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एलडीए भूला 70 एकड़ जमीन, निजी बिल्डर्स ने बेच दिए भूखंड
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एलडीए भूला 70 एकड़ जमीन, निजी बिल्डर्स ने बेच दिए भूखंड
गोमतीनगर विस्तार के सेक्टर-7 में एलडीए अपनी बेशकीमती 70 एकड़ जमीन ही भूल गया। मौका देखकर निजी बिल्डर्स ने भूखंड भी काट दिए।
भूखंड बेचने के साथ कॉम्प्लेक्स और मकान भी बनाकर बेचे जा रहे हैं। अब कई वर्षों के बाद एलडीए ने यहां अपनी जमीनों की पैमाइश शुरू की है।
एलडीए वीसी अभिषेक प्रकाश के आदेश पर एलडीए ने बुधवार को जमीनों की पैमाइश शुरू की। वीसी ने एसडीएम सदर व मोहनलालगंज को भी एलडीए के तहसीलदार के साथ जांच में लगाया है।
नदी किनारे की जमीन को खासतौर पर चिह्नित किया जा रहा है, जिससे निजी बिल्डर्स के कब्जे से जमीनें खाली कराई जा सकें।
दीपावली के बाद यहां एलडीए अभियान चलाकर अपनी जमीनों को खाली कराएगा। पुलिस भवन के आसपास सबसे अधिक जमीनें एलडीए की बताई जा रही हैं।
नजूल अधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि जमीनें 70 एकड़ से अधिक भी हो सकती हैं। सही आंकड़ा पैमाइश के बाद ही सामने आएगा।
जमीनों के चिन्हांकन की दिक्कत दो गांवों के गाटा और नदी के बहाव में बदलाव के चलते आई है। ये जमीनें मलेशेमऊ और सरसवां के बीच हैं।
नदी का बहाव शिफ्ट होने के चलते कुछ जमीन हमारी सरसवां से मलेशेमऊ में चली गई। इसे भी देखकर चिह्नित कर कब्जा लिया जाएगा। यह सभी जमीनें अर्जित हैं। अधिकांश का मुआवजा भी एलडीए दे चुका है।
400 करोड़ रुपये से अधिक कीमत
एलडीए की सेक्टर-7 में अधिकांश जमीनें संस्थागत या व्यावसायिक हैं। यहां जमीनों की कीमतें आज के समय में बहुत अधिक हैं। इस जमीन की कीमत करीब 400 करोड़ रुपये से अधिक मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि एलडीए इन जमीनों को खाली करा पाता है कि नहीं।
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गोमतीनगर विस्तार के सेक्टर-7 में एलडीए अपनी बेशकीमती 70 एकड़ जमीन ही भूल गया। मौका देखकर निजी बिल्डर्स ने भूखंड भी काट दिए।
भूखंड बेचने के साथ कॉम्प्लेक्स और मकान भी बनाकर बेचे जा रहे हैं। अब कई वर्षों के बाद एलडीए ने यहां अपनी जमीनों की पैमाइश शुरू की है।
एलडीए वीसी अभिषेक प्रकाश के आदेश पर एलडीए ने बुधवार को जमीनों की पैमाइश शुरू की। वीसी ने एसडीएम सदर व मोहनलालगंज को भी एलडीए के तहसीलदार के साथ जांच में लगाया है।
नदी किनारे की जमीन को खासतौर पर चिह्नित किया जा रहा है, जिससे निजी बिल्डर्स के कब्जे से जमीनें खाली कराई जा सकें।
दीपावली के बाद यहां एलडीए अभियान चलाकर अपनी जमीनों को खाली कराएगा। पुलिस भवन के आसपास सबसे अधिक जमीनें एलडीए की बताई जा रही हैं।
नजूल अधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि जमीनें 70 एकड़ से अधिक भी हो सकती हैं। सही आंकड़ा पैमाइश के बाद ही सामने आएगा।
जमीनों के चिन्हांकन की दिक्कत दो गांवों के गाटा और नदी के बहाव में बदलाव के चलते आई है। ये जमीनें मलेशेमऊ और सरसवां के बीच हैं।
नदी का बहाव शिफ्ट होने के चलते कुछ जमीन हमारी सरसवां से मलेशेमऊ में चली गई। इसे भी देखकर चिह्नित कर कब्जा लिया जाएगा। यह सभी जमीनें अर्जित हैं। अधिकांश का मुआवजा भी एलडीए दे चुका है।
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400 करोड़ रुपये से अधिक कीमत
एलडीए की सेक्टर-7 में अधिकांश जमीनें संस्थागत या व्यावसायिक हैं। यहां जमीनों की कीमतें आज के समय में बहुत अधिक हैं। इस जमीन की कीमत करीब 400 करोड़ रुपये से अधिक मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि एलडीए इन जमीनों को खाली करा पाता है कि नहीं।
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