डीएम बनी छात्रा के सामने फरियादी बने प्रधानाध्यापक, विद्यालय में चारदीवारी बनवाने की लगाई फरियाद 

संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Mon, 26 Oct 2020 09:52 PM IST
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छात्रा मिताली विश्वकर्मा बनी जिलाधिकारी
छात्रा मिताली विश्वकर्मा बनी जिलाधिकारी - फोटो : अमर उजाला

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 कलेक्टे्रट परिसर स्थित जिलाधिकारी कार्यालय में सोमवार को माहौल कुछ बदला-बदला सा नजर आया। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव अपने दफ्तर जरूर पहुंचे, लेकिन उनकी कुर्सी पर जगतपुर विकास क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय रोझइया भीखमशाह में पढने वाली कक्षा आठ की छात्रा मिताली विश्वकर्मा बैठी।
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वजह यह कि मिशन शक्ति के तहत छात्रा को नामित जिलाधिकारी बनाया। छात्रा ने दो घंटे तक डीएम की कुर्सी पर बैठकर आए फरियादियों की समस्याएं सुनीं। फरियादियों की लाइन में ही छात्रा के प्रधानाध्यापक भी लगे थे, जिन्होंने विद्यालय में चारदीवारी बनवाने की फरियाद की।
मिशन शक्ति अभियान के तहत नारी सुरक्षा, नारी सम्मान, नारी स्वावलंबन के प्रति महिलाओं एवं बालिकाओं के मध्य सशक्तिकरण और आत्मविश्वास को जगाने तथा विश्वास का वातावरण बनाने के उददेश्य से कक्षा आठ की छात्रा मिताली विश्वकर्मा को नामित डीएम बनाया गया। डीएम बनी छात्रा ने सुबह 10 से 12 बजे तक जनसुनवाई के दौरान आए हुए लगभग 14 फरियादियों की शिकायतें सुनीं।
इनमें आवास, भूमि विवाद, कोटेदार, पुलिस विभाग, व्यापार आदि से जुड़ी समस्याएं रहीं। शिकायतें सुनने के बाद नामित डीएम ने संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं पुलिस थानों को फोन करके समस्या के त्वरित निस्तारण के लिए नियमानुसार कार्यवाही के निर्देश दिए। छात्रा ने कहा कि उसे नामित जिलाधिकारी बनकर बहुत अच्छा लगा है। वह भविष्य में लगन और मेहनत से पढ़ाई कर आईएएस बनना चाहेगी।

पूरे हनुमान मजरे रामगढ़ टिकरिया की रहने वाली छात्रा मिताली पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, मीना मंच तथा अन्य गतिविधियों में भी काफी सक्रिय रहती है। परिवार में पिता राजेंद्र कुमार, माता विजय लक्ष्मी, भाई मयंक तथा बहन प्रत्यांशी है। जनसुनवाई के दौरान छात्रा के स्कूल के प्रधानाध्यापक दीपक कुमार भी फरियाद लेकर पहुंचे।

उन्होंने बताया कि प्राइमरी स्कूल में 135 तथा जूनियर हाईस्कूल में 195 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन कोई चारदीवारी नहीं है। उन्होंने स्कूल में चारदीवारी बनवाने की मांग की, जिस पर नामित डीएम ने बीएसए को कार्यवाही के निर्देश दिए। मिताली के माता-पिता का कहना है कि यह गौरव का पल है। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि बेटी इस मुकाम तक पहुंचेगी।
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