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Lucknow News: लेखन में गुणवत्ता जरूरी, सोशल मीडिया सिर्फ सहयोगी
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चर्चा करते साहित्यकार।
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के वार्षिक अधिवेशन साहित्य संकल्प के दूसरे दिन साहित्य और कवि सम्मेलन से जुड़े कई मुद्दों पर परिचर्चा हुई। पुस्तक विमोचन के साथ ही कविता पाठ भी हुआ। सोशल मीडिया के दौर में कविता विषयक सत्र में युवा कवि-गीतकार स्वयं श्रीवास्तव ने कहा कि लेखन में गुणवत्ता जरूरी है, सोशल मीडिया सिर्फ सहयोगी की भूमिका निभाता है।
कवयित्रियों के मंचीय संघर्ष विषय पर पूजा यक्ष ने वक्ता नंदिनी श्रीवास्तव, प्रीति पांडेय और शिखा श्रीवास्तव से बात की। इससे पहले सभा संवाद सत्र में डॉ. विष्णु सक्सेना, सर्वेश अस्थाना व गजेंद्र प्रियांशु की उपस्थिति में साहित्य सभा के जिला इकाई के संयोजकों ने वर्ष भर की गतिविधियों से अवगत कराया।
लेखन से प्रकाशन तक सत्र में वार्ताकार अर्जुन सिंह चांद ने नीरज अरोड़ा व नवीन शुक्ल नवीन से लेखकों के पुस्तक प्रकाशन की चुनौतियों पर वार्ता की। अलंकार रस्तोगी की पुस्तक पंडित भया न कोय का विमोचन हुआ। साहित्य तब और अब सत्र में डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि कवि सम्मेलन में बदलाव आया है। डॉ. विष्णु सक्सेना ने कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया से चर्चा पाकर मंच पर आ रहे कवियों को बड़े-छोटे की कोई परवाह नहीं है।
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कवयित्रियों के मंचीय संघर्ष विषय पर पूजा यक्ष ने वक्ता नंदिनी श्रीवास्तव, प्रीति पांडेय और शिखा श्रीवास्तव से बात की। इससे पहले सभा संवाद सत्र में डॉ. विष्णु सक्सेना, सर्वेश अस्थाना व गजेंद्र प्रियांशु की उपस्थिति में साहित्य सभा के जिला इकाई के संयोजकों ने वर्ष भर की गतिविधियों से अवगत कराया।
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लेखन से प्रकाशन तक सत्र में वार्ताकार अर्जुन सिंह चांद ने नीरज अरोड़ा व नवीन शुक्ल नवीन से लेखकों के पुस्तक प्रकाशन की चुनौतियों पर वार्ता की। अलंकार रस्तोगी की पुस्तक पंडित भया न कोय का विमोचन हुआ। साहित्य तब और अब सत्र में डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि कवि सम्मेलन में बदलाव आया है। डॉ. विष्णु सक्सेना ने कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया से चर्चा पाकर मंच पर आ रहे कवियों को बड़े-छोटे की कोई परवाह नहीं है।
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