निराश होने की जरूरत नहीं है।
आगामी विधान सभा चुनाव में होगा सपा का सफाया
अजित ने कहा, बड़ी सभाएं करने के साथ ही छोटे-छोटे ग्रुप बनाकर लोगों के बीच जाएं। विभाजन की आवाज उठाने वाली संस्थाओं को एक मंच पर लाया जाए। जिला स्तर तक कमेटियां बनाई जाएं और सभी संगठनों की समन्वय समिति बनाकर प्रदेश भर में आंदोलन चलाए जाएं।
रालोद के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान, पूर्वांचल बनाओ आंदोलन के रमाशंकर यादव व बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के महामंत्री रविंद्र कुरेले आदि ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।
मुलायम को बना दीजिए सैफई का पीएम
अजित सिंह ने कहा, मुलायम सिंह की सोच सैफई से निकलकर इटावा, एटा और मैनपुरी तक सीमित हो जाती है। इसलिए उन्हें जीवन भर के लिए सैफई का प्रधानमंत्री बना दिया जाए। उन्हें 22 करोड़ लोगों की नहीं अपने परिवार के 22 लोगों की चिंता है।
विभाजन विरोधी सपा का होगा सफाया
रालोद सुप्रीमो ने कहा कि यूपी के विभाजन के विरोध में सिर्फ समाजवादी पार्टी है। दुर्भाग्य है कि प्रदेश की सत्ता उसी के हाथ में हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में उसका सफाया हो जाएगा। सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह का दिल बड़ा होता तो समस्या न होती। वह पूरी यूपी की समीक्षा नहीं करते, इसीलिए साढ़े चार मुख्यमंत्री बना दिए हैं।
आजादी के बाद से लूटा जा रहा बुंदेलखंड
बुंदेलखंड बनाओ संगठनों की समन्वय समिति के संयोजक डॉ. बाबूलाल तिवारी ने कहा कि बुंदेलखंड में हीरा, सोना, बिजली सब कुछ है लेकिन राज्य चलाने की चाबी नहीं है। आजादी के बाद से इस क्षेत्र को लूटा जा रहा है।
यहां के लोग शिक्षा, स्वास्थ्य, नौकरी, बिजली के लिए तरस रहे हैं। किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। उन्होंने नारा दिया, ‘पैकेज नहीं स्वराज चाहिए, हमें हमारा राज्य चाहिए’। उन्होंने बताया कि 29 अगस्त को झांसी में अलग राज्य के लिए सम्मेलन होगा।
कर्नाटक से बड़ा होगा पूर्वांचल राज्य
पूर्वांचल राज्य बनाओ आंदोलन के अध्यक्ष डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा कि 1955 में जब पहला राज्य पुनर्गठन आयोग बना तो प्रदेश की आबादी 6 करोड़ थी। अब 20 करोड़ से ऊपर आबादी हो गई है। प्रदेश के विभाजन के बिना प्रदेश का संतुलित विकास नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा, 86 हजार वर्ग किमी से ज्यादा क्षेत्रफल में फैला पूर्वांचल कर्नाटक से बड़ा राज्य होगा। वहां से 150 विधायक और 30 सांसद चुने जाएंगे।