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बिना चीरे टांके के पाउडर बनकर यूरिन से निकलेगा स्टोन

Sat, 21 May 2016 01:58 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Sat, 21 May 2016 01:58 PM IST
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retrograde intrarenal surgery to be start in dr ram manohar lohia sansthan
डॉ. ईश्वर राम ध्याल - फोटो : amar ujala

किडनी स्टोन से पीड़ित मरीजों को जल्द ही सर्जरी से मुक्ति मिल जाएगी। लोहिया संस्थान के यूरोलॉजी विभाग में 15 लाख रुपये की कीमत से खरीदा जा रहा यूरेट्रोस्कोप बिना चीरा टांका के स्टोन को पाउडर बना देगा। 

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बाद में यही पाउडर यूरिन के जरिए बाहर हो जाएगा। फ्लेक्सिबल यूरेट्रोस्कोप को ब्लैडर और पेशाब के रास्ते ‘यूरेटर’ से किडनी तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद बाल के बराबर होलियम लेजर फाइबर यूरेट्रोस्कोप के सहारे स्टोन तक पहुंचकर उसे पाउडर बनाएगा।  
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डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में दो महीने के भीतर करीब 15 लाख रुपये की लागत से फ्लेक्सिबल यूरेट्रोस्कोप खरीदने की तैयारी है। इस आधुनिक मशीन से रिट्रो ग्रेड इंट्रा रीनल सर्जरी की सुविधा मिलेगी 
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जिसमें चीरा टांका की जरूरत नहीं पड़ेगी। यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. ईश्वर राम ध्याल ने बताया कि मरीजों की सुविधा और दर्द से राहत दिलाने के लिए फ्लेक्सिबल यूरेट्रोस्कोप की खरीदारी की जा रही है।

मरीज को असहनीय दर्द से मिल जाती है छुट्टी

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डेमो

इस आधुनिक स्कोप की मदद से तीन से चार एमएम के किडनी स्टोन को पाउडर बनाना आसान होगा। फ्लेक्सिबल यूरेट्रोस्कोप को ब्लैडर फिर पेशाब के रास्ते ‘यूरेटर’ से किडनी तक पहुंचाया जाता है। 

इसके बाद यूरेट्रोस्कोप के सहारे होलियम लेजर फाइबर स्टोन तक पहुंचाया जाता है। यह बाल के बराबर होता है। होलियम लेजर फाइबर का आकार 200, 300 और 550 माइक्रान्स के होते हैं। लेजर फाइबर की मदद से स्टोन को प्लोबराइजेशन यानि पाउडर बना दिया जाता है।

स्टोन पाउडर में तब्दील होने के बाद पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाता है और मरीज को असहनीय दर्द से हमेशा के लिए छुट्टी मिल जाती है। डॉ. ईश्वर ने बताया कि नई मशीन का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया है।

जून के अंत मशीन मिल जाएगी इसके बाद नई तकनीक से इलाज शुरू हो जाएगा। फ्लेक्सिबल यूरेट्रोस्कोप की मदद से किडनी स्टोन को खत्म करने में सिर्फ तीन घंटे का समय लगता है। 

निजी संस्थानों में खर्च होते हैं 75 से 90 हजार रुपये

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डेमो

इसके अगले दिन मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाता है। मरीज पूरी तरह सामान्य हो तो केस के तीन घंटे बाद ही घर भेजा जा सकता है। इस सुविधा के बाद मरीजों को जख्म भरने और ऑपरेशन के बाद होने वाले असहनीय दर्द से मुक्ति मिल जाएगी। 

रिट्रो ग्रेड इंट्रा रिनल सर्जरी लेप्रोस्कोप और इंडोस्कोप की मदद से होने वाली सर्जरी महंगी होगी। ये आधुनिक सर्जरी है। इसमें किडनी से स्टोन की सर्जरी पर 50 हजार रुपये खर्च होंगे, जबकि निजी संस्थानों में ये सर्जरी 75 से 90 हजार रुपये में होती है।

 क्यूटिनस नेफ्रो लिथोटोमी सर्जरी से स्टोन निकालने के लिए कमर के पीछे दो सेमी का छेद करना पड़ता है। ऐसे में उस जगह पर दाग हो जाता है जहां से लड़कियां या महिलाएं छोटे टॉप या कमर के नीचे से साड़ी पहनती हैं। 

यह दाग दिखने के कारण लड़कियां इसे पसंद नहीं करती हैं। आरआईआरएस टेक्निक से दाग, दर्द और भर्ती रहने की समस्या से मुक्ति मिल जाती है। 

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