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Lucknow News: नवजात की खरीद-फरोख्त मामले में डीएनए जांच की तैयारी
Thu, 06 Aug 2026 02:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 06 Aug 2026 02:24 AM IST
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लखनऊ। गुडंबा के सेंट मेरी पॉलीक्लीनिक में नवजात को बेचने के मामले में पुलिस अब बच्चे की वास्तविक मां की पहचान के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाएगी। पुलिस नवजात शिशु और दोनों महिलाओं का डीएनए टेस्ट कराने की तैयारी में है। वहीं, अस्पताल के फर्जी दस्तावेज सामने आने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन का संपर्क नवजातों की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह से तो नहीं है।
इंस्पेक्टर गुडंबा अंजनी ने बताया कि चाइल्ड लाइन को सोमवार को अस्पताल में जन्मे शिशु को रेनू को बेचे जाने की सूचना मिली थी। पुलिस जांच में सामने आया कि नवजात बहादुरपुर निवासी आरती का था। रेनू ने आरती से मकान के बदले बच्चा खरीदा था। सेंट मेरी पॉलीक्लीनिक की डॉक्टर शालू और डॉक्टर विनोद ने फर्जी दस्तावेज बनाए थे। पुलिस ने दोनों डॉक्टरों, रेनू, आरती और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने आरोपी डॉक्टरों और स्टाफ से पूछताछ की है। बच्चे से जुड़े सभी दस्तावेज कब्जे में लेकर फोरेंसिक साइंस लैब भेजे जाएंगे।
खंगाले जा रहे आरोपी डॉक्टरों के खाते
पुलिस फर्जीवाड़ा करने में शामिल डॉक्टरों के बैंक अकाउंट की जांच कर रही है। नवजात शिशु और दोनों महिलाओं का डीएनए और फिंगर प्रिंट टेस्ट होगा। पुलिस यह भी जांच रही है कि डॉक्टरों और अस्पताल का संपर्क बच्चा बेचने वाले गिरोह से तो नहीं है। अस्पताल के एक साल के बच्चों के जन्म रिकॉर्ड भी देखे जाएंगे।
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सीएआरए के निर्धारित नियमों के तहत गोद ले सकते हैं शिशु
भारत में शिशु गोद लेने की प्रक्रिया केवल किशोर न्याय अधिनियम, 2015 और केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) के नियमों से ही मान्य है। निजी समझौते या फर्जी दस्तावेज से बच्चा सौंपना कानूनन अवैध है।
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इंस्पेक्टर गुडंबा अंजनी ने बताया कि चाइल्ड लाइन को सोमवार को अस्पताल में जन्मे शिशु को रेनू को बेचे जाने की सूचना मिली थी। पुलिस जांच में सामने आया कि नवजात बहादुरपुर निवासी आरती का था। रेनू ने आरती से मकान के बदले बच्चा खरीदा था। सेंट मेरी पॉलीक्लीनिक की डॉक्टर शालू और डॉक्टर विनोद ने फर्जी दस्तावेज बनाए थे। पुलिस ने दोनों डॉक्टरों, रेनू, आरती और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने आरोपी डॉक्टरों और स्टाफ से पूछताछ की है। बच्चे से जुड़े सभी दस्तावेज कब्जे में लेकर फोरेंसिक साइंस लैब भेजे जाएंगे।
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खंगाले जा रहे आरोपी डॉक्टरों के खाते
पुलिस फर्जीवाड़ा करने में शामिल डॉक्टरों के बैंक अकाउंट की जांच कर रही है। नवजात शिशु और दोनों महिलाओं का डीएनए और फिंगर प्रिंट टेस्ट होगा। पुलिस यह भी जांच रही है कि डॉक्टरों और अस्पताल का संपर्क बच्चा बेचने वाले गिरोह से तो नहीं है। अस्पताल के एक साल के बच्चों के जन्म रिकॉर्ड भी देखे जाएंगे।
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सीएआरए के निर्धारित नियमों के तहत गोद ले सकते हैं शिशु
भारत में शिशु गोद लेने की प्रक्रिया केवल किशोर न्याय अधिनियम, 2015 और केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) के नियमों से ही मान्य है। निजी समझौते या फर्जी दस्तावेज से बच्चा सौंपना कानूनन अवैध है।