लखनऊ में मकान की रजिस्ट्री कराना अब पड़ेगा महंगा
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प्रदेश में रजिस्ट्री कराना महंगा हो गया है। प्रदेश कैबिनेट ने निबंधन शुल्क की अधिकतम सीमा 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दी है। इसी तरह अन्य कार्यों से जुड़ी रजिस्ट्री के शुल्क में भी वृद्धि कर दी गई है। प्रदेश सरकार ने छह वर्ष पुरानी दरें होने का हवाला देते हुए बदलाव को जायज ठहराया है।
कैबिनेट ने सोमवार को रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908 में शामिल रजिस्ट्रीकरण फीस सारिणी में संशोधन का फैसला किया। इसके अंतर्गत निबंधन शुल्क की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दी, जो दोगुनी है।
वर्तमान में विक्रय पत्र के निबंधन शुल्क की दरों की अधिकतम सीमा 10 हजार रुपये है। मौजूदा दरें करीब छह साल पुरानी हैं। इसके अलावा कैबिनेट ने दत्तक ग्रहण, वसीयत, अटॉर्नी विशेष, अटॉर्नी सामान्य, नकल एवं मुआयना आदि पर रजिस्ट्री शुल्क में भारी बढ़ोतरी की है।
यह दो गुना से पांच गुना तक है। सरकार का कहना है कि ये दरें 1995 में तय की गई थीं। 20 साल से ज्यादा पुरानी इन दरों में संशोधन जरूरी हो गया था।
इस तरह बढ़ा निबंधन शुल्क
कार्य वर्तमान दर नई दर
रजिस्ट्री 10 हजार रुपये 20 हजार रुपये
दत्तक ग्रहण 100 रुपये 500 रुपये
वसीयत 100 रुपये 500 रुपये
अटॉर्नी विशेष 10 रुपये 250 रुपये
अटॉर्नी सामान्य 50 रुपये 500 रुपये
नकल व मुआयना भी महंगा
यदि किसी दस्तावेज की नकल लेनी है तो 10 रुपये व एक रुपये प्रति पृष्ठ का योग अगले 10 रुपये पर पूर्णांकित कर दिया गया है। यानी यह 20 रुपये हो जाएगा। इसी तरह मुआयना के लिए पांच रुपये प्रतिवर्ष (अधिकतम 50 रुपये) से बढ़ाकर 10 रुपये प्रतिवर्ष तथा अधिकतम 100 रुपये कर दिया गया है।