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अतीत का झरोखा: राजनारायण के राज्यसभा जाने से नाराज हो गए थे लोहिया जी, फिर मिठाई खिलाई

Tue, 04 Jan 2022 11:54 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 04 Jan 2022 11:54 AM IST
सार

राजनारायण जी के डॉ. राम मनोहर लोहिया से बड़े करीबी संबंध थे। जब राजनाराण जी राज्यसभा जाने के लिए तैयार हो गए तो इस लोहिया जी ने नाराजगी जताई थी। पर राज्यसभा में जनता से जुड़े किसी सवाल पर जब राजनारायण ने तत्कालीन सरकार को घेरा, सदन नहीं चलने दिया, तो उन्हें निलंबित होना पड़ा। इससे लोहिया बहुत खुश हुए।

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Read about the beautiful relationship between Raj narayan and Lohia ji.
राम मनोहर लोहिया। - फोटो : amar ujala

विस्तार

डॉ. राममनोहर लोहिया और राजनारायण के बीच काफी घनिष्ठ रिश्ते थे। उस दौर में ये माना जाता था कि राजनारायण जी लोहिया की इच्छा के बिना कुछ नहीं कर सकते। समाजवादी चिंतक दीपक मिश्र बताते हैं कि उन्हें वर्ष तो ठीक से नहीं याद है, लेकिन राजनारायण लोकसभा का चुनाव हार गए थे। कुछ लोगों की सलाह पर वे राज्यसभा जाने के लिए राजी हो गए। उन्होंने नामांकन दाखिल कर दिया। डॉ. लोहिया को इसका पता चला तो वे इससे नाराज हो गए। डॉ. लोहिया का मानना था कि राज्यसभा एवं विधानपरिषद उन लोगों के लिए हैं, जो समाज में ख्यातिप्राप्त हैं, लेकिन सक्रिय राजनीति नहीं कर सकते।

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राजनारायण को जब इसका पता चला तो वे डॉ. लोहिया के दिल्ली के 7-रकाबगंज स्थित आवास पर पहुंच गए। डॉ. लोहिया उस समय अपने आवास में पेट के बल धूप में लेटे हुए अपने सहायक शोभन से मालिश करा रहे थे। शोभन ने उन्हें राजनारायण के आने की सूचना दी। डॉ. लोहिया ने शोभन से कहा, इनसे कह दो कि मुझे कोई बात नहीं करनी है। राजनारायण ने शोभन को इशारा कर हटा दिया और खुद उनकी जगह बैठकर डॉ. लोहिया की मालिश करने लगे।
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कुछ देर बाद डॉ. लोहिया पलटे तो देखा राजनारायण...। वह बहुत नाराज हुए।

राजनारायण ने जेब से त्यागपत्र निकालकर उन्हें सौंपा और बोले, मेरे लिए सांसदी से ज्यादा आपकी नाराजगी महत्वपूर्ण है। हालांकि, बाद में अन्य लोगों के आग्रह पर डॉ. लोहिया ने राजनारायण को माफ कर दिया। पर, राज्यसभा में जनता से जुड़े किसी सवाल पर जब राजनारायण ने तत्कालीन सरकार को घेरा, सदन नहीं चलने दिया, तो उन्हें निलंबित होना पड़ा। इससे लोहिया बहुत खुश हुए।
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जनविरोधी नीतियों को पास नहीं होने देने पर डॉ. लोहिया ने राजनारायण को शाबाशी दी और मिठाई भी खिलाई।

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