यूपी में कल्याण के शासन को इन वजहों से किया जाता है याद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजस्थान के राज्यपाल और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह बृहस्पतिवार की दोपहर अचानक दिल्ली रवाना हो गए। चर्चा है कि उनकी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ भी मुलाकात होगी।
वैसे तो कल्याण राज्यपाल के नाते भाजपा के फोरम पर औपचारिक तौर पर बहुत सक्रिय नहीं दिख सकते, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि परदे के पीछे पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उनसे यूपी के मामलों में हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर सलाह-मशवरा करता है।
बताया जा रहा है कि मोदी और भाजपा के अन्य शीर्ष नेताओं के साथ दिल्ली में उनकी मुलाकात में प्रदेश की नई सरकार के स्वरूप और एजेंडे को भी अंतिम रूप दिया जाएगा।
वैसे तो शीर्ष नेतृत्व ने यूपी के भावी मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह अगर मुख्यमंत्री नहीं बने तो केशव प्रसाद मौर्य की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
हालांकि चर्चा में अब भी अन्य कई नाम शामिल हैं। कहा यह भी जा रहा है कि पार्टी चौंकाने वाला फैसला करते हुए किसी ऐसे चेहरे को भी आगे ला सकती है जिसका नाम अभी तक बहुत चर्चा में न हो।
कयासों का दौर जारी
पार्टी की तरफ से अभी तक मुख्यमंत्री पद के लिए किसी के नाम की औपचारिक घोषणा न होने के कारण कयासों का दौर जारी है। इनमें रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, महंत आदित्यनाथ, लखनऊ के महापौर डॉ. दिनेश शर्मा के नाम की अटकलें हैं।
कुछ लोग ऐसे भी कयास लगा रहे हैं कि हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के फार्मूले पर चलते हुए पार्टी किसी अचर्चित चेहरे को आगे लाकर मुख्यमंत्री बना सकती है।
जिस पर किसी तरह की लॉबी या गुट का ठप्पा न हो। ऐसे में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन रामलाल, पार्टी विधानमंडल दल नेता सुरेश खन्ना, पार्टी के प्रदेश महामंत्री स्वतंत्रदेव सिंह सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विद्यार्थी परिषद जुड़े रहे कुछ अन्य चेहरे हैं।
इसलिए है कल्याण का महत्व
कल्याण भले ही इस समय राजस्थान के राज्यपाल हो, लेकिन यूपी में कानून-व्यवस्था और सख्त प्रशासन के लिए उनकी सरकार को लोग आज भी याद करते हैं। उनकी सरकार में भ्रष्टाचार पर अंकुश और पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई सारे कदम उठाए गए थे।
माना जाता है कि लोकसभा चुनाव में कल्याण सिंह को साथ लेकर सूबे में रैलियां करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी विधानसभा चुनाव भी कल्याण के फार्मूले पर लड़ा।
जिसमें सूबे के मुख्यमंत्री रहते राजनाथ सिंह द्वारा सामाजिक न्याय समिति के द्वारा अति पिछड़ों व गैर जाटव दलित को भाजपा से जोड़ने की रणनीति भी शामिल थी।
इसीलिए शीर्ष नेतृत्व अनौपचारिक तौर पर कल्याण से सलाह मशवरा करके प्रदेश की भावी सरकार के स्वरूप को अंतिम रूप देना चाहता है। बातचीत में मंत्रिपरिषद के संभावित चेहरे, उनके विभाग तथा सरकार की तरफ से होने वाले फैसलों और प्राथमिकताओं के मुद्दे शामिल रहेंगे।