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आपके घर भी आएंगे भव्य मंदिर में विराजमान रामलला

Wed, 04 Mar 2020 02:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा धीरेंद्र सिंह, अयोध्या
धीरेंद्र सिंह, अयोध्या Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 04 Mar 2020 02:59 AM IST
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Ramlala will come to youy home also
राममंदिर का मॉडल - फोटो : अमर उजाला

‘भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।।’...यह स्तुति जल्द ही आप अपने घर में रामलला के अलौकिक विग्रह के समक्ष कर सकेंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट धर्म व वास्तुशास्त्र की हर कसौटी पर विराजमान रामलला का दिव्य पोर्टेबल मंदिर उपलब्ध कराने जा रहा है। भूमि पूजन के दौरान सबसे पहले इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गिफ्ट करने की तैयारी है।

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‘जाकर नाम सुनत सुभ होई। मोरें गृह आवा प्रभु सोई...’ राममंदिर बनने के साथ-साथ यह भक्तिमय उल्लास गांव से लेकर घर-घर तक जगाने की योजना पर काम शुरू होगा। संत-धर्माचार्य कहते हैं कि धर्म व वास्तुशास्त्र की हर कसौटी पर बने राममंदिर में विराजमान रामलला की अनुकृति की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आएगी।
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ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के मुताबिक यह एक अभिनव प्रयोग है, राममंदिर को घर-घर तक पहुंचाने का। कोलकाता में इसे बनाने का कार्य सौंपा गया है। प्रस्तावित मॉडल में मिमी. तक का अंतर न हो, इसका खास ध्यान रखा गया है।
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ऐसा होगा पोर्टेबल राममंदिर
चंपत राय के मुताबिक पोर्टेबल राममंदिर 48 इंच लंबा, 24.59 इंच चौड़ा और पताका के साथ 57.6 सेमी ऊंचा होगा। यह फाइबर से बनेगा, जिसकी आयु 50 साल से अधिक होगी, चारों तरफ से काष्ठ के फ्रेम में शीशे से पैक होगा। इसका कुल वजन 14 किग्रा. होगा। इसमें भी रामलला का वही दृश्य उपस्थित होगा, जैसा अयोध्या में बनने जा रहे भव्य राममंदिर का होगा। तीन तरफ से गर्भगृह में विराजमान रामलला का भक्त दर्शन कर सकेंगे। 

पहले चरण में बनेंगे ऐसे एक हजार मंदिर
सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री के लिए एक मॉडल करीब पौने तीन लाख में बन रहा है। पहले चरण में एक हजार मंदिर बनने हैं। संख्या बढ़ने के साथ इसकी लागत भक्तों तक पहुंचाने में 10 हजार रुपये तक आने की उम्मीद है। तीन माह के भीतर एक हजार ऐसे मंदिर तैयार करने का लक्ष्य सौंपा गया है।


रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सतेंद्र दास कहते हैं कि 23 दिसंबर 1949 को रामलला के प्राकट्योत्सव के बाद विग्रह का विधिवत पूजन-अर्चन शुरू हुआ। भक्त 52 फुट दूर से दर्शन करते हैं और प्रतिबंधों के चलते करीब से कोई स्पष्ट चित्र आजतक भक्तों के सामने नहीं आ पाया। घर में विराजमान रामलला का मंदिर रखना पूरे परिवार के लिए बहुत ही मंगलदायी होगा।

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