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राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, बाबा साहब की स्नेह भूमि है लखनऊ, उन्होंने धर्म से ज्यादा भारतीयता पर दिया जोर

Tue, 29 Jun 2021 10:04 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 29 Jun 2021 10:04 PM IST
सार

यूपी दौरे के अंतिम दिन राष्ट्रपति ने मंगलवार को लोक भवन के सभागार में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र का शिलान्यास किया।

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President Kovind said, Lucknow is the land of affection of Baba Saheb, he emphasized on Indianness more than religion
राष्ट्रपति को राज्यपाल और मुख्यमंत्री योगी अमौसी एयरपोर्ट पर विदा करते हुए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि आजादी के लड़ाई के समय भी देश में हिन्दू-मुस्लिम वैमनस्यता थी। उस समय बहुत से लोग कहते थे कि पहले हम भारतीय हैं, उसके बाद हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई। लेकिन बाबा साहब की सोच इससे ऊपर थी। वह कहते थे कि हम पहले भारतीय हैं, बाद में भारतीय और अंत में भी भारतीय। अपने यूपी दौरे के अंतिम दिन राष्ट्रपति ने मंगलवार को यहां लोक भवन के सभागार में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र का शिलान्यास किया। मौके पर उन्होंने कहा कि बाबा साहब चाहते थे कि समानता के मूल अधिकार को संपत्ति के उत्तराधिकार तथा विवाह एवं जीवन के अन्य पक्षों से जुड़े मुद्दों को भी एक अलग विधेयक द्वारा स्पष्ट कानूनी अधिकार दिया जाए। आज उनके द्वारा सुझाए गए रास्ते पर ही हमारी विधि व्यवस्था आगे बढ़ रही है। इससे स्पष्ट होता है कि बाबा साहब की सोच अपने समय से भी आगे की थी।

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बाबा साहब की स्नेह भूमि है लखनऊ
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि लखनऊ शहर से बाबा साहब का खास संबंध रहा है। इसके कारण ही लखनऊ को बाबा साहब की ‘स्नेह भूमि’ कहा जाता है। बाबा साहब के लिए गुरु समान बोधानंद और उन्हें दीक्षा प्रदान करने वाले भदंत प्रज्ञानंद दोनों का निवास लखनऊ में ही था।
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राष्ट्रपति ने बताया कि दिसंबर 2017 में भदंत प्रज्ञानंद की पुण्यस्थली पर जाकर उनकी स्मृतियों को सादर नमन किया था। कहा कि, बाबा साहब की स्मृतियों से जुड़े सभी स्थल भारतवासियों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। भारत सरकार ने दिसंबर 2017 से दिल्ली में डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर की स्थापना कर देश-विदेश में बाबा साहब के विचारों के प्रचार-प्रसार का एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया है।
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राजधानी में आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र का शिलान्यास करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बाबा साहब के जीवन मूल्यों और आदर्शों के अनुरूप समाज एवं राष्ट्र का निर्माण करने में ही हमारी वास्तविक सफ लता है। इस दिशा में देश ने प्रगति की है, लेकिन हमें अभी और आगे जाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि बाबा साहब के आदर्शों पर आगे चलते हुए समता, समरसता, सामाजिक न्याय पर आधारित सशक्त और समृद्ध भारत के निर्माण में सफल होंगे।

योगी सरकार की सराहना
कोविंद ने कहा बाबा साहब के स्मारक के रूप में सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण करने की योगी सरकार की पहल सराहनीय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रस्तावित शोध केंद्र बाबा साहब की गरिमा के अनुरूप उच्च स्तरीय शोध कार्य कर शोध जगत में अपनी विशेष पहचान बनाएगा। उन्हाेंने भरोसा जताया कि यह सांस्कृतिक केंद्र सभी देशवासियों, विशेष कर युवा पीढ़ी को बाबा साहब के आदर्शों एवं उद्देश्यों से परिचित कराने में अपनी प्रभावी भूमिका निभाएगा।

धर्म व शिक्षा के क्षेत्र में आंबेडकर का अमूल्य योगदान
राष्ट्रपति ने कहा कि संस्कृति, धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में भी बाबा साहब ने अमूल्य योगदान दिया है। बैंकिंग, इरिगेशन, इलेक्ट्रिसिटी सिस्टम, लेबर मैनेजमेंट सिस्टम, रेवेन्यू शेयरिंग सिस्टम, शिक्षा व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में डॉ. आंबेडकर के योगदान की छाप है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब के जीवन मूल्यों में नैतिकता, समता, आत्मसम्मान और भारतीयता दिखाई देती है। वर्ष 2016 में 100 से भी अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र संघ में हुए बाबा साहब डॉ. आंबेडकर की 125वीं जयंती समारोह में भागीदारी करते हुए मानवता के समग्र विकास में उनके बहुमूल्य योगदान को सराहा था। राष्ट्रपति ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने भगवान बुद्ध के विचारों को प्रसारित किया।

आधुनिक भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका के पक्षधर थे
कोविंद ने कहा कि बाबा साहब आधुनिक भारत के निर्माण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका के पक्षधर थे। वे महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए सदैव सक्रिय रहे। संविधान में उन्होंने शुरुआत से ही मताधिकार समेत प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं को समान अधिकार प्रदान किए हैं। विश्व के अन्य प्रमुख लोकतांत्रिक देशों में यह समानता महिलाओं को लंबे समय के बाद ही मिल पाई थी।

राज्यपाल व सीएम ने एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति को दी विदाई
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद राजधानी में दो दिन के प्रवास के बाद मंगलवार शाम दिल्ली लौट गए। अमौसी एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें विदाई दी। दिल्ली रवाना होने से पहले राष्ट्रपति ने मुख्यंमत्री को अपने भाषणों के संकलन की पुस्तक ‘लोकतंत्र के स्वर’ भेंट की। राष्ट्रपति के साथ राजभवन के जूडो का प्रशिक्षण प्राप्त बच्चों की ग्रुप फोटो भी लिया गया।

सात साल में बाबा साहब की स्मृतियों को जीवंत किया : योगी

President Kovind said, Lucknow is the land of affection of Baba Saheb, he emphasized on Indianness more than religion
लखनऊ में लोकभवन में डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र के शिलान्यास कार्यक्रम में राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा व मार्गदर्शन में बीते सात सालों में देश में बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की स्मृतियों को जीवंत बनाया गया है। इसी कड़ी में लखनऊ में डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक और सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। प्रयास किया जाएगा कि केंद्र का समयबद्ध निर्माण कर जल्द उद्घाटन किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में वंचितों, दलितों, उपेक्षितों तथा अंतिम पायदान के व्यक्ति के उत्थान की बात होगी तो डॉ. आंबेडकर का नाम श्रद्धा एवं सम्मान के साथ लिया जाएगा। सीएम ने कहा कि डॉ. आंबेडकर विपरीत परिस्थितियों में उच्च शिक्षा ग्रहण कर देश की सेवा के लिए आगे आए।

आज का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि, आज ही के दिन 29 जून 1928 को बाबा साहब ने समतामूलक समाज की स्थापना और देश की आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए ‘समता’ नामक साप्ताहिक समाचार पत्र का शुभारंभ किया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रयास से मध्य प्रदेश स्थित उनका जन्म स्थान महू छावनी, नागपुर में उनकी दीक्षा भूमि, दिल्ली स्थित महापरिनिर्वाण स्थल, मुंबई में चैत्य-भूमि तथा लंदन का वह घर जहां ब्रिटेन में रहते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई की। इन स्थलों को पंच तीर्थ के रूम में विकसित किया गया है।

शिक्षा परिवर्तन का माध्यम : राज्यपाल
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि शिक्षा परिवर्तन का माध्यम है। यह जीविका कमाने के साथ ही राष्ट्र निर्माण में योगदान देने में भी सहायक होती है। सांस्कृतिक केंद्र के शिलान्यास को गर्व का विषय बताते हुए उन्होंने कहा कि बाबा साहब का जीवन संघर्ष और उपलब्धियों की गाथा है। बाबा साहब द्वारा गढ़े गए संविधान से मिले कवच से देश के सभी लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहब चाहते थे कि शिक्षा शोषित और वंचित लोगों के जीवन में प्रकाश लाए।

राष्ट्र की चेतना व दिशा तय की : तिवारी
पर्यटन मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि बाबा साहब ने राष्ट्र की चेतना एवं दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने प्रदेश में धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों के विकास कार्यों की जानकारी भी दी।

ये प्रमुख लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लालजी प्रसाद निर्मल, मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी सहित अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

सांस्कृतिक केंद्र की खासियत
युवा पीढ़ी को बाबा साहब के आदर्शों से परिचित कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार की ओर से ऐशबाग लखनऊ में डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण प्रेरणा स्थल के रूप में कराया जा रहा है। इस स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र में बाबा साहब के दर्शन एवं विचारों, शिक्षाओं तथा देश के नवनिर्माण में उनके योगदान पर शोध करने के लिए एक संदर्भ पुस्तकालय एवं संग्रहालय भी स्थापित किया जा रहा है। 1.34 एकड़ क्षेत्र में बनने वाले इस केंद्र के निर्माण के लिए भूमि का चयन हो गया है। इसमें प्रवेश द्वार के ठीक सामने 25 फीट ऊंची डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। बाबा साहब की पवित्र अस्थियों का कलश भी दर्शनार्थ रखा जाएगा। सांस्कृतिक केंद्र में पुस्तकालय, शोध केंद्र, अत्याधुनिक प्रेक्षागृह, आभासी संग्रहालय, डॉरमेट्री, कैफेटेरिया, भूमिगत पार्किंग एवं अन्य जनसुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

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