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ट्रिप राशन कार्ड से खुलेगा रेलवे के डीजल शेड में चल रहा तेल चोरी का खेल

Thu, 05 Aug 2021 01:30 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 05 Aug 2021 01:30 AM IST
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railway employees steeling diesel
नीरज ‘अम्बुज’ लखनऊ। डीजल शेड में आने वाले इंजनों के मेंटेनेंस के लिए बनने वाले ट्रिप राशन कार्ड से डीजल चोरी का खेल खुलेगा। क्राइम ब्रांच ने ट्रिप राशन कार्ड व लेजर का मिलान कर रिकॉर्ड चेक किया है, जिसमें खामियां मिली हैं। इतना ही नहीं शेड में जहां डीजल की हेरफेर होती रही, वहां सीसीटीवी कैमरे ही नहीं लगने दिए गए।
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गत 28 जुलाई को उत्तर रेलवे के आलमबाग स्थित डीजल शेड में इंडियन ऑयल डिपो अमौसी से आए दो डीजल टैंकरों में से एक को चीफ लोको इंस्पेक्टर बीएस मीणा ने पार कर दिया। उसने कागजों में दो टैंकरों की आमद दर्ज की, जबकि आरपीएफ ने सिर्फ एक टैंकर का ही गेटपास बनाया और सीसीटीवी में भी एक टैंकर के आने की ही पुष्टि हुई। इसके बाद आरपीएफ ने कार्रवाई करते हुए खलासी दिलनवाज, ड्राइवर नीरज सिंह व क्लीनर अभिमान सिंह को गिरफ्तार कर खाली टैंकर गोमतीनगर से बरामद कर लिया। वहीं मुख्य आरोपी बीएस मीणा फरार है। मामले के उजागर होते ही डीजल शेड में तेल का खेल परत दर परत खुलना शुरू हो गया है। आरपीएफ व क्राइम ब्रांच जांच में लगे हैं।
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शेड के रेलवे डीजल इंस्टॉलेशन (आरडीआई) से डीजल की चोरी बड़े पैमाने पर होती रही है। चोरी के तेल को एडजस्ट करने के तमाम हथकंडे अपनाए जाते थे। ट्रिप राशन कार्ड को जांचने पर तेल चोरी की नई-नई परतें सामने आएंगी। रेलवे अधिकारी बताते हैं कि डीजल शेड में इंजन को मेंटेनेंस के लिए लाने पर ड्राइवर जहां रिकॉर्ड दर्ज करता है, उसे ट्रिप राशन कार्ड कहते हैं। इसमें इंजन के आने पर मौजूद तेल, आरडीआई में कितना तेल भरा गया है, उसका विवरण व इंजन मेंटेन होने के बाद वापसी में कितना तेल भरा हुआ दिया गया, इसकी जानकारी दर्ज की जाती है।
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ऐसे होता है तेल चोरी का खेल
डीजल शेड के एक अधिकारी ने बताया कि जब शेड में इंजन मरम्मत के लिए आता है तो सबसे पहले एयर वॉशिंग होती है। फिर जेई इंजन का निरीक्षण करता है। इसके बाद आरडीआई में इंजन जाता है, जहां डीजल भरा जाता है। ड्राइवर के पास ट्रिप राशन कार्ड होता है, जिसमें वह भरे गए डीजल को दर्ज करता है। यहीं पर खेल होता था। मसलन, एक इंजन में अगर डेढ़ हजार लीटर तेल है और उसमें आरडीआई में तीन हजार लीटर भरा जा रहा है तो कुल 4500 लीटर तेल होना चाहिए, लेकिन इतना नहीं रहता था। चार से पांच सौ लीटर कम तेल डाला जा रहा था, लेकिन आरडीआई के लेजर में फुल ऑयल दर्ज किया जाता है। इसके बाद इंजन शंटर के पास जाता तो कार्ड में वह असल तेल दर्ज कर देता है और मरम्मत के बाद इंजन ले जाने वाला ड्राइवर तेल को मापकर ट्रिप राशन कार्ड पर भर देता है। ऐसे में क्राइम ब्रांच के अधिकारी ट्रिप राशन कार्ड, लेजर व शंटर का रिकॉर्ड मिला रहे हैं।
4 घंटे चला इंजन, 8 घंटे दर्ज!
डीजल शेड में जब इंजन की मरम्मत होती है तो जरूरत के मुताबिक उसे ऑन कर छोड़ दिया जाता है, ताकि खामी होने पर पता लग सके। इसमें मरम्मत के बाद अगर इंजन को चार घंटे ऑन रखा गया तो कागजों में उसे आठ से 10 घंटे ऑन दिखाकर तेल चोरी का खेल किया जाता है। इस खेल में आला अधिकारी भी शामिल रहते हैं।
यहां से हुई तेल चोरी की शुरुआत
डीजल शेड में तेल चोरी का असल खेल वर्ष 2016 के आसपास शुरू हुआ। पूर्व रेलकर्मी एके सिद्दीकी जब शेड में ट्रकों से तेल आता था तो वह पूरा तेल नहीं निकलवाता था। दो-ढाई सौ लीटर तेल टैंकर में ही बचाकर बाहर बेच दिया जाता था। इसके बाद वर्ष 2018 में दूसरा बड़ा मामला सामने आया। उस दौरान तैनात सीएलआई सीधे ड्राइवर से संपर्क कर तेल टैंकर आने से पहले ही चार से पांच सौ लीटर डीजल बाहर निकलवा कर बिकवा देता था। अब सीएलआई बीएस मीणा द्वारा पूरा तेल टैंकर पार करने का मामला उजागर हुआ है।
आखिर क्यों नहीं लगने दिए सीसीटीवी
आलमबाग स्थित डीजल शेड के गेट पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। वहीं जहां मेंटेनेंस होती है वहां और कई अन्य जगहों पर सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी लगे हैं। लेकिन आरडीआई में जहां इंजनों में तेल भरा जाता है वहां सीसीटीवी नहीं लगे। आरपीएफ इंस्पेक्टर केआर रोशन के मुताबिक जांच टीम इस पर सवाल उठा रही है। सूत्रों का कहना है कि आरडीआई में बड़े रेलवे यूनियन नेताओं से लेकर अधिकारियों तक की गाड़ियों में चोरी का तेल भरा जाता था। उनकी शह पर ही यहां कैमरे नहीं लगे।

लॉकडाउन के समय भी हेरफेर की आशंका
डीजल शेड में टैंकरों से आने वाले डीजल के लिए 7,70,000 लीटर क्षमता के टैंकर हैं। इसमें दो टैंकर 70-70 हजार लीटर क्षमता के जबकि एक टैंकर 6,30,000 लीटर क्षमता है। वहीं इंजन की मरम्मत के लिए शेड में औसतन रोजाना 15 से 20 हजार लीटर तेल की खपत होती है। जांच टीम लॉकडाउन के दौरान ट्रेनों के बंद होने के दौरान खर्च होने वाले तेल और इससे पहले रोजाना खर्च होने वाले तेल के रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका को देखते हुए भी पड़ताल कर रही है। उधर, सूत्र बताते हैं कि डीजल टैंकर पार करने के मुख्य आरोपी सीएलआई बीएस मीणा को बचाने के लिए यूनियन के बड़े नेताओं से लेकर अफसर तक लगे हुए हैं।
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