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Lucknow News: लविवि को आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाने वाले प्रोफेसर सोढ़ा नहीं रहे
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय को स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के दम पर आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाने वाले पूर्व कुलपति प्रो. महेंद्र सिंह सोढ़ा का शनिवार को निधन हो गया है। वे 92 वर्ष के थे। लविवि के साथ ही प्रो. सोढ़ा इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय और भोपाल के बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के भी कुलपति रहे थे।
वर्ष 1932 में जन्मे प्रो. महेंद्र सिंह सोढ़ा को प्लाज्मा भौतिकी सिद्धांत के लिए भी जाना जाता है। विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 1974 में उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार और 2003 में पद्मश्री से नवाजा गया। वर्ष 1992 में कुलपति के रूप में उन्होंने लखनऊ विवि की कमान संभाली।
लविवि को आर्थिक तंगहाली से निकालने के लिए प्रो. सोढ़ा ने लविवि में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की शुरुआत की थी। इससे पहले लविवि में सिर्फ रेग्युलर कोर्स ही चलते थे। उनकी पहल का ही नतीजा है कि आज लविवि के इंजीनियरिंग संकाय और एलएलबी ऑनर्स से आई फीस से वेतन का एक बड़ा हिस्सा जुटाया जाता है। प्रो. सोढ़ा के निधन पर लविवि के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय के साथ ही सभी शिक्षकों ने दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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वर्ष 1932 में जन्मे प्रो. महेंद्र सिंह सोढ़ा को प्लाज्मा भौतिकी सिद्धांत के लिए भी जाना जाता है। विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 1974 में उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार और 2003 में पद्मश्री से नवाजा गया। वर्ष 1992 में कुलपति के रूप में उन्होंने लखनऊ विवि की कमान संभाली।
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लविवि को आर्थिक तंगहाली से निकालने के लिए प्रो. सोढ़ा ने लविवि में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की शुरुआत की थी। इससे पहले लविवि में सिर्फ रेग्युलर कोर्स ही चलते थे। उनकी पहल का ही नतीजा है कि आज लविवि के इंजीनियरिंग संकाय और एलएलबी ऑनर्स से आई फीस से वेतन का एक बड़ा हिस्सा जुटाया जाता है। प्रो. सोढ़ा के निधन पर लविवि के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय के साथ ही सभी शिक्षकों ने दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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