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कौन है सपा का गद्दार, जो भोंक रहा है पीठ में छुरा?

Sun, 12 Oct 2014 11:56 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 12 Oct 2014 11:56 AM IST
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ram gopal yadav worries about party traitor

मौका तो सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन का था। लोगों को उम्मीद थी कि चिंता दिल्ली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने और मोदी सरकार को घेरने की होगी।

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विधानसभा के 2017 में प्रस्तावित चुनावों पर चर्चा होगी। पर, पार्टी में मौजूद गद्दारों का मुद्दा सबसे ज्यादा मुखर रहा।

एजेंडा का हिस्सा न होने के बावजूद जब राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव राजनीतिक व आर्थिक प्रस्ताव रखने के बाद अचानक पार्टी के गद्दारों पर बोलने लगे तो लोग चौंक पड़े।
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उन्होंने कहा, एक-एक गद्दार हमारी नजर में है। इन लोगों ने लोकसभा चुनाव में पार्टी की पीठ में छुरा भोंका है। वह तो इन सबको निकाल बाहर करते।

लेकिन नेता जी (मुलायम सिंह) की दयालुता के कारण ऐसा नहीं हो पाया लेकिन ये बाज नहीं आ रहे हैं। इनको एक न एक दिन दंड जरूर दिया जाएगा।

इससे दिमाग में यह सवाल कौंधना स्वाभाविक है कि आखिर रामगोपाल जैसे पार्टी के बडे़ और महत्वपूर्ण नेता को यह बात इतने बड़े मंच से कहने की जरूरत क्यों आ पड़ी?
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वह भी एजेंडा का हिस्सा न होने के बावजूद। यह बात वह पार्टी के भीतर भी कह सकते थे।

यह भी हो सकता है कारण

ram gopal yadav worries about party traitor

वैसे, पार्टी के ही कुछ नेताओं की मानें तो एक कारण अमर सिंह की सपा में वापसी की अटकलें भी हैं। सभी को पता है कि अमर सिंह की सपा से रुख्सती रामगोपाल का विरोध करने पर ही हुई थी।

अब, जब अमर सिंह की वापसी की चर्चा फिर शुरू हो गई है तो उनका बेचैन होना स्वाभाविक है। इसकी कुछ वजहें और हैं। एक तो अमर सिंह के आने के बाद हो सकता है कि मीडिया पर रामगोपाल से ज्यादा अमर छाए रहें।

दूसरे, अमर सिंह सपा में दूसरी पारी शुरू करने पर भी रामगोपाल के दबाव में शायद ही रहें। साथ ही एक वजह निकट भविष्य में होने वाला राज्यसभा चुनाव भी है।

ऐसे संकेत हैं कि सपा मुखिया ने अमर सिंह को सपा के समर्थन से राज्यसभा भेजने का मन बना लिया है। सिर्फ अमर ही नहीं, नेता जी की लिस्ट में एक नाम चौधरी अजित सिंह और तीसरा नाम बेनी वर्मा का बताया जा रहा है।

अजित न सही लेकिन अमर व बेनी जैसे नेताओं का मुलायम के साथ होना रामगोपाल के महत्व को कुछ न कुछ झटका देगा। यह बात रामगोपाल भी जानते हैं।

इसीलिए इस तरह की बातें करके वह दबाव बनाना चाहते हैं कि ऐसा न हो। वह यह भी बताना चाह रहे हैं कि गद्दारों को गले लगाने से फायदा नहीं होगा।

उन्होंने इसीलिए कहा- ‘ क्या करें, नेता जी! भोले बाबा हैं। जो भस्मासुरों को भी वरदान दे देते हैं। पर, मैं यह चलने नहीं दूंगा।’

यह वजह तो नहीं

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सपा की राजनीति को नजदीक से देखने समझने वालों का मानना है कि रामगोपाल इस बात से भलीभांति परिचित हैं कि पार्टी के भीतर उनके दोस्तों की संख्या कम ही है।

दुश्मन उनकी मजबूत स्थिति और पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव के पूरे समर्थन के कारण भले ही कुछ न बोलते हों लेकिन अंदर ही अंदर वे रामगोपाल की रीतिनीति और रवैया पसंद नहीं करते।
ऐसा लगता है कि सपा नेता ने गद्दारों को दंड देने की बात कहकर उन्हें दायरे में रहने के लिए चेताया है।

राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो इसकी वजह है। मौजूदा परिस्थितियों में सपा तमाम आंतरिक चिंताओं से जूझ रही है। भविष्य के नेतृत्व की चिंताएं भी अंदरखाने मौजूद हैं।

उसके चलते राजनीति में सक्रिय लोगों के दिलो दिमाग में महत्वाकांक्षाएं पैदा होना स्वाभाविक है। लगता है, इन्हीं महत्वाकांक्षाओं के टकराव से रामगोपाल के जुबान पर इस तरह की बात आई है।

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