10 अक्टूबर से लगेगा महंगी बिजली का झटका
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अगले महीने बिजली दरों में बढ़ोतरी तय है। इस साल के टैरिफ ऑर्डर को अंतिम रूप दिए जाने की सुगबुगाहट के बीच पावर कॉर्पोरेशन भी मनमाफिक दरें तय कराने के लिए सक्रिय हो गया है।
छुट्टी होने के बावजूद शनिवार को राज्य विद्युत नियामक आयोग का दफ्तर खुला रहा और दिन भर खासी हलचल रही। पावर कॉर्पोरेशन की रेग्युलेटरी अफेयर यूनिट (आरएयू) के अधिकारी भी तय की जा रही दरों की टोह लेने की कोशिश करते रहे।
संभावना जताई जा रही है कि आयोग नई दरों का ऐलान 10 अक्तूबर के आसपास कर सकता है। महंगाई की मार से बेहाल जनता पर अगले महीने से बिजली के बिल का बोझ बढ़ना तय है।
किसी श्रेणी में पांच तो किसी में 20 फीसदी तक इजाफा होने के संकेत हैं। टैरिफ ऑर्डर को अंतिम रूप देने में जुटे आयोग के अधिकारी शनिवार को छुट्टी के बावजूद दफ्तर में डटे रहे।
वित्तीय संकट खत्म करने की कवायद
हालांकि तर्क यह दिया जा रहा था कि सोमवार को आयोग के नए भवन के होने वाले शिलान्यास की तैयारियों के लिए दफ्तर खोला गया है लेकिन जिस तरह से कॉर्पोरेशन के अधिकारी निदेशक (टैरिफ) के कमरे में जमे थे, उससे साफ लग रहा था कि बिजली दरों को लेकर ही जद्दोजहद चल रही है।
दिलचस्प यह है कि आयोग में कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के साथ वह कंसल्टेंट भी मौजूद था जिसकी भूमिका पिछले साल के टैरिफ में संदिग्ध पाई गई थी। इस कंसल्टेंट की आयोग जांच भी करा रहा है।
पावर कॉर्पोरेशन बिजली दरों का ऐसा ढांचा चाहता है जिससे हर महीने गैर सरकारी उपभोक्ताओं से कम से कम 2500 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सके। रेग्युलेटरी सरचार्ज समेत कुछ अन्य मदों में भी कॉर्पोरेशन बढ़ोतरी चाहता है जिससे उसे वित्तीय संकट का सामना न करना पड़े।
टैरिफ ऑर्डर तैयार, ऐलान का इंतजार
आयोग के अधिकारियों का कहना है कि टैरिफ ऑर्डर करीब-करीब तैयार कर लिया गया है। अब आयोग को तय करना है कि इसका ऐलान कब किया जाए। इसके लिए दशहरे और बकरीद की छुट्टी के बाद कोई तारीख मुकर्रर की जा सकती है। वैसे कॉर्पोरेशन ने 30 सितंबर या 1 अक्तूबर को ही टैरिफ ऑर्डर जारी कराने के लिए दबाव बना रखा है ताकि जल्द से जल्द नई दरें लागू हो सकें।
बिजली मीटर के दाम तय
नया बिजली कनेक्शन लेने वालों को अब 170 से 2766 रुपये तक कम भुगतान करना पड़ेगा। पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने शनिवार को सिंगल फेज व थ्री फेज मीटर के दाम में कमी के आदेश जारी कर दिए।
सभी विद्युत वितरण निगमों को अब उपभोक्ताओं से सिंगल फेज मीटर की कीमत 1150 की जगह 980 रुपये व थ्री फेज मीटर की कीमत 5725 के स्थान पर 2959 रुपये वसूलने को कहा गया है। इस फैसले से उपभोक्ताओं पर कनेक्शन का बोझ कम हो गया है।
गौरतलब है, बिजली कंपनियां विद्युत नियामक आयोग की आंख में धूल झोंककर कम दाम में मीटर खरीदकर उपभोक्ताओं से ज्यादा दाम वसूल रहीं थीं। यह खेल पिछले कई साल से चल रहा था। आयोग ने कॉर्पोरेशन के इस खेल का भांडा फोड़ते हुए 16 सितंबर को बिजली मीटर की दरें घटाने का आदेश दिया था। आयोग के आदेश के बाद शनिवार को पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक (वितरण) श्रीकांत प्रसाद ने संशोधित दरों के हिसाब से मीटर के दाम वसूलने का आदेश जारी कर दिया।
मध्यांचल लखनऊ, पूर्वांचल वाराणसी, दक्षिणांचल आगरा, पश्चिमांचल मेरठ और के स्को कानपुर विद्युत वितरण निगमों के प्रबंध निदेशक को भेजे पत्र में प्रसाद ने आयोग की ओर से सुओमोटो ऑर्डर द्वारा मीटर की नई दरें निर्धारित करने की जानकारी दी है। उन्होंने नई कास्ट डाटा बुक जारी होने या आयोग के अगले आदेशों तक इसी दर पर मीटर के दाम वसूलने को कहा है।
उपभोक्ताओं के साथ हो रहा था खेल
मीटर की दरें बढ़वाने के लिए पिछले महीने कॉर्पोरेशन की ओर से आयोग के समक्ष दाखिल याचिका पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा की आपत्ति के बाद खुलासा हुआ था कि बिजली कंपनियां कम दर पर मीटर खरीदकर उपभोक्ताओं को ज्यादा दाम पर दे रही हैं।
परिषद ने आरोप के समर्थन में कंपनियों द्वारा मीटर खरीद के लिए जारी किए गए लेटर ऑफ इंटेंट भी आयोग के समक्ष पेश किया था। आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन से जवाब मांगा तो उसने घटी दरों का प्रस्ताव दे दिया।
आयोग ने इसे स्वीकार करते हुए नई दरें तय होने या अगले आदेश तक इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश दिया था। अब बिजली कंपनियों को आयोग के आदेशानुसार ही मीटर की कीमत वसूलने के आदेश भेजे गए हैं।
ज्यादा कीमत की वापसी के लिए संघर्ष
उपभोक्ता परिषद ने अब उपभोक्ताओं से बीते चार साल में कनेक्शन लेने या मीटर बदलवाने वालों से वसूली गई ज्यादा कीमत की वापसी के लिए संघर्ष का ऐलान किया है। अवधेश वर्मा का कहना है कि 2010 से ही मीटर की ज्यादा कीमत वसूलने का खेल चल रहा है। कॉर्पोरेशन को इससे लगभग 300 करोड़ की अतिरिक्त कमाई हुई है। इसे वापस दिलाने के लिए संघर्ष छेड़ा जाएगा।