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छापेमारी: लखनऊ के 45 अस्पतालों पर छापा, ज्यादातर के पास लाइसेंस ही नहीं, फ्रिज में दवाओं की जगह बीयर की बोतलें

Thu, 22 Jul 2021 02:14 PM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Thu, 22 Jul 2021 02:14 PM IST
सार

दुबग्गा से हरदोई रोड पर अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय किंशुक श्रीवास्तव व डॉ. मिलिंद के नेतृत्व में निकली टीम पांच अस्पतालों में गई। इस दौरान मॉडर्न हॉस्पिटल मैटरनिटी एंड ट्रॉमा सेंटर में तीन आईसीयू के बेड मिले लेकिन एक्स-रे व इमरजेंसी की सुविधाएं नहीं थीं। डॉक्टर नहीं मिले, स्टाफ नर्स के पास नर्सिंग की डिग्री तक नहीं थी।

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CMO Team Raid On 45 Lucknow Hospitals, Mostly Running Without Standards
जिलाधिकारी के आदेश पर दुबग्गा, काकोरी, सीतापुर रोड, हरदोई रोड पर स्थित करीब 45 अस्पतालों पर प्रशासनिक टीम ने छापा मारा। - फोटो : amar ujala

विस्तार

राजधानी लखनऊ के अलग-अलग इलाकों में बिना मानक के चल रहे 45 अस्पतालों पर जिला प्रशासन की छह टीमों ने सोमवार को छापा मारा। ज्यादातर अस्पतालों के पास लाइसेंस ही नहीं मिला। किसी के पास तो वह एक्सपायरी था। ज्यादातर जगह तो डॉक्टर ही नहीं मिले। एक अस्पताल में तो बीएससी पास संचालक ही मरीज का इलाज कर रहे थे। नर्सिंग व ओटी टेक्नीशियन का काम छात्रों के जिम्मे मिला। यही नहीं, ओटी के फ्रिज में दवाओं की जगह बीयर की बोतलें मिलीं। छापे के बाद जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश के निर्देश पर सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल ने 29 अस्पतालों के खिलाफ नोटिस जारी किया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि अस्पताल प्रबंधन ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।

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दुबग्गा से हरदोई रोड पर अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय किंशुक श्रीवास्तव व डॉ. मिलिंद के नेतृत्व में निकली टीम पांच अस्पतालों में गई। इस दौरान मॉडर्न हॉस्पिटल मैटरनिटी एंड ट्रॉमा सेंटर में तीन आईसीयू के बेड मिले लेकिन एक्स-रे व इमरजेंसी की सुविधाएं नहीं थीं। डॉक्टर नहीं मिले, स्टाफ नर्स के पास नर्सिंग की डिग्री तक नहीं थी। बताया गया कि रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया गया है। न्यू एशियन हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टर नहीं थे और बीएससी डिग्रीधारक अस्पताल मालिक प्रेम कुमार वर्मा खुद ही मरीजों का इलाज करते मिले। दूसरे बीएएमएस डॉक्टर एनके शुक्ला न तो डिग्री दिखा सके और न यूनिवर्सिटी/इंस्टीट्यूट का नाम बता सके। यहां फार्मेसी का लाइसेंस नहीं था और न ही फार्मासिस्ट। एएनएम का कोर्स कर रहे छात्र नर्सिंग की ड्यूटी करते मिले। मेरिटस हॉस्पिटल में भी एएनएम और जीएनएम का कोर्स कर रहे छात्र-छात्राएं नर्सिंग व ओटी टेक्निशियन की ड्यूटी कर रहे थे। लाइसेंस की वैधता भी समाप्त पाई गई। वहीं लखनऊ तुलसी एंड ट्रॉमा सेंटर में चार आईसीयू बेड थे, लेकिन ईएमओ व अन्य डॉक्टर नहीं मिले। यहां ओटी के फ्रिज में बीयर की बोतलें रखी मिलीं। लाइसेंस की वैद्यता भी खत्म हो गई थी। इसी तरह मेडिप्लस एंड ट्रॉमा सेंटर के लाइसेंस सर्टिफिकेट की वैद्यता भी समाप्त मिली। ईएमओ के अलावा कोई डॉक्टर नहीं था। फार्मेसी का लाइसेंस भी नहीं दिखा सके।
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एक अस्पताल को तत्काल बंद करने के निर्देश
दुबग्गा से बुद्धेश्वर रोड पर अपर नगर मजिस्ट्रेट सप्तम शैलेंद्र कुमार व डॉ. आरसी चौधरी ने आधा दर्जन से अधिक अस्पतालों में औचक निरीक्षण किया और मेडविन हॉस्पिटल में खामियां मिलने पर उसे तत्काल बंद करने के निर्देेश दिए। वहीं हरदोई से आईआईएम रोड पर अपर नगर मजिस्ट्रेट षष्ठम सूर्यकांत त्रिपाठी और डॉ. केडी मिश्रा के नेतृत्व में टीम ने कुल 12 अस्पतालों का निरीक्षण किया। इस दौरान सैफालिया आई केयर एंड हॉस्पिटल में डॉक्टर नहीं मिले। पंजीकरण की वैधता भी समाप्त हो चुकी थी। सम्राट हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर में न डॉक्टर था, और न ही उसके प्रबंधक अजीत रावत पंजीकरण दस्तावेज दिखा सके। श्री रमेश जन सेवार्थ हॉस्पिटल में बुधवती नाम की एक ही मरीज भर्ती थी और उसके इलाज के लिए भी योग्य डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं था। पंजीकरण के दस्तावेज भी संतोषजनक नहीं थे।

सभी डॉक्टर गायब, सुविधाएं भी नदारद

काकोरी से दुबग्गा रूट पर डिप्टी कलेक्टर प्रज्ञा पांडेय और डॉ. दिलीप भार्गव के नेतृत्व में निकली टीम ने चार अस्पतालों का निरीक्षण किया। पहले कैंसर हॉस्पिटल में पता चला कि उसके लाइसेंस का 30 अप्रैल 2021 के बाद नवीनीकरण ही नहीं हुआ है। यहां 20 बेड स्वीकृत हैं, लेकिन 31 बेड पाये गए। ओटी और वार्ड में सफाई नहीं थी। रिकॉर्ड खंगालने पर मरीजों का विवरण भी गड़बड़ मिला। एक मरीज जमीऊरहमान की कीमोथेरेपी के लिए फाइल बनी थी, लेकिन न उसका इलाज हुआ और न ही डिस्चार्ज का समय दर्ज था। इसी तरह रमेश चन्द्रा के डिस्चार्ज होने का समय भी नहीं दर्ज था। यहां इलाज के लिए डॉ. समीर बेग को ऑन कॉल बुलाए जाने की बात पता चली, लेकिन पंजीकरण दस्तावेजों में उनका नाम नहीं मिला।
वहीं टीम को काकोरी हॉस्पिटल में न डाक्टर मिले और न ही चिकित्सीय सुविधाएं। सिर्फ दो बेड थे और रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज भी कोई नहीं दिखा सका। निरीक्षण के दौरान हिंद हॉस्पिटल में डिस्प्ले बोर्ड पर आर्थोपैडिक सर्जरी आदि की सुविधाओं का जिक्र था लेकिन डॉक्टर और सुविधाएं नहीं मिलीं। सूचना देने पर भी कोई डॉक्टर नहीं आया। कुल 12 में चार बेड कॉरिडोर में पड़े मिले। पंजीकरण दस्तावेज भी नहीं मिले। नए खुले साधना हॉस्पिटल में पता चला कि उसका पंजीकरण ही नहीं हुआ है, सिर्फ आवेदन किया गया है। फिर भी गंभीर मरीजों को यहां इलाज के लिए भर्ती किया जा रहा था।

जांच में सबकुछ मिला गड़बड़
मड़ियांव से आईआईएम रोड रूट पर डिप्टी कलेक्टर गोविन्द मौर्य व डॉ.आरबी सिंह के नेतृत्व में टीम ने चंद्रा हॉस्पिटल का निरीक्षण किया तो एंबुलेंस फिटनेस सर्टिफिकेट व बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सर्टिफिकेट नहीं मिला। ब्लड बैंक से कोई समन्वय नहीं था। मेडिकल स्टोर के लाइसेंस का नवीनीकरण भी नहीं था। कोविड हेल्प डेस्क, डॉक्टर चेंज रूम और पोस्ट ऑपरेशन रूम भी नहीं थे। वहीं हिम सिटी हॉस्पिटल में इमरजेंसी सुविधाएं नदारद थीं। ड्यूटी पर बीयूएमएस डॉक्टर थे लेकिन सर्जन व आर्थोपैडिक सर्जन एनिस्थरसिया के डॉक्टर नहीं थे। फायर एनओसी व बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सर्टिफिकेट नहीं था। कोविड हेल्प डेस्क, इमरजेंसी यूनिट, प्री व पोस्ट ऑपरेशन रूम भी नहीं था।

कहीं रजिस्ट्रेशन नहीं था, कहीं कुछ और कमी

बीकेटी से सीतापुर रोड पर एसडीएम पल्लवी मिश्रा व डॉ. जेपी सिंह के नेतृत्व में टीम ने 6 अस्पतालों पर छापा मारा जिसमें पारस हॉस्पिटल एवं ट्रॉमा सेंटर, बीकेटी हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, चंद्रिका देवी हॉस्पिटल एवं ट्रॉमा सेंटर, सिंह हॉस्पिटल एवं ट्रॉमा सेंटर, होलीकेयर हॉस्पिटल एवं ट्रॉमा सेंटर, अपेक्स हॉस्पिटल एवं ट्रॉमा सेंटर शामिल हैं। इस दौरान होली केयर हॉस्पिटल में कोई डॉक्टर नहीं मिला। ऑक्सीजन की उपलब्धता के संबंध में भी कोई जानकारी नहीं मिली। अपेक्स हॉस्पिटल एवं ट्रॉमा सेंटर और बीकेटी हॉस्पिटल की रजिस्ट्रेशन की वैद्यता समाप्त मिली। चंद्रिका देवी अस्पताल को छोड़कर अन्य जगह कोविड हेल्प डेस्क संचालित नहीं थी।

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