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आयुष्मान योजना के मरीजों से वसूली के बहाने ढूंढ रहे निजी अस्पताल, जांच के लिए मांग रहे शुल्क
Thu, 26 Sep 2019 05:57 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: Amulya Rastogi
Updated Thu, 26 Sep 2019 05:57 PM IST
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ayushman yojna
- फोटो : amar ujala
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कई निजी अस्पतालों में आयुष्मान मरीजों से रुपये लेने के मामले सामने आ रहे हैं। वे सर्जरी से पहले जांच में होने वाले खर्च का भुगतान मरीजों से करा रहे हैं, जबकि इस खर्च को भी पैकेज में शामिल करने का प्रावधान है। वहीं ऐसे भी मामले सामने आ रहे हैं, जहां शाम चार बजे के बाद आयुष्मान मरीजों का पंजीकरण ही नहीं कर रहे हैं।
आयुष्मान योजना में यह भी प्रावधान है कि कहीं जाते वक्त अचानक तबीयत खराब हो गई और तत्काल जेब में कार्ड नहीं है तब भी योजना का लाभ मिल सकता है। बशर्ते बाद में तीमारदार कार्ड उपलब्ध करा दें। योजना में पांच दिन बाद भी आयुष्मान मुख्यालय को रिपोर्ट भेजे जाने का विकल्प है।
इस दौरान होने वाले खर्च की बिलिंग भी अस्पताल कर सकते हैं। इसके पीछे तर्क है कि मरीज की अचानक तबीयत खराब होने पर वह कार्ड लेकर अस्पताल में नहीं पहुंचता है। दूसरा तर्क यह है कि जब तक मर्ज के संबंध में डायग्नोसिस तैयार नहीं होती है तब तक सर्जरी प्लान नहीं की जा सकती है।
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ऐसी स्थिति में सर्जरी प्लान करने के बाद डायग्नोसिस में होने वाले खर्च को भी पैकेज में शामिल किया जा सकता है। इसके बाद भी निजी अस्पताल शुरुआती जांच के नाम पर शुल्क वसूल रहे हैं।
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आयुष्मान योजना में यह भी प्रावधान है कि कहीं जाते वक्त अचानक तबीयत खराब हो गई और तत्काल जेब में कार्ड नहीं है तब भी योजना का लाभ मिल सकता है। बशर्ते बाद में तीमारदार कार्ड उपलब्ध करा दें। योजना में पांच दिन बाद भी आयुष्मान मुख्यालय को रिपोर्ट भेजे जाने का विकल्प है।
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इस दौरान होने वाले खर्च की बिलिंग भी अस्पताल कर सकते हैं। इसके पीछे तर्क है कि मरीज की अचानक तबीयत खराब होने पर वह कार्ड लेकर अस्पताल में नहीं पहुंचता है। दूसरा तर्क यह है कि जब तक मर्ज के संबंध में डायग्नोसिस तैयार नहीं होती है तब तक सर्जरी प्लान नहीं की जा सकती है।
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ऐसी स्थिति में सर्जरी प्लान करने के बाद डायग्नोसिस में होने वाले खर्च को भी पैकेज में शामिल किया जा सकता है। इसके बाद भी निजी अस्पताल शुरुआती जांच के नाम पर शुल्क वसूल रहे हैं।
जमा करा लिये जांच के पैसे
मलिहाबाद निवासी राहुल के पैर में फैक्चर हो गया। उनके पास आयुष्मान का कार्ड है। परिवारीजन उन्हें लेकर हरदोई रोड स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज में गए। जहां एक्स-रे व अन्य जांच के रुपये जमा कराए गए। बताया गया कि जब तक ऑपरेशन तय नहीं हो जाता है तब तक खर्चा उठाना पड़ेगा।
शाम चार बजे के बाद मुफ्त इलाज नहीं
मवइया के पास सैनिक कॉलोनी निवासी जयशंकर मंगलवार रात सड़क हादसे में घायल हो गए। परिवारीजन उन्हें पास के निजी अस्पताल गए। यह अस्पताल आयुष्मान में पंजीकृत है। आरोप है कि वहां बताया गया कि आयुष्मान में पंजीयन सुबह 10 बजे से चार बजे तक होता है। इसलिए इस वक्त रुपये जमा करने होंगे। सुबह 10 बजे के बाद पंजीयन हो जाएगा, फिर रुपये नहीं लगेंगे।
आयुष्मान मरीज से नहीं ले सकते रुपये
अब तक ऐसी कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। सभी अस्पतालों को गाइडलाइन से अवगत कराया गया है। आयुष्मान का मरीज है तो उससे इलाज के नाम पर रुपये नहीं लिए जा सकते हैं। पंजीकृत सभी अस्पतालों को दोबारा निर्देश भेजवाया जाएगा। - डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
शाम चार बजे के बाद मुफ्त इलाज नहीं
मवइया के पास सैनिक कॉलोनी निवासी जयशंकर मंगलवार रात सड़क हादसे में घायल हो गए। परिवारीजन उन्हें पास के निजी अस्पताल गए। यह अस्पताल आयुष्मान में पंजीकृत है। आरोप है कि वहां बताया गया कि आयुष्मान में पंजीयन सुबह 10 बजे से चार बजे तक होता है। इसलिए इस वक्त रुपये जमा करने होंगे। सुबह 10 बजे के बाद पंजीयन हो जाएगा, फिर रुपये नहीं लगेंगे।
आयुष्मान मरीज से नहीं ले सकते रुपये
अब तक ऐसी कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। सभी अस्पतालों को गाइडलाइन से अवगत कराया गया है। आयुष्मान का मरीज है तो उससे इलाज के नाम पर रुपये नहीं लिए जा सकते हैं। पंजीकृत सभी अस्पतालों को दोबारा निर्देश भेजवाया जाएगा। - डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
रिम्बर्समेंट का भी है विकल्प
केजीएमयू में आयुष्मान मरीज से रुपये नहीं लिए जाते। यदि पहले किसी ने रुपये जमा कर दिए हैं तो बाद में कार्ड उपलब्ध कराया तो उन्हें रिम्बर्समेंट दिलाया जाता है। डायग्नोसिस के बाद ही तय होता है कि सर्जरी में कितना खर्च आएगा। यही वजह है कि डायग्नोसिस के बाद ही पैकेज स्वीकृति का आवेदन मुख्यालय भेजा जाता है।
-प्रो. एसएन शंखवार, सीएमएस केजीएमयू
कार्ड भूल गए तभी मिलता है लाभ
कोई मरीज कार्ड लाना भूल गया है तो भी उसका इलाज शुरू कर दिया जाता है। जांच होने के बाद ही मर्ज का पता चलता है। इस दौरान होने वाले खर्च को बाद में आयुष्मान योजना में शामिल करने का प्रावधान है। सिविल और लोहिया संयुक्त अस्पताल में ऐसे केस रोज आ रहे हैं। उनसे रुपये नहीं लिए जाते हैं।
- डॉ. डीएस नेगी, निदेशक लोहिया व सिविल अस्पताल
शिकायत या सुझाव हो तो हमें बताएं
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत चयनित परिवार के सदस्यों को पांच लाख रुपये तक का इलाज किया जाता है। हालांकि लाभार्थियों को मुफ्त इलाज के लिए अब भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए अमर उजाला ने योजना में आ रही समस्याओं को सामने लाने और उसके निराकरण की दिशा में काम करने के लिए एक अभियान शुरू किया है ताकि लाभार्थियों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। आपकी कोई शिकायत, सुझाव हो तो हमें बताएं।
व्हाट्सअप 8859108092
मेल - chandrab@knp.amarujala.com
-प्रो. एसएन शंखवार, सीएमएस केजीएमयू
कार्ड भूल गए तभी मिलता है लाभ
कोई मरीज कार्ड लाना भूल गया है तो भी उसका इलाज शुरू कर दिया जाता है। जांच होने के बाद ही मर्ज का पता चलता है। इस दौरान होने वाले खर्च को बाद में आयुष्मान योजना में शामिल करने का प्रावधान है। सिविल और लोहिया संयुक्त अस्पताल में ऐसे केस रोज आ रहे हैं। उनसे रुपये नहीं लिए जाते हैं।
- डॉ. डीएस नेगी, निदेशक लोहिया व सिविल अस्पताल
शिकायत या सुझाव हो तो हमें बताएं
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत चयनित परिवार के सदस्यों को पांच लाख रुपये तक का इलाज किया जाता है। हालांकि लाभार्थियों को मुफ्त इलाज के लिए अब भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए अमर उजाला ने योजना में आ रही समस्याओं को सामने लाने और उसके निराकरण की दिशा में काम करने के लिए एक अभियान शुरू किया है ताकि लाभार्थियों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। आपकी कोई शिकायत, सुझाव हो तो हमें बताएं।
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