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पंडित जसराज ने राग छेड़ा तो 90 मिनट तक गायकी के मोहपाश में बंधे रहे श्रोता
Tue, 18 Aug 2020 06:26 PM IST
ishwar ashish
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, लखनऊ
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 18 Aug 2020 06:26 PM IST
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भातखंडे में लोगों से मुलाकात करते पं. जसराज। (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
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गायकी के सरताज पंडित जसराज फरवरी 2011 की गुलाबी सर्दियों में लखनऊ आए थे। सफेद बारादरी में जब उन्होंने राग छेड़ा तो लगभग 90 मिनट तक श्रोता उनकी गायकी के मोहपाश में बंधे रहे। सुनने वालों में अगली पंक्ति में कई नौकरशाहों के अलावा नगर के कलाकार और संगीत प्रेमी शिक्षक और छात्र भी थे।
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मौका था भातखंडे संगीत संस्थान विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह का। आयोजन की यादें साझा करते हुए भातखंडे के संगीत प्रवक्ता डॉ. कमलेश दुबे ने बताया कि दीक्षांत समारोह पहला था, उसे यादगार बनाना था। इसलिए मुख्य अतिथि के तौर पर पंडितजी से समय मांगा गया।
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दोपहर बाद से देर शाम तक चले समारोह में उन्होंने बच्चों को अपने हाथों से पदक और उपाधियां बाटीं। संबोधन के बाद जब उनका गायन शुरू हुआ तो श्रोता मंत्रमुग्ध होकर उन्हें सुनते रहे। लगभग 90 मिनट तक उन्होंने गायन प्रस्तुतियां दीं। राग केदार के अलावा पांच सात छोटी-बड़ी बंदिशों के अलावा कुछ अपना भी उन्होंने सुनाया। तब उन्हें सारंगी पर हमारे साथी दिवंगत पंडित विनोद मिश्रा ने संगत दी।
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वे सुनते बहुत धैर्य के साथ थे
डॉ खुशीराम
- फोटो : amar ujala
नगर के मृदंगाचार्य पंडित डॉ. राज खुशीराम ने कहा कि कुछ समय पहले मथुरा वृंदावन निधिवन में हुए एक संगीत समारोह में मेरी प्रस्तुति के समय वे अतिथि थे। प्रस्तुति के दौरान मेरे सामने ही बैठे थे और उनके अगल-बगल कुछ नामी दिग्गज लोग थे। लेकिन वे प्रस्तुति सुनने में इस कदर मगन थे कि अपने साथ बैठे लोगों को उन्होंने एक बार टोक भी दिया। प्रस्तुति के बाद आशीर्वाद देते हुए बोले, बढ़िया बजाया, मन ताजा हो गया।
बच्चों से कहा कि मेहनत इतनी करो कि सफलता पीछे चल पड़े
कमलेश दुबे ने बताया कि समारोह में शामिल होने के लिए वे अपने शिष्य उनके करीबी रिश्तेदार के साथ सुबह ही लखनऊ आ गए थे। परिवर्तन चौक के पास स्थित एक होटल में ठहरे थे। दोपहर में समय निकालकर वे भातखंडे परिसर आए तो शिक्षकोें, छात्रों से भी कुछ समय के लिए रूबरू हुए। छात्रों को आशीर्वाद देते हुए उन्होंने कहा था- गायन हो या वादन मेहनत इस कदर करो कि सफलता आपके पीछे ही पड़ जाए।
बच्चों से कहा कि मेहनत इतनी करो कि सफलता पीछे चल पड़े
कमलेश दुबे ने बताया कि समारोह में शामिल होने के लिए वे अपने शिष्य उनके करीबी रिश्तेदार के साथ सुबह ही लखनऊ आ गए थे। परिवर्तन चौक के पास स्थित एक होटल में ठहरे थे। दोपहर में समय निकालकर वे भातखंडे परिसर आए तो शिक्षकोें, छात्रों से भी कुछ समय के लिए रूबरू हुए। छात्रों को आशीर्वाद देते हुए उन्होंने कहा था- गायन हो या वादन मेहनत इस कदर करो कि सफलता आपके पीछे ही पड़ जाए।