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गठबंधन करेगी प्रसपा, नहीं होगा विलय: शिवपाल

Wed, 07 Oct 2020 09:48 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 07 Oct 2020 09:48 PM IST
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Praspa will combine, will not merge: Shivpal
प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) की प्रदेश कार्यकारिणी की एक दिवसीय बैठक बुधवार को प्रदेश व केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे हमला करने और 2022 के विधानसभा चुनाव में जुटने के आह्वान के साथ संपन्न हो गई। प्रसपा प्रमुख शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि प्रसपा का स्वतंत्र अस्तित्व बना रहेगा। उन्हें प्रसपा के किसी दल में विलय की चर्चा को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पार्टी सम्मानजनक गठबंधन करेगी। उन्होंने गैर भाजपा दलों से एकजुटता की अपील की।
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प्रसपा के प्रदेश मुख्यालय में शिवपाल यादव की अध्यक्षता में शुरू हुई बैठक में पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि उनके सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने गांव, गरीब, किसान, पिछड़े, दलित, व्यवसायी, मध्यवर्ग और युवाओं को सिर्फ  छला है। सरकार शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान, रोजगार और इलाज उपलब्ध करा पाने में नाकाम रही है। बेटियों को सुरक्षा व न्याय नहीं दे पाने से सरकार के खिलाफ जनाक्रोश है। साढ़े चार घंटे चली बैठक में राष्ट्रीय महासचिव रामनरेश यादव ने राजनीतिक, आर्थिक प्रस्ताव पेश किया। बौद्धिक सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्र ने इसका अनुमोदन किया। प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। कुल 17 नेताओं ने राय रखी। राष्ट्रीय महासचिव आदित्य यादव ने उत्तर प्रदेश स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स के विरोध का प्रस्ताव रखा।
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प्रदेश के प्रमुख महासचिव वीरपाल यादव ने कहा कि देश के हालात 1990 के आर्थिक संकट से में भयावह है। पूर्व मंत्री कमाल यूसुफ  ने सच्चर कमेटी की सिफारिशें वर्तमान संदर्भ में लागू करने का प्रस्ताव रखा। पूर्व मंत्री शादाब फातिमा ने महिलाओं की सुरक्षा व सशक्तीकरण के लिए नए कानून की मांग का समर्थन किया। पूर्व सांसद व पूर्व विधायक रघुराज सिंह शाक्य, पूर्व मंत्री जय प्रकाश यादव, पूर्व मंत्री शारदा प्रताप शुक्ला, पूर्व मंत्री शिव कुमार बेरिया, पूर्व मंत्री जगवीर सिंह गुर्जर और प्रदेश अध्यक्ष सुंदर लाल लोधी ने अपने विचार रखे।
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प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय देश के औसत से आधी

कार्यकारिणी में पारित प्रस्ताव में कहा है कि प्रदेश में प्रति व्यक्ति सालान आय मात्र 70,419 रुपये है। यह देश की औसत आय (1,34,432 रुपये) की लगभग आधी व गोवा (4,75,532 रुपये) की प्रति व्यक्ति आय से करीब सात गुना कम है। शीर्ष एक फीसदी अमीरों व गरीबों में 60 लाख गुना अंतर है। इतनी आर्थिक विषमता दुनिया में कहीं भी नहीं है। प्रतिदिन 35 युवा बेरोजगार व 36 उद्यमी आत्महत्या कर रहे हैं। प्रस्ताव में सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को औने-पौने दामों में बेचने की कवायदों का पुरजोर विरोध किया गया है। कहा गया है कि 45 वर्षों में बेरोजगारी दर अपने अधिकतम स्तर पर है।

हर घर-एक रोजगार की मांग
प्रस्ताव में कहा गया है अलोकतांत्रिक तरीके से आनन-फानन में पारित कृषि विधेयकों के माध्यम से सरकार किसानों के हितों व सम्मान को पूंजीपतियों के दहलीज पर गिरवी रख चुकी है। धरना, प्रदर्शन, सत्याग्रह के लोकतांत्रिक अधिकारों का बर्बरतापूर्वक दमन किया जा रहा है। प्रदेश कार्यसमिति ने हाथरस में हुई घटना की घोर भर्त्सना करते हुए पीड़ितों के परिजनों के प्रति सांत्वना प्रकट करती है। कार्यसमिति ने हर घर में एक रोजगार और समान शिक्षा नीति की वकालत की है।



 
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