सहकारी कर्मियों की वेतनवृद्धि व स्थायीकरण पर रोक, कर्मचारियों ने जताया विरोध, आदेश वापस लेने की मांग
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दरअसल, सपा सरकार में सहकारी संस्थागत सेवा मंडल की ओर से वर्ष 2012 से 2017 के बीच जिला सहकारी बैंकों, सहकारी ग्राम्य विकास बैंक और पीसीएफ सहित अन्य संस्थाओं में की गई भर्तियों की एसआईटी जांच अभी चल रही है। इस दौरान भर्ती कर्मियों की वेतनवृद्धि व स्थायी करने पर रोक लगाई गई है।
सहकारी ग्राम्य विकास बैंक कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री मो. आसिफ जमाल ने सहकारी ग्राम्य विकास बैंक के प्रबंध निदेशक और कोऑपरेटिव बैंक स्टॉफ एसोसिएशन के महामंत्री विजय सक्सेना ने अपर मुख्य सचिव सहकारिता तथा आयुक्त सहकारिता को पत्र लिखकर इसे नियमों के विपरीत बताया है।
अभी पूरी नहीं हुई है जांच
उन्होंने लिखा है कि असंतुष्ट होने पर कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि एक वर्ष बढ़ाई जा सकती है, पर वार्षिक वेतनवृद्धि और स्थायीकरण पर रोक नहीं लगाई जा सकती। उन्होंने आदेश को वापस लेने की मांग की है। दोनों संगठनों ने तर्क दिया है कि वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक लगाना सहकारी सेवा नियमावली 1975 के नियम 84 (1) बी के अंतर्गत वृहद दंड है।
अभी जांच पूरी नहीं हुई है और यह भी नहीं तय हुआ कि किसकी नियुक्ति गलत तरीके से की गई है, तब इस तरह का दंड अनुचित तथा प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है। दोनों संगठनों ने दावा किया कि वेतनवृद्धि और स्थायीकरण पर रोक लगाने का आदेश प्रबंध निदेशकों की तरफ से दिया जा रहा है। सरकार ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है।