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राजनाथ बोले, 'हम अच्छे रिश्ते चाहते हैं पाक ने रद्द की वार्ता'

Sun, 23 Aug 2015 09:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 23 Aug 2015 09:57 PM IST
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Rajnath Singh says Pak refuses talk with India.

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की वार्ता रद्द होना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह वार्ता पाकिस्तान ने निरस्त की है।

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जो एजेंडा पहले से तय था पाकिस्तान को उसी पर बात करनी चाहिए थी लेकिन उसने वार्ता ही निरस्त कर दी। भारत की हमेशा से ही यही सोच रही है कि वह अपने पड़ोसी देशों से अच्छे रिश्ते चाहता है।
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राजनाथ रविवार को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की वार्ता में एजेंडा पहले से ही तय था, जिसके मुताबिक कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं होगा। इसके बावजूद पाकिस्तान एजेंडे से बाहर जाना चाहता था।
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एक सवाल के जवाब में गृहमंत्री ने कहा कि यदि कश्मीर पर पाकिस्तान को बात करनी थी तो उसने पहले एजेंडे में इसे क्यों नहीं तय किया। एजेंडा तय होने के बाद उससे हटना ठीक नहीं है। आगे की वार्ता के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसका फैसला पाकिस्तान को ही लेना है।

विदेशी अपना रहे संस्कृत और हम दूर होते जा रहे

Rajnath Singh says Pak refuses talk with India.

वहीं, एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा विज्ञान व तकनीक के लिए सर्वाधिक उपयोगी है। नासा ने भी माना है कि कंप्यूटर के लिए यही सबसे मुफीद भाषा है, लेकिन विडंबना यह है कि विदेशों में जहां लोग संस्कृत को अपना रहे हैं, वहीं हम इससे दूर होते जा रहे हैं। अंग्रेजी के शब्दों के उच्चारण में विविधता है जबकि संस्कृत का उच्चारण एक ही रहता है। चाहे दक्षिण भारतीय हो या उत्तर भारतीय या फिर विदेशी, सभी का संस्कृत उच्चारण एक ही होता है।

वह रविवार को लखनऊ के गोमतीनगर के राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान मानित विश्वविद्यालय में आयोजित ‘गृहं-गृहं प्रति संस्कृतम्’ कार्यक्रम के शुभारंभ मौके पर बोल रहे थे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य संस्कृत भाषा को घर-घर तक पहुंचाना है। अखिल भारतीय स्तर पर यह अभियान आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालय व संस्थाएं हिस्सा ले रही हैं।

पूरा कार्यक्रम संस्कृत में होने के कारण जब बारी गृहमंत्री के बोलने की आई तो उन्होंने कहा कि उन्हें भी संस्कृत में ही बोलना चाहिए था, लेकिन वे बड़े दुर्भाग्यशाली हैं कि संस्कृत भाषा समझ तो सकते हैं लेकिन बोल नहीं सकते। राजनाथ ने कहा कि उन्होंने भी हाईस्कूल तक संस्कृत भाषा पढ़ी है।

अब तो विदेशों में भी लोग मानने लगे हैं कि संस्कृत भाषा एक वृक्ष है, जबकि अन्य भाषाएं उसकी टहनी के समान हैं। प्रसिद्ध भाषा शास्त्री सर विलियम्स जोन्स ने खुद कहा है कि अभिज्ञान शाकुंतलम् में जिस तरह की सुंदर उपमाएं लिखी गई हैं, दूसरी किसी भी भाषा में यह संभव नहीं है। दर्शन से जुड़े गूढ़ का समाधान इसी भाषा में मिलेगा।

...जब शिक्षामंत्री था तो अनिवार्य कर दी थी संस्कृत

Rajnath Singh says Pak refuses talk with India.

उन्होंने कहा कि वर्ष 1991 में जब वे यूपी के शिक्षा मंत्री थे तो उन्होंने संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए काफी प्रयास किए। उन्होंने हाईस्कूल में हिंदी का तीसरा प्रश्नपत्र संस्कृत का कर दिया था। पहले हिंदी व संस्कृत का आधा-आधा प्रश्नपत्र आता था।

इसके अलावा वैदिक गणित को भी उन्होंने अनिवार्य किया था, लेकिन डेढ़ साल बाद जब उनकी सरकार गई तो वैदिक गणित को भी पाठ्यक्रम से बाहर कर दिया गया। इस अवसर पर उन्होंने संस्कृत भारती की पुस्तक ‘संस्कृत बोलिए’ का भी विमोचन किया। यह पुस्तक भी घर-घर वितरित की जाएगी।

इससे पहले राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के कुलपति प्रो. परमेश्वर नारायण शास्त्री ने राजनाथ सिंह को रुद्राक्ष की माला भेंट कर उनका स्वागत किया। संस्कृत भारती के क्षेत्र संगठन मंत्री डॉ. संजीव कुमार ने संस्कृत भाषा को अपनाने व इसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति यदुनाथ प्रसाद दुबे, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति एसबी निमसे, सुरेंद्र पाठक, हृदय रज्जन शर्मा, बिंदा प्रसाद मिश्र, डॉ. योगमाया व ब्रह्मानंद चतुर्वेदी आदि उपस्थित थे।

10 स्कूलों में मुफ्त में पढ़ाई जा रही है संस्कृत

Rajnath Singh says Pak refuses talk with India.

राजनाथ ने कहा कि लखनऊ के सभी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों को मिलकर एक ऐसा कार्यक्रम करना चाहिए जिसमें युवाओं को संस्कृत भाषा के महत्व और उपयोगिता के बारे में बताया जाए। बाद में लखनऊ के महापौर डॉ. दिनेश शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि यह अच्छा सुझाव है। इस पर जल्द ही काम किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय में संस्कृत पर काफी काम हो रहा है। लखनऊ में एक मोहल्ला ऐसा है जिसका नाम ही संस्कृत नगरम् रखा गया है। इसके अलावा करीब 10 स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों को मुफ्त में संस्कृत पढ़ाई जाती है।

वैष्णवी व मित्र ने संस्कृत में शास्त्रार्थ कर जीता दिल
दिल्ली पब्लिक स्कूल में कक्षा तीन में पढ़ने वाले मित्र व कक्षा छह की छात्रा वैष्णवी ने संस्कृत में शास्त्रार्थ कर लोगों का दिल जीत लिया। मित्र ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक पढ़े तो वैष्णवी ने उन श्लोकों का अर्थ पूछा।

दोनों के बीच करीब 15 मिनट तक यह शास्त्रार्थ संस्कृत में ही चलता रहा। अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने वाले इन बच्चों को धाराप्रवाह संस्कृत बोलते देखकर राजनाथ भी काफी प्रभावित हुए।

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