यूपी ने जेलमंत्री ने 121 साल पुराना मैनुअल बदलकर कैदियों की दी बड़ी राहत
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जेल में कैदी अब अपने करीबी लोगों से हफ्ते में चार दिन मुलाकात कर सकेंगे। मुलाकात का समय भी दो घंटे से बढ़ाकर चार घंटे कर दिया गया है। जेल मंत्री ने 121 साल पुराने जेल मैनुअल में संशोधन कराने के साथ पैरोल में आने वाली दिक्कतें दूर कराई हैं।
पैरोल की अर्जी पर दो हफ्ते में डीएम-एसपी की रिपोर्ट न आने पर उनकी संस्तुति स्वत: मान ली जाएगी और कैदी को पैरोल पर भेज दिया जाएगा।
जेल मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने बताया कि जेल यातना गृह नहीं, बल्कि बंदी सुधार गृह हैं। अंग्रेजों के जमाने के कानून के चलते बंदियों से मुलाकात, किसी की मौत पर उसके अंतिम संस्कार में जाने में बाधाएं व अन्य तमाम खामियां हैं।
इसे दूर करने की कोशिश जारी है। इसी क्रम में कैदियों से हफ्ते में दो मुलाकात को बढ़ाकर चार दिन किया गया है और मुलाकात का समय भी दो घंटे से बढ़ाकर चार घंटे कर दिया गया है। इससे एक हफ्ते में बंदी अपने करीबियों के साथ 16 घंटे गुजार सकेगा। इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है।
जल्द दूर होंगी पैरोल की दिक्कतें
जेल मंत्री ने बताया कि बंदियों की पैरोल की अर्जी कई दिन तक डीएम-एसपी के यहां लंबित रहने की शिकायतें मिली थी। इससे बंदी अपने घर में किसी कार्यक्रम या अन्य जरूरत के मौके पर नहीं पहुंच पाता था।
अब पैरोल की अर्जी पर संबंधित डीएम-एसपी को दो हफ्ते में अपनी रिपोर्ट भेजनी होगी, वरना पैरोल पर उनकी स्वत: संस्तुति मान ली जाएगी और जेल अधीक्षक द्वारा सुरक्षा का इंतजाम कराकर बंदी को पैरोल पर रवाना कर दिया जाएगा।
माता-पिता, भाई-बहन, बेटा-बेटी या पत्नी की मौत पर बंदी को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए 72 घंटे के पैरोल का प्रावधान है, लेकिन कागजी खानापूरी में खासा वक्त लगने से बंदी खून के रिश्ते वाले व्यक्ति के अंतिम दर्शन या अंत्येष्टि से वंचित रह जाते हैं।
जेल मंत्री ने बताया कि सगे-संबंधी की मौत पर पांच दिन की पैरोल का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। पैरोल का अधिकार जेल अधीक्षक को दिया जाएगा।