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एसजीपीजीआई के डॉक्टर की मौत, रेजिडेंट ने की श्रद्धांजलि सभा
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एसजीपीजीआई के डॉक्टर की मौत, रेजिडेंट ने की श्रद्धांजलि सभा
एसजीपीजीआई के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के डीएम छात्र कौस्तुभ मूंदड़ा की शनिवार देर रात हार्ट अटैक से मौत हो गई। इससे गमगीन पीजीआई के छात्रों ने सोमवार शाम श्रद्धांजलि सभा की।
इस दौरान मांग की कि हॉस्टल का नामकरण डॉ. कौस्तुभ के नाम पर किया जाए। श्रद्धांजलि सभा में रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्थापना दिवस समारोह के दौरान श्रद्धांजलि नहीं देने पर भी आक्रोश जताया।
कहा कि यह प्रशासन की निष्ठुरता जाहिर करता है। कुछ रेजिडेंट ने मौत की वजह काम का दबाव भी बताया।
बताया जाता है कि गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी से सितंबर में डीएम की डिग्री लेने वाले डॉ. कौस्तुभ मूंदड़ा को कोरोना की वजह से रिलीव नहीं किया गया था।
उन्होंने सप्ताह भर पहले कोरोना वायरस ड्यूटी भी की थी। शनिवार रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। हॉस्टल से उन्हें इमरजेंसी ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। कौस्तुभ की पत्नी डीएम ओंकोपैथ कर रही हैं और एक वर्ष का बेटा भी है।
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डॉक्टरों ने जताया आक्रोश
कोरोनावायरस को ध्यान में रखकर सोमवार शाम आयोजित श्रद्धांजलि सभा में रेजिडेंट डॉक्टरों ने आक्रोश जताया कि उनके साथी के प्रति स्थापना दिवस समारोह के दौरान शोक भी जताने की जरूरत नहीं समझी गई। रेजिडेंट डॉक्टरों ने बताया कि डॉ. कौस्तुभ बताते थे कि उन्हें कोई एक मलाल रहा तो वह सिर्फ यही कि डीएम कोर्स की व्यस्तता, कोरोना, लॉकडाउन और फिर परीक्षा के कारण वह अपने बेटे के साथ बिल्कुल समय नहीं बिता पा रहे हैं। डीएम परीक्षा के बाद भी वह कोरोना वॉरियर के रूप में सेवाएं देते रहे। रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आकाश माथुर एवं डॉ. अनिल गंगवार ने कहा कि एसजीपीजीआई प्रशासन से मांग की जाएगी कि डॉ. कौस्तुभ के नाम पर हॉस्टल का नामकरण किया जाए। साथ ही अन्य यादगार स्तंभ बनाए जाएं।
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एसजीपीजीआई के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के डीएम छात्र कौस्तुभ मूंदड़ा की शनिवार देर रात हार्ट अटैक से मौत हो गई। इससे गमगीन पीजीआई के छात्रों ने सोमवार शाम श्रद्धांजलि सभा की।
इस दौरान मांग की कि हॉस्टल का नामकरण डॉ. कौस्तुभ के नाम पर किया जाए। श्रद्धांजलि सभा में रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्थापना दिवस समारोह के दौरान श्रद्धांजलि नहीं देने पर भी आक्रोश जताया।
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कहा कि यह प्रशासन की निष्ठुरता जाहिर करता है। कुछ रेजिडेंट ने मौत की वजह काम का दबाव भी बताया।
बताया जाता है कि गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी से सितंबर में डीएम की डिग्री लेने वाले डॉ. कौस्तुभ मूंदड़ा को कोरोना की वजह से रिलीव नहीं किया गया था।
उन्होंने सप्ताह भर पहले कोरोना वायरस ड्यूटी भी की थी। शनिवार रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। हॉस्टल से उन्हें इमरजेंसी ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। कौस्तुभ की पत्नी डीएम ओंकोपैथ कर रही हैं और एक वर्ष का बेटा भी है।
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डॉक्टरों ने जताया आक्रोश
कोरोनावायरस को ध्यान में रखकर सोमवार शाम आयोजित श्रद्धांजलि सभा में रेजिडेंट डॉक्टरों ने आक्रोश जताया कि उनके साथी के प्रति स्थापना दिवस समारोह के दौरान शोक भी जताने की जरूरत नहीं समझी गई। रेजिडेंट डॉक्टरों ने बताया कि डॉ. कौस्तुभ बताते थे कि उन्हें कोई एक मलाल रहा तो वह सिर्फ यही कि डीएम कोर्स की व्यस्तता, कोरोना, लॉकडाउन और फिर परीक्षा के कारण वह अपने बेटे के साथ बिल्कुल समय नहीं बिता पा रहे हैं। डीएम परीक्षा के बाद भी वह कोरोना वॉरियर के रूप में सेवाएं देते रहे। रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आकाश माथुर एवं डॉ. अनिल गंगवार ने कहा कि एसजीपीजीआई प्रशासन से मांग की जाएगी कि डॉ. कौस्तुभ के नाम पर हॉस्टल का नामकरण किया जाए। साथ ही अन्य यादगार स्तंभ बनाए जाएं।