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विक्रमादित्य से सत्रह गुना बड़ी होगी मोदी की अयोध्या, 84 कोसी नव्य अयोध्या का 5 अगस्त को हो सकता एलान

Fri, 31 Jul 2020 10:22 AM IST
शाहरुख खान धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, अयोध्या
धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, अयोध्या Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 31 Jul 2020 10:22 AM IST
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ram janmabhoomi Modi Ayodhya will be seventeen times bigger than Vikramaditya
भगवान श्रीराम की पेंटिंग बनाता कलाकार - फोटो : अमर उजाला
रमानाथ जहं राजा सो पुर बरनि कि जाइ। अनिमादिक सुख संपदा रहिं अवधि सब छाइ।। इसी अंदाज में अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां आकर भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण को लेकर भूमि पूजन के साथ नव्य अयोध्या बसाने का एलान कर सकते हैं। 
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यह उज्जैन के महाराजा विक्रमादित्य द्वारा बसाई गई पांच कोस की अयोध्या से करीब 17 गुना बड़ी चौरासी कोस में होगी। जहां करीब सवा तीन सौ रामायणकालीन स्थलों और ऋषि-मुनियों के आश्रमों का पुनरुद्धार करने के साथ आधुनिक पर्यटन, यातायात और  ठहरने की सुविधाएं विकसित होंगी। 
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इसका खाका खींचने बृहस्पतिवार को अचानक रात में केंद्रीय पयर्टन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल अयोध्या पहुंच रहे हैं। वे शुक्रवार को जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ खाका खीचेंगें। इतिहास बताते हैं कि मुगल शासक बाबर से पहले अयोध्या को रोमन सेना की बर्बरता और तबाही झेलनी पड़ी थी। 
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अलेक्जेंडर पंजाब के रास्ते आया जरूर था, परंतु 12 गणराज्यों ने आपसी भेद भुलाकर संयुक्त हमला करके लौटने को विवश किया। उसके पराजय को ध्यान में रखकर रोमन-कुषाण मिनेंडर ने वैष्णव नगरी को तबाह किया था। तीन महीने के संघर्ष के पश्चात शुंग वंशीय राज दयुमत्सेन ने मिनेंडर को मार गिराया। फिर भी कुषाणों के आक्रमण बारंबार होते रहे, इसलिए श्रीरामजन्मभूमि पर मंदिर बनाने में बाधा आती रही। 

ईसापूर्व सौ वर्ष महाराजा विक्रमादित्य के बड़े भाई भर्तृहरि ने जब राज्य छोड़कर सन्यास लिया और गुरू गोरखनाथ महाराज के शिष्य बने। तब उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य यहां रामदर्शन करने आए थे। सम्राट ने दखा कि समूची अयोध्या ध्वस्त पड़ी है। तब उन्होंने सरयू नदी के लक्ष्मणघाट से नापकर रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण करने वाले प्रभु राम के पुत्र महाराज कुश द्वारा बनवाई गई हवेली के जोते पहिए को खोजा। 

फिर उस पर विशाल श्रीरामजन्मस्थान मंदिर बनाते हुए पांच कोस में 360 मंदिरों का निर्माण कर नई अयोध्या बसाई थी। इसके स्तंभों का उल्लेख वंशीय प्रबंध व लोमस रामायण में मिलता है। इस प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा राम नवमी को उत्सव के साथ की गई। 

अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 492 वर्ष बाद उसी श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर की नींव रखने आ रहे हैं। उनका दौरा सिर्फ श्री रामजन्मभूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सम्राट विक्रमादित्य की बसाई गई अयोध्या से 17 गुना बड़ी अयोध्या की आध्यात्मिक चौरासी कोस की परिधि तक ले जाने की मंशा से आ रहे हैं। 

इसका प्रस्ताव भी तैयार है। रामकोट स्थित श्रीरामजन्मभूमि से दो किलोमीटर की परिधि में पौने दो सौ जर्जर होकर ढह रहे पौराणिक स्थलों के पुनरोद्घार की स्वीकृति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दे दी है। इसे भारत सरकार के पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय को भेजा जा चुका है। 
 

इसके अलावा चौरासी कोसी परिधि में आने वाले बस्ती जिले के पुत्रेष्टि यज्ञ स्थल मखधाम मखौड़ा से लेकर, दशरथ समाधि स्थल, भरतकुंड, श्रृंगी ऋषि आश्रम आदि करीब 50 रामायण कालीन पौराणिक स्थलों का पुनरुद्धार होना है। पर्यटकों की सुविधा के लिए 84 कोसी परिक्रमा मार्ग फोरलेन बनाने के साथ आधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी।

अयोध्या से जुड़ेगी स्वामीनारायण की जन्मस्थली
गुजरात में सर्वाधिक पूज्यनीय भगवान स्वामीनारायण की जन्मस्थली अयोध्या से करीब 40 किमी दूर गोंडा जिले के छपिया में है, अयोध्या उनकी रमण भूमि रही है। भक्त पहले अयोध्या आकर सरयू स्नान और दर्शन-पूजन करते हैं फिर स्वामीनारायण का दर्शन पूर्ण माना जाता है। 

इसको ध्यान में रखते हुए गोंडा के नवाबगंज नगरपालिका समेत 62 गांवों को अयोध्या विकास प्राधिकरण में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है। बताते हैं कि छपिया से अयोध्या तक कारीडोर बनाने के साथ भक्तों की सुख सुविधाएं और रिहायशी कालोनियां विकसित करने की इच्छा उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडानी जैसे दिग्गज जता चुके हैं।

138 गुना बढ़ेगा अयोध्या विकास प्राधिकरण का दायरा
पयर्टन की असीम संभावनाओं को देखते हुए सरकार ने अयोध्या विकास प्राधिकरण का दायरा 6325.24 हेक्टेयर में बसी कुल 3 लाख 31 हजार 162 से बढ़ाकर अब 87 हजार 261 हेक्टेयर की कुल आबादी 8 लाख 73 हजार 373 करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसकी स्वीकृति भी प्रधानमंत्री के दौरे के साथ मिल सकती है।

इस नई अयोध्या में सरयू के दोनों तट का सीमाई विस्तार होगा। अयोध्या के नगर निगम समेत नगर पंचायत भदरसा शामिल होगी जबकि गोंडा के नवाबगंज नगरपालिका परिसर समेत 62 गांव और बस्ती जिले के 90 गांव शामिल होंगें। इन इलाकों में औद्योगिक समूह बड़े-बड़े अत्याधुनिक होटल, रेस्त्रां, शॉपिंग माल समेत कई उपनगर बसाएंगें। अयोध्या में सबसे बड़ा आकर्षण श्रीरामजन्मभूमि के भव्य मंदिर के साथ 251 मीटर ऊंची प्रभु श्रीराम की अब तक सबसे बड़ी विश्व की प्रतिमा होगी।

अयोध्या के पर्यटन विकास की बहुत बड़ी तस्वीर सामने आने वाली है। इसकी तैयारी के लिए केंद्रीय पयर्टन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल रात करीब नौ बजे तक फैजाबाद सर्किट हाऊस पहुंच सकते हैं। अयोध्या में पर्यटन विकास के लिए करोड़ों रूपए के कार्य हो रहे हैं। 251 मीटर प्रभु राम की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाने के साथ सांसद लल्लू सिंह की ओर से चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग पर करीब 60 पौराणिक स्थानों के विकास व आवागमन बेहतर  इंतजाम के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। 
-आरपी यादव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अयोध्या व देवीपाटन मंडल
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