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साहित्य और सृजन सेवियों का हुआ सम्मान
आशुतोष मिश्रा /अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 11 Jul 2014 10:19 AM IST
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साहित्यअनुरागियों के सम्मान और उनके व्याख्यानों की एक शाम बृहस्पतिवार को नगर में सजी।
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गोमतीनगर सीएमएस आडिटोरियम में हुये ‘श्रीकृष्णप्रताप सिंह स्मृति अध्यात्म चितन व्याख्यानमाला’ दशम पुष्प में नगर के तमाम विद्वान चिंतक जुटे।
अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों के नौ मनीषियों, स्वतंत्रता सेनानी, पर्यावरण विदों को सम्मानित किया गया। समारोह में 4 कृतियों का विमोचन भी हुआ।
आयोजन श्रीमां प्रभुदेवी विद्या मंदिर प्रतिष्ठान, संचित स्मृति न्यास और योसा की ओर से संयुक्त रूप से हुआ। शुरुआत संचित स्मृति न्यास के संस्थापक डा. शरद नागर के चित्र पर माल्यार्पण से हुई।
समाराह के अतिथियों महापौर डा. दिनेश शर्मा, भइया जी ने विभिन्न क्षेत्रों के मनीषियों, स्वतंत्रता सेनानी, पर्यावरण विदों को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और तुलसी पौध दकर सम्मानित किया।
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महापौर डा. दिनेश शर्मा ने डा. विद्याबिंदु की कृति जंगनामा के विमोचन मौकेपर कहा कि पुस्तकों का लेखन कठिन काम है, लेकिन उसकी जानकारी जुटाना उससे भी ज्यादा कठिन काम है।
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विदेशी लेखकों ने भी लिखा, लेकिन यहां के लेखकों ने जमीनी जानकारी लिखी। मुख्य वक्ता प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने संत साहित्य में आधुनिकता के तत्वों पर बातें रखीं।
पुस्तकों का हुआ लोकार्पण
अवसर पर डा. विद्याबिंदु सिंह की कृति लघु कथा संग्रह ‘सड़क पर उगते बच्चे’, अवधी लोकसाहित्य में ‘प्रकृति पूजा’, ‘जंगनामा’ और 2014 की स्मारिका ‘संत विवेक’ का विमोचन अतिथियों ने किया।