सपा शासन में उपकार में नियुक्त किए गए 19 कार्मिक बर्खास्त, कृषि मंत्री बोले- नियमों की अनदेखी कर दी गईं थीं नौकरियां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उपकार के महानिदेशक डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया कि परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ. राजेंद्र कुमार ने 2014-15 में 25 रिक्त पद विज्ञापित कर 23 पदों पर नियुक्तियां की थीं। पूर्व महानिदेशक व अन्य कार्मिकों के विरुद्ध मिली गंभीर 17 शिकायतों की जांच के लिए शासन ने तत्कालीन प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग हेमंत राव को जांच अधिकारी नियुक्त किया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर इन 23 नियुक्तियों में से वर्तमान में कार्यरत 19 कार्मिकों की चयन प्रक्रिया और नियुक्ति निरस्त कर दी गई है। महानिदेशक ने बताया कि कुछ लोगों को बेजा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से 8 पोस्ट डॉक्टोरल फेलो (पीडीएफ) की नियुक्तियां की गईं।
पीडीएफ की नियुक्ति परियोजना पद्धति पर आधारित होनी चाहिए और इसका ही अनुमोदन उपकार की प्रबंध समिति ने दिया था। लेकिन, परियोजना पद्धति के विपरीत पीडीएफ की नियुक्तियां की गईं। इस प्रकार उपकार पर अनावश्यक रूप से वित्तीय भार डाला गया। इतना ही नहीं बाद में इन्हीं पीडीएफ में से 5 लोगों को अनियमितता बरतते हुए नियमित नियुक्ति दे दी गई।
खास लोगों के चयन के लिए बड़ी गड़बड़ियां
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि पूर्व सरकार ने नियुक्तियों में अनियमितता, भाई-भतीजावाद और भ्रष्ट तरीके अपनाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस नीति के तहत वर्तमान सरकार ने उपकार के पूर्व महानिदेशक डॉ. राजेंद्र कुमार, पूर्व महानिदेशक, उपकार व अन्य के विरुद्ध शिकायतों की जांच कराई गई।
जांच रिपोर्ट से स्पष्ट है कि डॉ. राजेंद्र कुमार के कार्यकाल में उपकार में विभिन्न संवर्ग के 25 पदों पर नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया में नियमों एवं शासनादेशों का स्पष्ट उल्लंघन किया गया। कृषि मंत्री ने बताया कि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए मनमाने तरीके अपनाए गए। इस प्रकार चयन प्रक्रिया दोषपूर्ण पाई गई।
कृषि मंत्री ने कहा कि कार्मिक अधिकारी, आशुलिपिक, कनिष्ठ सहायक, अभिलेख सहायक-कम- लाइब्रेरियन, तकनीकी सहायक, तकनीकी सचिव और वैज्ञानिक अधिकारियों के पदों पर की गईं नियुक्तियों में कुछ व्यक्तियों का चयन किए जाने के उद्देश्य से मात्र चयन की औपचारिकताएं पूरी की गईं।
इसके लिए पदों की अर्हता बदलने के साथ-साथ लिखित परीक्षा की मूल कापियां बदलना, निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त आवेदन पत्रों को ग्रहण करना, कुछ लोगों को अनियमित रूप से अधिकतम आयु सीमा में छूट दिया जाना, कनिष्ठ सहायक के पद के लिए प्राप्त आवेदन पत्र को बाद में बदलकर आशुलिपिक के पद पर चयन किया गया।
इसके साथ ही संपूर्ण चयन प्रक्रिया एक ही दिन में पूरी कराई गई। एक ही दिन में परिणाम तैयार कर दूरस्थ जिलों में रहने वाले कार्मिकों को भी उसी दिन चिकित्सा व स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और अन्य वांछित अभिलेखों के बिना ही कार्यभार ग्रहण करा दिया गया। इतना ही नहीं चयनित अभ्यर्थियों में से जाति विशेष के और उपकार में ही कार्यरत कार्मिकों के नजदीकी संबंधियों को नौकरी दी गई।
इन्हें किया गया बर्खास्त
पूर्व महानिदेशक को दिया जाएगा आरोप पत्र
कृषि मंत्री ने बताया कि डॉ. राजेंद्र कुमार ने महानिदेशक, उपकार के पद पर अपनी नियुक्ति के समय भी शासन को गुमराह किया और अर्ह न होने के कारण अपने मूल विभाग से आवेदन पत्र अग्रसारित नहीं कराया। डॉ. राजेंद्र कुमार ने मूल विभाग से विधिवत अनुमति लिए बिना ही उपकार में महानिदेशक के पद पर कार्यभार ग्रहण कर लिया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर उक्त पदों के नियुक्ति प्राधिकारी तत्कालीन महानिदेशक डॉ. राजेंद्र कुमार को दिये जाने के लिए आरोपपत्र शासन को उपलब्ध करा दिया गया है। साथ ही नियुक्त प्रक्रिया में किसी न किसी रूप में शामिल परिषद के 10 कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है।