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बिजली कनेक्शन कटा तो 150 रुपये में नहीं बनेगा काम, देने होंगे और ज्यादा पैसे

Wed, 11 Oct 2017 11:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 11 Oct 2017 11:11 AM IST
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Power re connection charges increased.
- फोटो : Amar Ujala

वक्त पर बिल न जमा करने या किसी अन्य वजह से बिजली कनेक्शन कटने पर उसे जुड़वाने के लिए उपभोक्ताओं को अब 150 रुपये के बजाय 500 रुपये देना पड़ेगा। पावर कॉर्पोरेशन ने शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव नियामक आयोग को सौंपा है। दिलचस्प यह कि 2017-18 के लिए प्रस्तावित बिजली दरों पर चल रही जनसुनवाई के बीच पावर कॉर्पोरेशन ने गुपचुप तरीके से यह प्रस्ताव दाखिल किया है।

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मौजूदा समय में बिजली के बिल बकाए या किसी अन्य कारण से काटे गए कनेक्शन को जुड़वाने के लिए उपभोक्ता को 150 रुपये शुल्क जमा करना पड़ता है। कनेक्शन काटने का शुल्क भी वसूला जाता है। पावर कॉर्पोरेशन की ओर से नियामक आयोग के समक्ष दाखिल प्रस्ताव में इसे बढ़ाकर 500 रुपये करने को कहा गया है। आगे कनेक्शन कटने पर उसे जुड़वाने के लिए हर बार 250 रुपये अतिरिक्त शुल्क जोड़ने का प्रस्ताव है। यानी किसी उपभोक्ता का कनेक्शन अगर तीन बार कटता है तो उसे 1000 रुपये शुल्क जमा करना पड़ेगा।
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इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में अभी तक 100 हॉर्स पावर व 75 किलोवाट के ऊपर के उपभोक्ताओं के लिए 500 रुपये शुल्क था जिसे बढ़ाकर 1000 रुपये करने का प्रस्ताव है।100 हॉर्स पावर व 75 किलोवाट से कम के उपभोक्ताओं के लिए शुल्क 275 से बढ़ाकर 500 रुपये प्रस्तावित प्रस्तावित किया गया है। सूत्रों के अनुसार नियामक आयोग के चेयरमैन एसके. अग्रवाल के लखनऊ से बाहर होने की वजह से अभी कॉर्पोरेशन के प्रस्ताव पर विचार नहीं हुआ है।

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उपभोक्ता परिषद ने जताया एतराज

Power re connection charges increased.

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कॉर्पोरेशन के इस प्रस्ताव को नियम विरुद्ध बताते हुए कहा है कि बिजली दरों के  निर्धारण की प्रक्रिया के अंतिम समय में दिया गया यह प्रस्ताव विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के खिलाफ है।

परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि 2017-18 के  टैरिफ  प्रस्ताव के स्वीकार होने के बाद सुनवाई अंतिम दौर में है। ऐसे में कोई भी अतिरिक्त प्रस्ताव देना असंवैधानिक है। पावर कार्पोरेशन को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि टैरिफ  के रेट शिडयूल में आए दिन कोई बदलाव नहीं हो सकता।

अब सुनवाई केवल उन्हीं बिंदुओं पर हो सकती है जिसका सार्वजनिक प्रकाशन कराया गया है। वैसे भी बिजली कंपनियां बिना बिजली उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे ही उसे कटा मानकर बिल में शुल्क वसूल लेती हैं। वर्मा ने कहा कि नियामक आयोग अध्यक्ष के बुधवार को लौटने पर जनहित प्रत्यावेदन दाखिल कर प्रस्ताव को खारिज करने की मांग की जाएगी।

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