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Lucknow News: नगर निगम की संपत्तियों के अवैध कब्जेदारों को वैध करने की तैयारी
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लखनऊ। नगर निगम ने किराए की संपत्तियों पर काबिज अवैध कब्जेदारों को वैध करने की तैयारी की है। इसके लिए निगम किरायेदारी ट्रांसफर करेगा। इस मामले में बनी समिति ने नगर निगम को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट चार सितंबर को नगर निगम सदन में रखे जाने की तैयारी है। सदन की मंजूरी के बाद इसे लागू किया जा सकेगा।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिया है कि जो किरायेदार चार महीने से अधिक किराया जमा करने में देरी करेंगे, उन पर 12 प्रतिशत ब्याज लगाया जाएगा। समिति के एक सदस्य ने बताया कि नगर निगम की शहर में करीब 2000 आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां हैं। इनमें करीब 70 प्रतिशत पर अवैध कब्जे और सिकमी किरायेदार हैं, जिसे लेकर विवाद है। नगर निगम इन्हें खाली भी नहीं करा पा रहा है। इससे आमदनी पर भी असर पड़ रहा है। समाधान के लिए समिति ने किरायेदारी नामांतरण को सहमति दी है। इस पर पूर्व में प्रस्ताव भी सदन में आया था। जिसमें अलग-अलग स्थिति में अलग-अलग रेट तय किए गए हैं। समिति ने जर्जर हो रहे किराये के मकानों व दुकानों की मरम्मत का सुझाव भी दिया है।
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ये तय हुआ है नामांतरण शुल्क
रेंट विभाग ने जो प्रस्ताव बनाया है, उसके तहत मूल आवंटी के स्थान पर उसके उत्तराधिकारी के नाम सर्वेंट क्वार्टर का नामांतरण शुल्क 15,000 रुपये, अन्य भवनों का 20,000 रुपये होगा। अमीनाबाद, कैसरबाग, चारबाग और हजरतगंज की दुकानों का 60,000 रुपये और अन्य क्षेत्रों के लिए 40,000 रुपये होगा। वहीं, जिन संपत्तियों पर लोग अवैध रूप से काबिज हैं, वहां सर्वेंट क्वार्टर का नामांतरण शुल्क 30,000 रुपये, मकान का 40,000 रुपये और अमीनाबाद, लालबाग, हजरतगंज, कैसरबाग व चारबाग में दुकान का 1,20,000 रुपये व अन्य क्षेत्र में 80,000 रुपये नामांतरण शुल्क होगा।
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समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिया है कि जो किरायेदार चार महीने से अधिक किराया जमा करने में देरी करेंगे, उन पर 12 प्रतिशत ब्याज लगाया जाएगा। समिति के एक सदस्य ने बताया कि नगर निगम की शहर में करीब 2000 आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां हैं। इनमें करीब 70 प्रतिशत पर अवैध कब्जे और सिकमी किरायेदार हैं, जिसे लेकर विवाद है। नगर निगम इन्हें खाली भी नहीं करा पा रहा है। इससे आमदनी पर भी असर पड़ रहा है। समाधान के लिए समिति ने किरायेदारी नामांतरण को सहमति दी है। इस पर पूर्व में प्रस्ताव भी सदन में आया था। जिसमें अलग-अलग स्थिति में अलग-अलग रेट तय किए गए हैं। समिति ने जर्जर हो रहे किराये के मकानों व दुकानों की मरम्मत का सुझाव भी दिया है।
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ये तय हुआ है नामांतरण शुल्क
रेंट विभाग ने जो प्रस्ताव बनाया है, उसके तहत मूल आवंटी के स्थान पर उसके उत्तराधिकारी के नाम सर्वेंट क्वार्टर का नामांतरण शुल्क 15,000 रुपये, अन्य भवनों का 20,000 रुपये होगा। अमीनाबाद, कैसरबाग, चारबाग और हजरतगंज की दुकानों का 60,000 रुपये और अन्य क्षेत्रों के लिए 40,000 रुपये होगा। वहीं, जिन संपत्तियों पर लोग अवैध रूप से काबिज हैं, वहां सर्वेंट क्वार्टर का नामांतरण शुल्क 30,000 रुपये, मकान का 40,000 रुपये और अमीनाबाद, लालबाग, हजरतगंज, कैसरबाग व चारबाग में दुकान का 1,20,000 रुपये व अन्य क्षेत्र में 80,000 रुपये नामांतरण शुल्क होगा।
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