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अफसर तो अखिलेश यादव की भी नहीं सुनते
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 06 Feb 2014 07:46 AM IST
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लोकसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ‘जनता-दर्शन’ एक बार फिर गुलजार हुआ।
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मुख्यमंत्री को ‘सिस्टम’ से दुखी फरियादी जनता-दर्शन में बार-बार आने के बावजूद कार्रवाई न होने की शिकायत सुनाते नजर आए।
इनकी शिकायत थी कि जब मुख्यमंत्री के अफसरों की भी जिले के अफसर न सुनें तो वे कहां जाएं? कई लोगों ने इसी तरह के दर्द साझा किए।
फरियाद लेकर पहुंचने वालों में मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ित थे तो लैपटॉप न पाने वाले युवा भी। बीटेक की खाली सीटें भरने में अड़ंगा डालने की चुगली करने कालेज संचालक आए थे तो छात्रवृत्ति की शिकायत लेकर छात्र।
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बार-बार सीएम दरबार में आने के बावजूद काम न होने की शिकायत करने भी काफी फरियादी पहुंचे थे। दंगा पीड़ितों का कहना था कि साफ-साफ सब कुछ दिखने के बावजूद उन्हें मुआवजा नहीं मिल पा रहा।
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कालेज संचालक यह शिकायत करने पहुंचे थे कि बड़ी संख्या में बीटेक की सीटें खाली होने के बावजूद अफसर उसे भरने की कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
प्रदेश के बाहर पढ़ने वाले कई छात्र कह रहे थे कि छात्रवृत्ति आवेदन की कार्रवाई इस तरह हुई कि उन्हें पता ही नहीं चल सका। यह तिथि 31 दिसंबर को खत्म हो चुकी है। छात्र आवेदन तिथि बढ़ाने की मांग करने आए थे।