योग की सियासत नहीं, सियासत का बन रहा 'योग'
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भले ही केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी 21 जून को योग दिवस मनाने के पीछे कोई सियासत न होने की सफाई दे रही हैं, लेकिन इतिहास को खंगालें तो हर किसी के दिमाग में यह सवाल कौंध सकता है कि कहीं न कहीं असली ‘योग’ तो सियासत का ही बन रहा है।
यूं ही ऐसा हो गया या सोंची-समझी रणनीति के तहत, यह तो पता नहीं पर दरअसल 21 जून राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार की पुण्य तिथि है।
यही नहीं संयोग से इस वर्ष उनकी 75वीं पुण्यतिथि पड़ रही है।
सूर्य नमस्कार संघ की शाखाओं का हिस्सा
इसे देखकर सहज सवाल पैदा होना स्वाभाविक है कि कहीं इस संयोग को हमेशा के लिए स्मृतियों में संजोकर रखने की खातिर ही तो यह आयोजन नहीं।
इतिहास को और खंगाले तो इस तरह के सवालों को और आधार मिल जाता है। संघ के प्रचारक आज भी यह तर्क देते रहते हैं कि डॉ. हेडगेवार ने भारतीय विचार में तन, मन, बुद्धि और आत्मा की शुद्धि और उन्नयन के लिए शाखाओं की शुरुआत की थी।
संघ की शाखाओं को देखें तो उनमें भी योग के कई आसन शामिल किए गए हैं। सूर्य नमस्कार भी शाखाओं का अहम हिस्सा है। ऐसे में संयोग और सियासत को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।