अभी तक इस मुद्दे को नहीं हल कर सके अखिलेश
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प्रदेश के लोगों को फिलहाल जल्द बिजली संकट से निजात मिलने के आसार नहीं हैं। केंद्रीय और राज्य के बिजलीघरों की इकाइयों के उत्पादन में गिरावट के चलते हालात सुधर नहीं रहे हैं।
हालांकि मौसम में बदलाव के चलते घरेलू बिजली की मांग में थोड़ी कमी हुई है लेकिन बारिश न होने से सिंचाई के लिए बिजली की मांग बढ़ गई है।
पावर कॉर्पोरेशन पर ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा आपूर्ति का दबाव बढ़ता जा रहा है। उधर, कोयला न पहुंचने की वजह से पारीछा बिजलीघर की बंद इकाइयों को शुक्रवार को भी नहीं चालू किया जा सका।
हर रोज पांच करोड़ की खरीद के बाद भी मुश्किल
पर्याप्त उपलब्धता न होने से गांवों से लेकर शहरों तक अतिरिक्त आपात कटौती का सिलसिला जारी है। प्रदेश में बिजली की मांग 12,500 मेगावाट के आसपास है जबकि उपलब्धता 11,000-11,500 मेगावाट के बीच ही है।
राज्य के बिजलीघरों का उत्पादन घटने से हालात बदतर होते जा रहे हैं। प्रदेश के बिजलीघरों का कुल उत्पादन घटकर 2000-2100 मेगावाट के आसपास रह गया है।
दूसरी तरफ केंद्रीय सेक्टर के बिजलीघरों की इकाइयों के बंद होने से प्रदेश को केंद्र से मिलने वाली बिजली के कोटे में कमी हो गई है।
एनर्जी एक्सचेंज से रोजाना चार-पांच करोड़ रुपये की बिजली खरीदने के बाद भी निर्धारित शिड्यूल केहिसाब से आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
गांवों को मिल रही सात घंटे बिजली
गांवों को औसतन सात-घंटे तथा जिला मुख्यालयों को 14-15 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। मंडल मुख्यालयों और महानगरों में भी तीन से चार घंटे अतिरिक्त आपात कटौती का सिलसिला जारी है।
बारिश न होने की वजह से गांवों में सिंचाई के लिए बिजली की मांग बढ़ गई है। ज्यादातर जिलों से इसके लिए अनुरोध किया जा रहा है। शक्ति भवन स्थित नियंत्रण कक्ष के अभियंताओं का कहना है कि राज्य के बिजलीघरों के उत्पादन की स्थिति को देखते हुए अब प्रदेश में आपूर्ति का पूरा दारोमदार केंद्र से मिलने वाली बिजली पर ही।
केंद्र से लिया जा रहा उधार
केंद्र से 6,000-7,000 मेगावाट तक बिजली ली जा रही जा रही है। जरूरत पड़ने पर थोड़ा-बहुत ओवरड्रा (तय कोटे से ज्यादा बिजली आयात) भी किया जा रहा है। घरेलू लोड धीरे-धीरे कृषि की तरफ बढ़ रहा है।
सिंचाई के लिए गांवों को कम से कम 10 घंटे बिजली देने की कोशिश की जा रही है। अनपरा और पारीछा की बंद इकाइयां चल जाएं तो दबाव थोड़ा कम हो सकता है और गांवों को शिड्यूल के अनुसार आपूर्ति संभव हो सकेगी।