राम मंदिर का चंदा चोरी: ट्रस्ट ने पैसे गिनने के लिए रखे थे अपने ही लोग, कर्मचारियों की नहीं होती थी तलाशी
Ram Temple donation theft: राम मंदिर चंदा चोरी की परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं। ट्रस्ट ने चंदा को गिनने के लिए अपने ही लोग रखे थे, जिनकी कभी तलाशी नहीं होती थी।
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श्रीराम मंदिर के चढ़ावे की रकम पार करने के पीछे तमाम लापरवाही और खेल हैं। जिनकी परतें अब खुल रही हैं। दरअसल, बैंक ने गिनती करने वाले कर्मचारियों को एक कंपनी के जरिये आउटसोर्सिंग पर रखा हुआ था। इसमें खेल ये किया गया कि ट्रस्ट ने जो कर्मचारी तय किए, आउटसोर्सिंग पर वही लोग रखे गए। ये लोग या तो किसी पदाधिकारी के रिश्तेदार थे या फिर उनके परिचित। पूरा मामला ही गोलमाल है।
मंदिर व्यवस्था में चढ़ावे की राशि की गिनती प्रक्रिया मुख्य कार्यों में से एक है जिसकी जिम्मेदारी ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों, बैंक कर्मियों की तय की गई थी, लेकिन इसी महत्वपूर्ण कार्य में लापरवाही बरती गई। या ये कहा जाए कि चढ़ावा चोरों को हाथ साफ करने का पूरा मौका दिया गया। न निगरानी की गई, न कर्मचारियों का सत्यापन और न ही उनकी कोई जामा तलाशी की जाती थी। इसलिए वह बेखौफ होकर रकम पार करते रहे। चूंकि कर्मचारी ट्रस्ट की तरफ से रखे गए थे, इसलिए बैंक अधिकारियों की हिम्मत ही नहीं हुई कि वह इस पर सवाल उठा सकें। वहीं दूसरा पहलू ये भी है कि इसमें बैंक की भी भूमिका संदिग्ध है। उनके कर्मचारियों या अधिकारियों की भी मिलीभगत हो सकती है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता।
सुरक्षा से भी खिलवाड़...
मंदिर परिसर की सुरक्षा में पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात हैं। ये सभी जवान पूरी सख्ती बरतते हैं जिससे मंदिर व्यवस्था की सुरक्षा पुख्ता रहती है। दूसरी तरफ ट्रस्ट से रखे गए कर्मचारी गले में आईकार्ड लटकाकर हर जगह घूमते रहते हैं। जिस तरह से कर्मचारियों ने रकम पार की और वहां से लेकर गए, वह सुरक्षा व्यवस्था से भी खिलवाड़ है। क्योंकि साफ है कि उनकी तलाशी नहीं की गई, क्योंकि वह वहां के कर्मचारी थे। सूत्रों के मुताबिक, इस तरह के कर्मचारियों की मंदिर परिसर के कोने-कोने तक पहुंच है। टिन्नू व अन्य लोगों ने ऐसे 50 से अधिक कर्मी रखे हुए हैं।
इसलिए कम पैसों में कर रहे थे काम...
अब तक जिनके पास से रकम बरामद हुई, वह सभी 12 से 18 हजार रुपये प्रति माह के वेतन पर काम कर रहे थे। दिन से लेकर रात तक ये सभी मंदिर में ही रहते थे। इतने कम वेतन में इतना लंबा काम करने के पीछे की वजह अब समझ आ रही है। क्योंकि वह चढ़ावे की करोड़ों की रकम पार कर रहे थे इसलिए वेतन से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।