विद्युत उपभोक्ताओं से पुरानी दर से वसूली जा रही री-कनेक्शन व डिस्कनेक्शन फीस
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उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के आदेश के बावजूद प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं से ‘री-कनेक्शन’ व ‘डिस्कनेक्शन’ (आरसीडीसी) फीस पुराने दर से ही वसूली जा रही है। जबकि बीते 11 नंवबर को आयोग द्वारा जारी नये बिजली दर के टैरिफ में आरसीडीसी फीस को 600 रुपये से घटाकर 100 और 200 रुपये कर दिया गया है।
पावर कॉरपोरेशन के आईटी विंग द्वारा बिलिंग सॉफ्टवेयर में आरसीडीसी फीस की नई दर को संशोधित नहीं किए जाने से उपभोक्ताओं से अभी भी पुराने दर से ही फीस वसूली जा रही है। पावर कॉरपोरेशन के आईटी विंग के इस कारनामे की जानकारी तब मिली जब कुछ उपभोक्ताओं नें उप्र विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा से मिलकर शिकायत की।
इस पर अवधेश वर्मा ने 21 दिसंबर को जमा बिल के साथ मंगलवार को अधीक्षण अभियंता आईटी व निदेशक वाणिज्य एके श्रीवास्तव के पास पहुंचे। उन्होंने निदेशक वाणिज्य को पूरी बात बताई तब पहले तो उन्होंने सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी होने की बात से इंकार कर दिया, लेकिन जब अवधेश वर्मा ने उन्हें एक उपभोक्ता द्वारा 21 दिसंबर को जमा किए गए बिल की कॉपी दिखाई तो निदेशक ने आश्वस्त किया है कि जल्द ही सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी ठीक कराएंगे।
अगले बिल में समायोजित की जाए अतिरिक्त राशि
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने निदेशक वाणिज्य से यह भी मांग की है कि 11 नवंबर के बाद जिन उपभोक्ताओं से आरसीडीसी फीस के रूप में 600 रुपये वसूल किए गए हैं, वह उनके अगले बिल में समायोजित कर दिए जाएं। इस पर निदेशक वाणिज्य ने अधिक समायोजन कराने का भरोसा दिया है।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने बताया कि 11 नवंबर को जारी नये बिजली टैरिफ में नियामक आयोग ने कोई बदलाव न करते हुए सिर्फ आरसीडीसी फीस के तौर पर लिए जाने वाले 600 रुपये को कम किया है।
आयोग ने 5 किलोवाट तक का कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं से 100 रुपये और इससे अधिक विद्युत भार के स्मार्ट मीटर के कनेक्शनधारी उपभोक्ताओं से 200 रुपये ही आरसीडीसी फीस लेने का आदेश जारी किया था। इस आदेश को भी 11 नवंबर से ही लागू कर दिया गया था। इसके बावजूद उपभोक्ताओं से अधिक वसूली हो रही है।