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विशेष बातचीत: हिंदू राष्ट्र की मांग पर पुष्प राज बोले- धर्मनिरपेक्षता ने कमजोर की नेपाल की सनातन पहचान

Thu, 20 Aug 2026 02:05 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya घनश्याम सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
घनश्याम सिंह, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Thu, 20 Aug 2026 02:05 PM IST
सार

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी धर्म संस्कृति विभाग प्रमुख योगी पुष्प राज पुरुष ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता लागू होने के बाद धर्म परिवर्तन तेजी से बढ़ा है। हिंदू राष्ट्र बहुलवादी सामाजिक संरचना की रक्षा का माध्यम है। अमर उजाला से नेपाल की राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के योगी पुष्प राज की विशेष बातचीत: 

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Pushpa Raj on the demand for a Hindu nation: Secularism has weakened Nepal's Sanatan identity
योगी पुष्प राज पुरुष। - फोटो : amar ujala

विस्तार

नेपाल के राजनीतिक गलियारों और सड़कों पर इन दिनों नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के नेतृत्व में काठमांडो में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। पार्टी का कहना है कि धर्मनिरपेक्षता लागू होने के बाद धर्म परिवर्तन बढ़ा है, जिससे नेपाल की प्राचीन वैदिक सनातन संस्कृति और सामाजिक सद्भाव प्रभावित हुए हैं।

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अमर उजाला से खास बातचीत में राप्रपा के धर्म संस्कृति विभाग प्रमुख योगी पुष्प राज पुरुष ने कहा कि 2008 में लागू धर्मनिरपेक्षता ने नेपाल की सनातन पहचान कमजोर की है। उन्होंने सांविधानिक राजसंस्था की बहाली, संघीय व्यवस्था खत्म करने, भारत-नेपाल के धार्मिक-सांस्कृतिक संबंधों और धर्मांतरण पर पार्टी का रुख स्पष्ट किया।
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सवाल - 2008 में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किए गए नेपाल में ऐसी क्या कमी है, जिसके कारण देश को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं?
जवाब -
सनातन हिंदू का अर्थ किसी एक मूर्ति, पुस्तक या देवता तक सीमित संकीर्ण धर्म नहीं है। यह ॐकार परिवार है, जिसमें बौद्ध, किरात, नाथ, जैन, सिख, शैव और वैष्णव जैसी मौलिक परंपराएं समाहित हैं। 2008 की धर्मनिरपेक्षता ने इस व्यापक पहचान और सभ्यता की नींव को कमजोर किया। हिंदू राष्ट्र बनने पर बौद्ध, किरात, नाथ और वैदिक परंपराओं समेत पूरे ॐकार परिवार का अस्तित्त्व सुरक्षित रहेगा। बाहरी प्रभाव, प्रलोभन, धर्मातरण, देशविरोधी भावना और विकृतियों से समाज की रक्षा होगी। तीर्थस्थलों और मौलिक परंपराओं को बढ़ावा मिलने से धार्मिक पर्यटन के जरिये स्थानीय स्तर पर आर्थिक समृद्धि बढ़ेगी और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
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सवाल - हिंदू राष्ट्र बनने के बाद नेपाल के मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई व अन्य समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा कैसे की जाएगी? 
जवाब -
नेपाल पहले भी हिंदू राष्ट्र था। 2006/07 से पहले की व्यवस्था को राजनीतिक दलों के लोगों ने विदेशी नकल से बिगाड़ा। हिंदू राजा मुस्लिमों को पैसे देकर हज पर भेजने की व्यवस्था करते थे। तब किसी के अधिकार प्रभावित नहीं हुए। नेपाली चाहे किसी भी समुदाय के हों, उनके अधिकारों में कटौती नहीं होगी। नेपाल हिंदू मूल्यों और मान्यताओं से बना देश है। हिंदू राष्ट्र किसी का अपमान करने वाली व्यवस्था नहीं, बल्कि बहुलवादी सोच है। राज्य से मिलने वाले अधिकार सभी को समान रूप से मिलेंगे और सभी को राष्ट्रीय पहचान पर गर्व करना चाहिए।

सवाल - क्या आपकी पार्टी इस विषय पर जनमत संग्रह कराने के लिए तैयार है? यदि जनमत संग्रह में जनता ने हिंदू राष्ट्र के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया तो राप्रपा की धारणा क्या होगी?
जवाब -
जनमत संग्रह की बात भी विदेशी खेल है। पशुपतिनाथ वाले देश, बुद्ध की जन्मभूमि, माता सीता की जन्मभूमि और शालिग्राम की उत्पत्ति वाली भूमि की मूल पहचान पर जनमत संग्रह नहीं होना चाहिए। यह ऐसा है जैसे गांव में चुनाव कराकर पूछा जाए कि ये हमारे माता-पिता हैं या नहीं। अपनी पहचान की घोषणा होनी चाहिए।

सवाल - राजा की भूमिका सांविधानिक संरक्षक तक सीमित होगी या उनके पास वास्तविक राजनीतिक अधिकार भी होंगे? राजगद्दी पर कौन बैठेगा?
जवाब -
हमने सांविधानिक राजसंस्था की बात की है, राजतंत्र की नहीं। राजा के अधिकार संविधान तय करेगा। अगले राजा की घोषणा होने तक राजगद्दी पर ज्ञानेंद्र सरकार ही विराजमान रहेंगे।


सवाल - क्या आपको लगता है कि संघीय व्यवस्था नेपाल की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकी?
जवाब -
संघीयता ने आर्थिक बोझ और प्रशासनिक झंझट बढ़ाने के साथ नेपाली-नेपाली के बीच मनमुटाव भी बढ़ाया है। एक सरकार ही तनाव दे रही हो तो इतने छोटे देश में आठ सरकारों की जरूरत नहीं है। देश की अस्थिरता का असली कारण व्यवस्था है। केवल व्यक्ति बदलने से देश नहीं बनता, सिस्टम बनाना पड़ता है। मौजूदा व्यवस्था इसमें बाधा डालती है और इसमें व्यापक सुधार आवश्यक हैं।

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