आयुष्मान में ‘खेल’ पर कसेगी नकेल, भारी भरकम फीस लेकर इलाज कर रहे निजी अस्पताल
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केस 1 : काकोरी निवासी राधे मोहन (50) को डेंगू हो गया था। वह हरदोई रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती हो गए। आयुष्मान कार्ड दिया। अस्पताल के कर्मचारियों ने पंजीयन किया, लेकिन आयुष्मान मुख्यालय से स्वीकृति नहीं मिलने की बात बताई। करीब छह दिन में 80 हजार रुपये जमा कराए। मरीज के डिस्चार्ज होने पर कार्ड थमाया और बताया कि योजना में स्वीकृति नहीं मिली।
केस 2 : मोहनलालगंज निवासी राजवती (71) को परिजनों ने एसजीपीजीआई के पास स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां पहले आयुष्मान में इलाज कराने की बात कही गई। पहले दिन 20 हजार रुपये जमा कराए गए, दूसरे दिन 10 हजार। तीन दिन बाद बताया गया कि अभी तक आयुष्मान में अस्पताल का पंजीयन नहीं हो पाया है। इसलिए योजना में इलाज नहीं होगा।
राजधानी के कई अस्पताल आयुष्मान योजना के लाभार्थियों के इलाज में ‘खेल’ कर रहे हैं। आयुष्मान का कार्ड लेकर पहले पंजीयन करते हैं। फिर नोडल सेंटर से स्वीकृति मिलने में देरी का बहाना बनाते हैं। इस दौरान मरीज से इलाज और जांच के नाम पर रुपये वसूलते रहते हैं। मरीज के डिस्चार्ज होने पर उसे आयुष्मान का लाभार्थी दिखाकर योजना के तहत भी पैसा वसूल लेते हैं। सीएमओ का कहना है कि ऐसे मामलों की जांच कराने की योजना बनाई गई है।
सीएमओ ने बनाया आंतरिक जांच दस्ता
आयुष्मान योजना में कार्ड धारक के लिए काफी सरल व्यवस्था बनाई गई है। योजना में पंजीकृत निजी अस्पताल में जाने के बाद कार्ड और परिचय पत्र देकर पंजीयन कराया जाता है। पंजीयन के बाद आयुष्मान मुख्यालय से स्वीकृति में देरी हो तो भी मरीज से रुपये नहीं ले सकते।
पांच दिन तक मरीज को भर्ती करने के बाद भी अस्पताल आयुष्मान में पंजीयन कर सकते हैं। इसके बाद भी ज्यादातर निजी अस्पताल आयुष्मान के मरीज से तत्काल वसूली करने लगते हैं। एक तरह से निजी अस्पताल आयुष्मान कार्ड धारकों से दोहरी कमाई कर रहे हैं। विभिन्न अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारी खुद इस खेल का खुलासा करते हैं।
अभी तक सीएमओ कार्यालय सूचना न होने की दुहाई देकर चुप हो जाता रहा है, लेकिन एक के बाद एक आ रहे मामलों को देखते हुए सीएमओ ने आंतरिक जांच दस्ता बनाया है। यह टीम अलग-अलग इलाके के अस्पतालों में जाकर मरीजों की स्थिति की जांच करेगी।
लाभार्थी से किसी भी सूरत में नहीं ले सकते रुपये
सीएमओ लखनऊ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि आयुष्मान योजना कार्ड धारक से चिकित्सालय किसी भी कीमत पर रुपये नहीं ले सकते हैं। यदि किसी चिकित्सालय ने रुपये लिए हैं तो उसकी लिखित शिकायत दें। जांच कराकर तीन गुना जुर्माना लगाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर भी एक टीम बनाकर ऐसे मामलों की जांच करा रहा है। इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अमर उजाला ने एक अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य योजना में आ रही समस्याओं को सामने लाना और उसके निराकरण की दिशा में काम करना है, जिससे लाभार्थियों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। यदि आपकी कोई शिकायत, सुझाव हों तो हमें बताएं।
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